Sri Lanka: श्रीलंका में इसी वर्ष होगा राष्ट्रपति चुनाव, क्या संविधान संशोधन के लिए तैयार होंगे विक्रमसिंघे?
श्रीलंका के संविधान में समय से पहले चुनाव का प्रावधान नहीं है। इसलिए अगर विक्रमसिंघे सचमुच जल्द चुनाव कराना चाहते हैं, तो उन्हें इसके लिए पहले संविधान में संशोधन करना होगा। राष्ट्रपति का मौजूदा कार्यकाल 2024 के नवंबर तक है...
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खबर है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे खुद के लिए जनादेश हासिल करने के मकसद से इसी वर्ष राष्ट्रपति चुनाव कराने की तैयारी कर रहे हैं। विक्रमसिंघे पिछले साल एक खास परिस्थिति में राष्ट्रपति बने थे। उनकी अकसर यह आलोचना होती रहती है कि बिना जनता से निर्वाचित हुए वे सारी सत्ता को अपने हाथ में लेते चले गए हैं। खबरों के मुताबिक अब विक्रमसिंघे ने इस आलोचना से उबरने का मन बना लिया है।
यह खबर श्रीलंका के सियासी हलकों में काफी चर्चित है। इस बीच कुछ हलकों से यह भी कहा गया है कि श्रीलंका के संविधान में समय से पहले चुनाव का प्रावधान नहीं है। इसलिए अगर विक्रमसिंघे सचमुच जल्द चुनाव कराना चाहते हैं, तो उन्हें इसके लिए पहले संविधान में संशोधन करना होगा। राष्ट्रपति का मौजूदा कार्यकाल 2024 के नवंबर तक है।
जाने-माने वकील गेहान गुनातिलके ने वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम ने कहा कि संविधान संशोधन के बिना तय समय से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है। संविधान संशोधन को पारित कराने के लिए संसद में दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। इसके बाद भी पारित बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। अगर सुप्रीम कोर्ट ने संविधान संशोधन को वैध ठहराया, तभी जाकर इस वर्ष चुनाव कराना संभव हो सकेगा। अगर सुप्रीम कोर्ट ने उसे अवैध ठहरा दिया, तो फिर राष्ट्रपति के पास एकमात्र रास्ता इस संशोधन बिल पर जनमत संग्रह कराने का बचेगा।
विक्रमसिंघे श्रीलंका के संविधान के अनुच्छेद 40 के तहत जुलाई 2022 में राष्ट्रपति चुने गए थे। इस अनुच्छेद में प्रावधान है कि राष्ट्रपति का पद खाली हो जाने की स्थिति में संसद अपने सदस्यों के बीच से किसी एक को राष्ट्रपति चुन सकती है। पिछले साल आर्थिक संकट गहराने के साथ देश में निर्वाचित राष्ट्रपति गोताबया राजपक्षे के खिलाफ बगावत जैसी हालत बन गई थी। इस कारण उन्हें पद छोड़ कर विदेश भागना पड़ा था। राजपक्षे ने अपने इस्तीफे के पहले विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया था। बाद में संसद ने उन्हें राष्ट्रपति चुन लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक जल्द चुनाव कराने के लिए पेश संविधान संशोधन बिल को संसद में आसानी से दो तिहाई बहुमत मिल जाएगा। मुख्य विपक्षी दल समगई जना बलावेगया (एसजेबी) पहले ही एलान कर चुका है कि जल्द राष्ट्रपति चुनाव कराने के लिए किसी प्रस्ताव का वह समर्थन करेगा। एसजेबी ने बीते 16 मई को अपने नेता सजित प्रेमदासा को राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किया था। प्रेमदासा अपनी पार्टी के नेतृत्व में कई विपक्षी पार्टियों का गठबंधन बनाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं।
जानकारों के मुताबिक चूंकि सभी विपक्षी पार्टियां जल्द से जल्द चुनाव चाहती हैं, इसलिए इसके लिए लाए गए विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दिए जाने की संभावना कम है। आम राय है कि अगर विक्रमसिंघे ने सचमुच इसी वर्ष चुनाव कराने की पहल की, तो उस पर आम सहमति बन जाएगी। विक्रमसिंघे सरकार ने स्थानीय चुनावों को टालने का फैसला किया था। इसको लेकर विपक्षी दल लगातार उसके खिलाफ मुहिम चलाते रहे हैं। अब संभावना है कि राष्ट्रपति चुनाव के साथ स्थानीय चुनाव भी कराए जाएंगे।