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चुनाव जीतने के लिए आव्रजकों से बर्बरता पर उतारू फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों? प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी कर रही पुलिस

Wed, 25 Nov 2020 07:00 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 25 Nov 2020 07:00 PM IST
सार

राष्ट्रपति मैक्रों 2022 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी में हैं। इसमें वे अपनी छवि एक सख्त नेता की पेश करना चाहते हैं...

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President Macron of France venturing vandalism from immigrants to win election, Police misbehaving with protesters
emmanuel macron - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

प्रदर्शनकारियों से बर्बर व्यवहार के आरोप पहले से झेल रही फ्रांस की पुलिस अब एक नए मामले में आलोचनाओं के कठघरे में है। यहां जिस तरह उसने आव्रजकों के सैकड़ों के टेंट ढाह दिए और उस दौरान आव्रजकों से उसने जैसा व्यवहार किया, उसकी फ्रेंच सिविल सोसायटी में कड़ी आलोचना हो रही है। ये घटना वैसे सोमवार रात हुई, लेकिन यह चर्चा में मंगलवार दोपहर बाद आई, जब कुछ पत्रकारों ने घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। खुद फ्रांस के गृह मंत्री जेरार्ड दारमाना ने कहा है कि कुछ वीडियो में दर्ज विवरण सदमा पहुंचाने वाले हैं। दारमाना पुलिस के कट्टर समर्थक रहे हैं। लेकिन इस घटना पर उन्होंने कहा कि उन्होंने इंस्पेक्टर जनरल से इस मामले की जांच करने और 48 घंटों के अंदर रिपोर्ट देने को कहा है।

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ये घटना ठीक उस समय हुई है, जब देश की संसद ने उस नए सुरक्षा कानून को मंजूरी दी है, जिसके तहत किसी पुलिस अधिकारी की तस्वीर या वीडियो प्रसारित करना दंडनीय अपराध बना दिया जाएगा। पत्रकार, छात्र और कई जन संगठन पहले से इस कानून का विरोध कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठनों ने भी इसकी आलोचना की है। इसमें ताजा नाम यूरोपीय आयोग का जुड़ा है, जिसने मंगलवार को कहा कि वह इस बात की जांच करेगा कि फ्रांस का ये कानून यूरोपीय कानून से मेल खाता है या नहीं।
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आयोग ने कहा कि पत्रकारों को पूरी स्वतंत्रता और पूरी सुरक्षा के माहौल में काम करने का मौका मिलना चाहिए। अब इस के विरोधियों की तरफ से ये सवाल उठाया गया है कि अगर ये कानून लागू होता, तो क्या लोग आव्रजकों के टेंट ढाहने के दृश्य वाले वीडियो जारी करने की हिम्मत दिखाते, जिससे ये घटना सामने आई है?    
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हालांकि गृह मंत्री दारमाना ने ताजा घटना की जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने गैर कानूनी ढंग से फ्रांस आव्रजकों के टेंट को तोड़ा। आरोप यह लगाया गया है कि पुलिस बिना सरकार के इशारे के ऐसा कदम नहीं उठाती। हाल में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार लगातार आव्रजक विरोधी और मुस्लिम विरोधी रुख अपनाती गई है। आर्थिक मामलों पर प्रदर्शन करने वाले समूहों पर भी पुलिस ने हाल में कार्रवाई सख्त कार्रवाई की है। मानव अधिकार संगठनों का आरोप है कि फ्रेंच पुलिस अब बेखौफ होकर नागरिक अधिकारों का उल्लंघन कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति मैक्रों 2022 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी में हैं। इसमें वे अपनी छवि एक सख्त नेता की पेश करना चाहते हैं। विश्लेषकों के मुताबिक अगले राष्ट्रपति चुनाव में मैक्रों को सबसे कड़ी चुनौती धुर दक्षिणपंथी पार्टी नेशनल रैली की नेता मेरी ली पां से मिलने वाली है। मेरी ली पां आव्रजकों को जबरन देश से निकालने और देश की आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत करने का वादा करती रही हैं। जानकारों के मुताबिक अपने मौजूदा रुख से मैक्रों उनकी इस चुनौती को बेअसर करना चाहते हैं।

जनमत सर्वे करने वाली एजेंसी आईफॉप से जुड़े एनालिस्ट जिरोम फॉर्के के मुताबिक पिछले तीन साल में मैक्रों की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है। पिछले चुनाव में बहुत से वामपंथ की ओर झुकाव रखने वाले मतदाताओं ने उन्हें वोट दिया था। लेकिन मैक्रों की दक्षिणपंथी नीतियों के कारण वे उनका साथ छो चुके हैं। ऐसे में मैक्रों दक्षिणपंथी और धुर दक्षिणपंथी वोटों के लिए होड़ कर रहे हैं।

इसी कोशिश में मैक्रों ने दारमाना को गृह मंत्री बनाया, जबकि वे पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सारकोजी के खास रहे हैं। मैक्रों और दारमाना ने मुस्लिम जीवनशैली को पहले से निशाना बना रखा है। दारमाना ने पिछले दिनों हलाल मीट के बारे में प्रतिकूल टिप्पणी की थी। ताजा घटना से लगता है कि अब सरकार ने आव्रजकों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है।


लेकिन इससे मैक्रों की पार्टी- ला रिपब्लिके एन मार्श- में फूट पड़ गई है। उनकी पार्टी से 43 सांसद अलग हो गए हैं। इनमें से कई ने खुद पार्टी छोड़ दी, जबकि कुछ को पार्टी से निकाल दिया गया। इनमें ज्यादातर सांसद इस पार्टी में आने के पहले सिविल सोसायटी के संगठनों से जुड़े थे। उनमें से कुछ ने यह कर पार्टी छोड़ी कि ये पार्टी अब फ्रांस के लोगों से विश्वासघात कर रही है।

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