पीएम मोदी का विदेश दौरा: दुनिया के पांच शीर्ष कॉरपोरेट दिग्गजों से मुलाकात के मायने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी दौरे के पहले दिन पांच दिग्गज कंपनियों के सीईओ से व्यक्तिगत मुलाकात की। इनमें जनरल एटॉमिक्स के विवेक लाल, एडोबी के शांतनु नारायण, क्वालकॉम के सीईओ क्रिश्टियानो आर एमॉन, फर्स्ट सोलर के मार्क विडमर और ब्लैकस्टोन के स्टीफन ए श्वार्जमैन शामिल हैं। यहां जानिए, इन सीईओ से मिलने की वजह और भारत के लिए इन कंपनियों की अहमियत...
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विस्तार
विवेक लाल : भारत की ड्रोन सुरक्षा में होगी बड़ी भूमिका
23 हजार करोड़ का सालाना राजस्व
विवेक ने पिछले साल एक जून को रक्षा क्षेत्र की शीर्ष कंपनी जनरल एटॉमिक्स के सीईओ का पद संभाला था। जनरल एटॉमिक्स अत्याधुनिक सैन्य ड्रोन की शीर्ष निर्माता है।
- अमेरिका ये ड्रोन चुनिंदा साझेदारों को ही देता है। पाकिस्तानी ड्रोन हमलों के मद्देनजर भारत सैन्य ड्रोन क्षेत्र में मजबूती हासिल करना चाहता है। लाल ने भारत-अमेरिकी रक्षा करार में भी भूमिका निभाई है।
शांतनु नारायण : आईटी और डिजिटल जरूरतों में साझेदार
21 लाख करोड़ है एडोबी का बाजार मूल्य
भारतीय मूल के नारायण एडोबी के सीईओ हैं। नारायण के साथ बैठक आईटी और डिजिटल प्राथमिकता को दर्शाती है, जिस पर भारत सरकार जोर दे रही है।
- एडोबी के भारत में बंगलूरू, नोएडा और गुरुग्राम में दफ्तर हैं। देश में करीब छह हजार कर्मचारी हैं। कंपनी की शुद्ध आय 2.95 अरब डॉलर है। यह मल्टीनेशनल कंपनी एडोबी इलस्ट्रेटर या एडोबी एक्रोबैट जैसे सॉफ्टवेयर बनाने के लिए मशहूर है।
क्रिस्टियानो ई एमॉन : 5जी को दे सकते हैं कारगर रफ्तार
12लाख करोड़ से अधिक है बाजार मूल्य
अमेरिकी कंपनी क्वॉलकॉम के सीईओ एमॉन के साथ पीएम की बैठक को भारत में 5जी के लिए अहम माना जा रहा है। भारत क्वालकॉम से बड़े निवेश की उम्मीद कर रहा है। 2020 में क्वॉलकॉम का राजस्व 23.53 अरब डॉलर था।
- सैन डिएगो में स्थित कंपनी 5जी के क्षेत्र में काफी काम कर रही है। कंपनी चिप, सेमीकंडक्टर, सॉफ्टवेयर, वायरलेस तकनीक सेवाओं के कारोबार से जुड़ी है।
मार्क विडमर : जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में होगा योगदान
70 हजार करोड़ से ज्यादा की है कंपनी
विडमर फर्स्ट सोलर कंपनी के सीईओ हैं। सोलर पैनल निर्माता फर्स्ट सोलर दुनिया में फोटोवोल्टेक तकनीक में अग्रणी है। कंपनी ने भारत में 68.4 करोड़ डॉलर की लागत से 3.3 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ने का एलान किया है। पीएम मोदी के साथ मार्क विडमर की बैठक को सोलर पावर सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन पर अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए भारत नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर दे रहा है।
स्टीफन ए श्वार्जमैन : भारत में निवेश बढ़ाने का वादा
06 लाख करोड़ से ज्यादा का बाजार मूल्य
ब्लैकस्टोन के संस्थापक और सीआईओ। दुनिया की दिग्गज निवेश फर्म्स में शामिल ब्लैकस्टोन पेंशन फंड्स, बड़े संस्थानों और व्यक्तियों की ओर से निवेश करती है। कंपनी का भारतीय आईटी कंपनी एंफेसिस में भी निवेश है। वह रिपब्लिकन पार्टी के नजदीकी रहे हैं।
- पीएम से बैठक में भारत में निवेश करने का वादा किया। कंपनी का सालाना राजस्व 610 करोड़ डॉलर है।
तालिबान के निशाने पर मानवाधिकार कार्यकर्ता
