{"_id":"649b019ccc6ac037e40c8703","slug":"president-ranil-wickremesinghe-said-would-not-allow-sri-lanka-to-be-used-as-base-for-threats-against-india-2023-06-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sri Lanka : राष्ट्रपति बोले- श्रीलंका को भारत के खिलाफ उपयोग नहीं होने देंगे, चीन के साथ कोई सैन्य समझौता नहीं","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Sri Lanka : राष्ट्रपति बोले- श्रीलंका को भारत के खिलाफ उपयोग नहीं होने देंगे, चीन के साथ कोई सैन्य समझौता नहीं
Tue, 27 Jun 2023 09:05 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, कोलंबो।
पीटीआई, कोलंबो।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 27 Jun 2023 09:05 PM IST
सार
फ्रांस की मीडिया के साथ एक साक्षात्कार में विक्रमसिंघे ने कहा, हम एक तटस्थ देश हैं, लेकिन हम इस तथ्य पर भी जोर देते हैं कि हम श्रीलंका को भारत के खिलाफ किसी भी खतरे के लिए आधार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दे सकते।
विज्ञापन
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे।
- फोटो : Agency (File Photo)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि श्रीलंका को भारत के खिलाफ किसी भी खतरे के लिए आधार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि द्वीप राष्ट्र "तटस्थ" रहेगा और चीन के साथ उसका कोई सैन्य समझौता नहीं होगा। ब्रिटेन और फ्रांस की आधिकारिक यात्रा पर गए विक्रमसिंघे ने सोमवार को फ्रांस की सरकारी मीडिया के साथ एक साक्षात्कार के दौरान यह टिप्पणी की।
विज्ञापन
फ्रांस की मीडिया के साथ एक साक्षात्कार में विक्रमसिंघे ने कहा, हम एक तटस्थ देश हैं, लेकिन हम इस तथ्य पर भी जोर देते हैं कि हम श्रीलंका को भारत के खिलाफ किसी भी खतरे के लिए आधार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दे सकते। श्रीलंका में चीन की कथित सैन्य उपस्थिति के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने कहा कि चीनी देश में लगभग 1500 वर्षों से हैं, लेकिन अब तक उनका कोई सैन्य अड्डा नहीं है।
विज्ञापन
विक्रमसिंघे ने इस बात पर जोर दिया कि श्रीलंका का चीन के साथ कोई सैन्य समझौता नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि आगे भी कोई सैन्य समझौता नहीं होगा। मुझे नहीं लगता कि चीन किसी समझौते में शामिल होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि चीन द्वारा हंबनटोटा के दक्षिणी बंदरगाह के सैन्य उपयोग का कोई मुद्दा नहीं है। गौरतलब है कि हंबनटोटा बंदरगाह को बीजिंग ने 2017 में ऋण के बदले 99 साल की लीज पर ले लिया था।
विज्ञापन
उन्होंने आश्वासन दिया कि भले ही हंबनटोटा बंदरगाह चीन के व्यापारियों को दे दिया गया है, लेकिन इसकी सुरक्षा का नियंत्रण श्रीलंका सरकार के पास है। उन्होंने कहा, दक्षिणी नौसेना कमान को हंबनटोटा में स्थानांतरित कर दिया जाएगा और हमने हंबनटोटा में आसपास के इलाकों में एक ब्रिगेड तैनात कर दी है।
पिछले साल, श्रीलंका ने चीनी बैलिस्टिक मिसाइल और उपग्रह ट्रैकिंग जहाज युआन वांग-5 (Yuan Wang 5) को हंबनटोटा बंदरगाह पर खड़ा होने की अनुमति दी थी, जिससे रणनीतिक रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती समुद्री उपस्थिति के बारे में भारत और अमेरिका में आशंका बढ़ गई थी। नई दिल्ली को इस बात की आशंका थी कि जहाज के ट्रैकिंग सिस्टम श्रीलंकाई बंदरगाह के रास्ते भारतीय प्रतिष्ठानों पर जासूसी करने का प्रयास कर सकते हैं।
भारत और श्रीलंका के बीच संबंधों में तब तनाव आ गया था जब कोलंबो ने 2014 में अपने एक बंदरगाह पर चीनी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी को खड़ा करने की अनुमति दे दी थी। 74 वर्षीय विक्रमसिंघे को पिछले साल पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति चुना गया था।