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अंग्रेज़ों की जेल संभालती भारत की पिया सिन्हा

Sun, 23 Jul 2017 06:35 PM IST
बीबीसी हिन्दी
बीबीसी हिन्दी Updated Sun, 23 Jul 2017 06:35 PM IST
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Piya Sinha of India handles British prison
पिया सिन्हा
पुरुष कैदियों की जेल चलाना कोई आसान काम नहीं है. यह तब और भी ज़्यादा कठिन हो जाता है जब आप सहज और शांत स्वाभाव के दिखते हों। लेकिन भारतीय मूल की पिया सिन्हा इंग्लैंड में ऐसा कर रही हैं. वह इंग्लैंड के रिसले ज़िला जेल की गर्वनर हैं। उन्हें गर्वनर बने क़रीब एक साल होने वाले हैं।
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पांच फ़ीट तीन इंच लंबी 44 साल की पिया को देखकर अक्सर लोग आश्चर्य में पड़ जाते है। पिया कहती हैं, "अक्सर लोग मुझे देखकर कहते हैं कि आप जैसी दिखती हैं वैसी हैं नहीं। लोग चकित भी होते हैं।" लोगों की ऐसी प्रतिक्रिया को पिया अपमान के तौर पर नहीं लेतीं, बल्कि वह इसे सकारात्मक नज़रिये से देखती हैं।
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क़रीब 20 साल पहले उन्होंने कैदियों की बीच अपने करियर की शुरुआत की थी. उस समय पिया के दोस्त उनके फ़ैसले से काफ़ी डरे हुए थे. उन्हें लगता था कि वह ग़लत दिशा में जा रही हैं। पिया कहती हैं, "यहां का माहौल बिल्कुल अलग है। कभी-कभी क़ैदियों के व्यवहार से परेशान होती हूं, लेकिन मैं इन सभी चीज़ों को आसानी से संभाल लेती हूं।"
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पिया के गर्वनर बनने के कुछ महीने बाद ही एक रिपोर्ट जारी की गई जिसमें कई अव्यवस्थाएं दिखाई गई थीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि यहां के क़ैदी ख़ुद को जेल में सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं। पिया कहती हैं, "रिपोर्ट के लिए जब यह सर्वे किया गया था, मैं उस समय गर्वनर नहीं थी। रिपोर्ट निष्पक्ष था।


यह मेरे लिए एक मौके की तरह था कि मैं बदलाव ला सकूं। इसके लिए मैंने कई नीतियां भी बनाईं।" रिसले कारावास में किसी कैदी की अब ड्रग्स लेने से मौत नहीं होती, जबकि अन्य जेलों में ऐसा हो रहा है। पिया बताती हैं कि जेल के अंदर ड्रग्स का धंधा करने वालों का काफ़ी बोलबाला हुआ करता था। वे बहुत ही शातिर तरीके से क़ैदियों तक ड्रग्स पहुंचाते थे। इसे रोकने के लिए जेल के कर्मचारी लगातार काम रहे हैं।


उन्होंने कहा, "जेल के अंदर ड्रग्स पहुंचाने के लिए ड्रोन तक का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन सुरक्षाकर्मी कई दफ़ा ऐसे ड्रोन पकड़ने में सफल हुए हैं।" वह आगे कहती हैं, "ड्रोन पर नजर रखने के लिए विशेष अधिकारी तैनात किए गए हैं, जो आसमान पर नजर रखते हैं. यह उनका हर दिन का काम होता है।"

Piya Sinha of India handles British prison
रिसले जेल में पुरुष कैदी रहते हैं।
जेल ऐसी जगह है, जहां कभी भी कुछ भी हो सकता है। पिया हर दिन इन चुनौतियों को झेलती हैं। वह कहती हैं कि ड्रग्स के लिए क़ैदी कभी भी हिंसक हो सकते हैं और कर्मियों पर हमला कर सकते हैं। इससे बचने के लिए उन्हें हर पल सतर्क रहना होता है।


जेल में क़ैदियों के व्यवहार भी अजीब होते हैं. वह बताती हैं कि पिछले दिनों एक क़ैदी व्यायाम वाले मैदान में एक पेड़ पर चढ़ गया. गर्मी काफ़ी थी और वह जेल के आहते में वापस नहीं आना चाहता था। उसे बहुत ही प्यार से समझाकर नीचे बुलाया गया. अगर उसे कुछ हो जाता तो यह हमारी ज़िम्मेदारी होती। क़ैदियों के बात करने और उसे समझाने के लिए विशेष तौर पर कुशल कर्मियों को रखा जाता है।


पिया ने अपने करियर की शुरुआत लंदन स्थित एक महिला जेल में एक मनोवैज्ञानिक के रूप में की थी, जो कुछ महीने पहले बंद हो गया। इसके बाद उन्होंने कई पुरुष और महिला जेलों में काम किया। पिया बताती हैं, "जब मैं रिसले जेल आई तो यहां का माहौल बहुत ही अलग था। अव्यवस्थाएं थीं। इसे सुधारने के लिए मुझे काफी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि यहां मर्दों का प्रभाव ज़्यादा था। मैं अपने कर्मियों से सीधे और साफ शब्दों में संवाद करती थी।"


दिनभर जेल के माहौल में काम करते हुए क्या आपको कभी एक क़ैद की तरह महसूस नहीं होता। इस सवाल पर पिया कहती हैं, "हां, अक्सर ऐसा लगता है। जेल में आप मोबाइल फ़ोन भी नहीं ले जा सकते हैं। वहां इंटरनेट तो होता है पर कुछ साइट ही खोल पाते हैं।"
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