पाकिस्तान: क्या ‘पंजाब कार्ड’ खेल कर अपनी सरकार बचा पाएंगे इमरान खान?
इमरान खान ने सोमवार को पंजाब प्रांत में अपनी पार्टी के मुख्यमंत्री उस्मान बुजदार को इस्तीफा देने का निर्देश दिया। उसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद पीटीआई के सहयोगी दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) के नेता चौधरी परवेज इलाही को देने की पेशकश की। इस तरह इमरान खान ने केंद्र में पीएमएल-क्यू का समर्थन जारी रहने को सुनिश्चित कर लिया...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पाकिस्तान में संघीय सरकार के खिलाफ नेशनल असेंबली में पेश अविश्वास प्रस्ताव पर चल रही रस्साकशी के बीच प्रधानमंत्री इमरान खान ने ‘पंजाब कार्ड’ खेला है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक मुमकिन है कि इमरान खान इसके बावजूद अपनी सरकार बचाने में कामयाब न हों, लेकिन इसका दूरगामी फायदा उन्हें मिल सकता है। फिलहाल इस कार्ड से वे पंजाब में अपनी पार्टी- पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ को सत्ता में हिस्सेदार बनाए रखने में सफल हो गए हैं। यह अगले चुनाव के लिहाज से अहम है। पंजाब पाकिस्तान में सबसे बड़ा और सियासत में सबसे प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला राज्य है।
पीएमएल-क्यू का समर्थन जारी
इमरान खान ने सोमवार को पंजाब प्रांत में अपनी पार्टी के मुख्यमंत्री उस्मान बुजदार को इस्तीफा देने का निर्देश दिया। उसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद पीटीआई के सहयोगी दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) के नेता चौधरी परवेज इलाही को देने की पेशकश की। इस तरह इमरान खान ने केंद्र में पीएमएल-क्यू का समर्थन जारी रहने को सुनिश्चित कर लिया। उधर इससे यह भी तय हो गया कि पंजाब में पीटीआई सत्ता में हिस्सेदार बनी रहेगी।
बताया जाता है कि बुजदार पंजाब में काफी अलोकप्रिय हो गए थे। पीटीआई में हुई हालिया बगावत का एक कारण उनके तौर-तरीकों को भी समझा जाता है। इसलिए पीटीआई को उम्मीद है कि पाला बदलने वाले पीटीआई के कुछ सांसद अब फिर से पार्टी में लौट सकते हैं।
लेकिन इमरान खान एक अन्य सहयोगी दल बलूचिस्तान अवामी पार्टी (बीएपी) को मनाने में नाकाम रहे हैं। बीएपी ने सोमवार को सार्वजनिक घोषणा कर दी कि उसके चार सांसद अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार के खिलाफ वोट डालेंगे। बीएपी के नेता मीर खालिद खान मागसी ने यह एलान विपक्षी नेताओं- पीएमएल (नवाज) के शाहबाज शरीफ, जमीयत इस्लामी के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो के साथ एक साझा प्रेस कांफ्रेंस में किया।
मतदान चार अप्रैल को होने की संभावना
सोमवार को इमरान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव औपचारिक रूप से पेश कर दिया गया। इसे सदन में विपक्ष के नेता शाहबाज शरीफ ने रखा। लेकिन उसके तुरंत बाद स्पीकर ने सदन की बैठक 31 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी। पाकिस्तानी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक पीटीआई अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान को अंतिम संभव समय तक टालना चाहती है। इसलिए संभावना जताई गई है कि ये मतदान चार अप्रैल को होगा।
अखबार द न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीएमएल-क्यू का समर्थन हासिल कर इमरान खान ने अपने हाथ से निकलती बाजी को कुछ हद तक संभाल लिया है। अब पीटीआई का पूरा ध्यान एमक्यूएम (पी) को साथ बनाए रखने पर टिक गया है। सोमवार को पीटीआई नेताओं की एमक्यूएम (पी) के नेताओं के साथ डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई। खबरों के मुताबिक अभी तक एमक्यूएम (पी) ने सरकार को कोई भरोसा नहीं दिया है। बल्कि उसकी तरफ से कहा है कि पार्टी की बैठक में अविश्वास प्रस्ताव पर अंतिम फैसला किया जाएगा। एमक्यूएम (पी) के नेशनल असेंबली में सात सदस्य हैँ।
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में 342 सदस्य हैं। इसलिए बहुमत साबित करने के लिए सरकार को 172 सदस्यों के समर्थन की जरूरत है। पहले सरकार के साथ 179 सदस्य थे। बीएपी के चार सदस्यों के निकलने के बाद अब ये संख्या 175 रह गई है। लेकिन उनमें पीटीआई के वे सदस्य भी शामिल हैं, जो अपना पाला बदल चुके हैं।