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Pope Francis Passes Away: पोप फ्रांसिस का निधन, 88 साल की उम्र में ली आखिरी सांस; भारत में तीन का राजकीय शोक

Mon, 21 Apr 2025 10:31 PM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 21 Apr 2025 10:31 PM IST
सार

पोप फ्रांसिस के निधन की पुष्टि वेटिकन ने सोमवार को बयान जारी कर की। बयान में कहा गया कि वह रोमन कैथोलिक चर्च के पहले लैटिन अमेरिकी थे। उनके दोनों फेफड़ों में न्यूमोनिया था। वह लंबे समय तक अस्पताल में थे। वेटिकन के कार्डिनल केविन फेरेल ने कहा कि पोप फ्रांसिस का पूरा जीवन ईश्वर की सेवा में समर्पित रहा।

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Pope Francis died on Easter Monday April 21 at the age of 88 at his residence in the Vatican Casa Santa Marta
Pope Francis - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पोप फ्रांसिस अब हमारे बीच नहीं रहे। सोमवार 21 अप्रैल, 2025 को 88 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उन्होंने वेटिकन के कासा सांता मार्टा स्थित अपने निवास पर सुबह 7.30 बजे (स्थानीय समयानुसार) अंतिम सांस ली। वेटिकन समाचार के मुताबिक, वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बीते दिन ईस्टर के अवसर पर लंबे समय के बाद वे लोगों के सामने आए थे। भारत सरकार ने पोप फ्रांसिस के निधन पर तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है।

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पोप फ्रांसिस जेसुइट ऑर्डर से पहले पोप थे। 8वीं शताब्दी के बाद से यूरोप के बाहर से पहले पोप थे। अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो के रूप में जन्मे पोप फ्रांसिस 1969 में कैथोलिक पादरी नियुक्त किया गया था। 28 फरवरी, 2013 को पोप बेनेडिक्ट XVI के इस्तीफे के बाद 13 मार्च को एक पोप सम्मेलन ने कार्डिनल बर्गोग्लियो को उनका उत्तराधिकारी चुना। उन्होंने सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी के सम्मान में फ्रांसिस को अपना पोप नाम चुना। अब आधिकारिक शोक की 14 दिन की अवधि होगी, जिसके बाद कार्डिनल मसीह के नए विकर का चुनाव करने के लिए सम्मेलन में जाएंगे।
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लंबे समय से बीमार चल रहे थे पोप फ्रांसिस
पोप फ्रांसिस लंबे समय से बीमार चल रहे थे। लगभग एक महीने तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद पोप 24 मार्च को अपने निवास स्थान कासा सांता मार्टा लौटे थे। अस्पताल से लौटने पर उन्होंने बड़ी संख्या में अस्पताल के बाहर जमा हुए लोगों को आशीर्वाद दिया था। सार्वजनिक रूप से पोप को देखने के बाद लोग काफी खुश दिखे थे और जयकारे भी लगाए थे।
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करीब एक महीने से ज्यादा समय तक अस्पताल में रहे थे भर्ती
पोप फ्रांसिस को 14 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें डबल निमोनिया हो गया था। अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में उनका चला था। एक महीने से ज्यादा समय अस्पताल में बिताने के बाद उन्हें छुट्टी दी गई थी। पोप की देखभाल करने वाले सर्जरी प्रमुख सर्जियो अल्फिएरी ने बताया था कि उन्हें दवाइयां की जरूरत पड़ती रहेगी।

युवावस्था में निकाला गया था फेफडे़ का हिस्सा
पोप फ्रांसिस जब जवान थे, तब उनके एक फेफड़े में संक्रमण के कारण उसे हटाना पड़ा था। इस कारण उन्हें सांस से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा था। 2023 में भी उन्हें फेफड़ों में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।


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भारत की यात्रा की थी अटकलें
पोप फ्रांसिस भारत आने वाले थे। पिछले साल दिसंबर में केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने बताया था कि पोप फ्रांसिस के 2025 के बाद भारत दौरे पर आने की संभावना है। 2025 को कैथोलिक चर्च ने जुबली वर्ष के रूप में घोषित किया है। भारत पहले ही पोप फ्रांसिस को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें सीधे तौर पर निमंत्रण दे चुके हैं। यात्रा पोप की सेहत और सुविधा के अनुसार निर्धारित की जाने वाली थी।

पोप फ्रांसिस का आखिरी संदेश
पोप फ्रांसिस ने अपने आखिर संदेश में जरूरतमंदों की मदद करने, भूखों को खाना देने और विकास को बढ़ावा देने वाली पहलों को प्रोत्साहित करने की अपील की थी। ईस्टर पर जारी अपने संदेश में उन्होंने लिखा, 'मैं हमारी दुनिया में राजनीतिक जिम्मेदारी के पदों पर बैठे सभी लोगों से अपील करता हूं कि वे डर के आगे न झुकें। डर दूसरों से अलगाव की ओर ले जाता है। सभी जरूरतमंदों की मदद करने, भूख से लड़ने और विकास को बढ़ावा देने वाली पहलों को प्रोत्साहित करने के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करें। ये शांति के हथियार हैं, हथियार जो मौत के बीज बोने के बजाय भविष्य का निर्माण करते हैं! मानवता का सिद्धांत हमारे दैनिक कार्यों की पहचान बनने से कभी न चूके।'

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