बीते दो दशक में अफगानिस्तान में हुए मानवाधिकार विकास को तालिबान खत्म करने पर उतारू है। महिलाओं पर बंदिशें, अभिव्यक्ति पर पाबंदी, नागरिक संगठनों के दमन और लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगाकर तालिबान मानवाधिकारों को कुचल रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल, इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर ह्यूमन राइट्स व वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन अगेंस्ट टॉर्चर ने तालिबान द्वारा घर-घर जाकर मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोगों को शिकार बनाए जाने पर चिंता जाहिर की है।
राजनीतिक विश्लेषक हाकिम कमाल कहते हैं- तालिबान लगातार मानवाधिकारों का उल्लंघन करता रहा तो पश्चिमी देश उसे कभी मान्यता नहीं देंगे। लेकिन, तालिबान यह सब जानते हुए भी वही कर रहा है, जो उसने अतीत में किया था।
तालिबान के सूचना व संस्कृति मंत्रालय के उप-मंत्री ने सोमवार को कहा था कि दुनिया पहले तालिबान को मान्यता दे, उसके बाद इस्लामी अमीरात की सरकार इस्लामी कानूनों के दायरे में मानवाधिकारों के मसले पर विचार करेगी। तालिबान की तरफ से इस तरह के बयान यह जाहिर करने के लिए काफी हैं कि उन्हें मानवाधिकारों की वाकई कोई फिक्र नहीं है। एजेंसी
अत्याचार की आदत पुरानी
दक्षिण एशिया में एमनेस्टी इंटरनेशनल की उप-निदेशक दिनुषिका दिसानायके बताती हैं, जब से तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया है यह बात साफ है मानवाधिकार उनके लिए मायने नहीं रखते। बदले की हिंसा, महिलाओं पर अत्याचार और प्रदर्शन करने वालों का दमन हम पहले ही देख चुके हैं। अब मीडिया, नागरिक संगठन और मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।
महिलाओं को हक नहीं
महिला अधिकार कार्यकर्ता जर्का यफ्ताली कहती हैं, महिलाओं को पढ़ने और काम करने का हक नहीं है। वे राजनीति में शामिल नहीं हो सकतीं इसी से अंदाजा लगा सकते हैं देश किस तरह के मानवीय संकट से गुजर रहा है।
स्विट्जरलैंड से अफगान महिलाओं के लिए लड़ती रहेंगी पूर्व मेयर जरीफा
अफगानिस्तान की गिनी-चुनी महिला नेताओं में से एक व मयदान शाहरी की पूर्व मेयर जरीफा गफारी स्विट्जरलैंड में बस सकती हैं। उनके लिए विशेष अनुमित देने की तैयारी की जा रही है। वे जल्द ही सांसदों से मिलेंगी। 29 वर्षीय गफारी ने तालिबान के खिलाफ ‘इट्स नॉट माई गवर्नमेंट’ अभियान शुरू किया था। वे 2019 से इस वर्ष जून तक मयदान शाहरी की मेयर थीं। गफारी ने रक्षा मंत्रालय में भी काम किया था।
आधी आबादी के बिना नहीं चल सकती सरकार
गफारी कहती हैं, आधी आबादी को उचित प्रतिनिधित्व के बिना कोई सरकार नहीं चल सकती। महिलाएं तालिबान की समर्थक नहीं हैं। गफारी लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील कर रही हैं कि तालिबान से महिलाओं के हक पर बात की जाए। इसके अलावा उन्होंने अफगान महिलाओं के प्रतिनिधि के तौर पर जेनेवा में शांति वार्ता के दौरान तालिबानी नेताओं से बात करने का प्रस्ताव भी रखा।
पाकिस्तान पर दबाव बनाकर तालिबान से हो सकती है बात
गफारी का कहना है कि कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तालिबान को बातचीत के रास्ते पर लाने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहिए। यूएनसीएचआर में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर प्रस्ताव का पाकिस्तान ने समर्थन तो किया, लेकिन, अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग नहीं हुई।