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Nepal: खतरे में प्रधानमंत्री ओली की कुर्सी, नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करेगी संवैधानिक पीठ

Sun, 21 Jul 2024 08:27 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: बशु जैन Updated Sun, 21 Jul 2024 08:27 PM IST
सार

न्यायमूर्ति बाल कृष्ण ढकाल की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान मामले को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ को भेज दिया। उन्होंने कहा कि याचिका में उठाए गए मामले काफी गंभीर और संवैधानिक हैं। इनका समाधान भी संवैधानिक पीठ को करना चाहिए।

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Plea against Oli appointment forwarded to constitutional bench
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने संसद में रविवार को विश्वास मत हासिल कर लिया, लेकिन उनकी कुर्सी खतरे में पड़ गई है। प्रधानमंत्री ओली की नियुक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका अब संवैधानिक पीठ सुनवाई करेगी। रविवार को कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले में गंभीर संवैधानिक व्याख्या की जरूरत है। 

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नेपाल में प्रचंड की सरकार गिरने के बाद पिछले सप्ताह 72 वर्षीय ओली ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद रविवार को उन्होंने संसद में विश्वास मत हासिल किया। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की। न्यायमूर्ति बाल कृष्ण ढकाल की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान मामले को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ को भेज दिया। उन्होंने कहा कि याचिका में उठाए गए मामले काफी गंभीर और संवैधानिक हैं। इनका समाधान भी संवैधानिक पीठ को करना चाहिए। इसलिए इस याचिका को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
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शपथ के बाद दायर की गई याचिका
प्रधानमंत्री ओली के शपथ ग्रहण के कुछ देर बाद ही अधिवक्ता दीपक अधिकारी, खगेंद्र प्रसाद चपागेन और शैलेंद्र गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति के खिलाफ याचिका दायर की थी। याचिका में उनकी नियुक्ति को असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई। याचिका में कहा गया कि नेपाल संविधान के अनुच्छेद 76 (2) के अनुसार सरकार प्रतिनिधि सभा में शक्ति परीक्षण में विफल रहती है तो राष्ट्रपति को अनुच्छेद 76 (3) के तहत नई सरकार के गठन के लिए बुलाना चाहिए। 
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संविधान के अनुच्छेद 76(2) में कहा गया है कि ऐसे मामलों में जहां किसी भी पार्टी के पास सदन में स्पष्ट बहुमत नहीं है, राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के रूप में सदन के उस सदस्य को नियुक्त करेंगे जो दो या दो से अधिक दलों के समर्थन से बहुमत हासिल कर सकता है। इस हिसाब से नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा प्रतिनिधि सभा में सबसे बड़ी पार्टी के संसदीय दल के नेता के रूप में प्रधानमंत्री बनने चाहिए। 

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