{"_id":"609288798ebc3ed1e5565348","slug":"pharmaceutical-industry-is-lobbying-to-ensure-the-biden-administration-decides-not-to-remove-the-patent-of-corona-vaccine","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना वैक्सीन का पेटेंट: कारगर हो रही है दवा कंपनियों की लॉबिंग?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
कोरोना वैक्सीन का पेटेंट: कारगर हो रही है दवा कंपनियों की लॉबिंग?
Wed, 05 May 2021 05:28 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 05 May 2021 05:28 PM IST
सार
डब्ल्यूटीओ के व्यापार संबंधी बौद्धिक संपदा अधिकारों (पेटेंट) के समझौते के तहत सभी देश पेटेंट की रक्षा करने के लिए वचनबद्ध हैं। इस समझौते के कारण दुनियाभर में अमेरिकी और यूरोपीय दवा कंपनियों का वर्चस्व बना रहा है। समझौते के तहत ये कंपनियां जो दवा बनाती हैं, उस फॉर्मूले से कोई दूसरी कंपनी वह दवा नहीं बना सकती...
विज्ञापन
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन
- फोटो : twitter.com/JoeBiden
विस्तार
दवा उद्योग की लॉबिंग कारगर होती दिख रही है। इसका साफ संकेत मंगलवार को मिला, जब अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों ने कोरोना वैक्सीन से पेटेंट हटाने के लिए राष्ट्रपति जो बाइडन को पत्र लिखा। इस पत्र पर सिर्फ 110 सदस्यों ने दस्तखत किए। जिन सदस्यों ने दस्तखत नहीं किए, उनमें 23 वे भी हैं, जो पार्टी के प्रोग्रेसिव कॉकस के सदस्य हैं। ये खबर लगातार चल रही है कि बाइडन प्रशासन पेटेंट हटाने का फैसला ना करे, इसके लिए दवा उद्योग बड़े पैमाने पर पैसा खर्च कर रहा है।
विज्ञापन
ताजा घटनाक्रम पर गौर करें, तो ये साफ हो जाता है कि इस मुद्दे पर डेमोक्रेटिक पार्टी में गहरे मतभेद पैदा हो गए हैं। पार्टी का एक बड़ा खेमा इस मामले में वही दलीलें दे रहा है, जो दवा उद्योग ने दिया है। हाउस के डेमोक्रेटिक सदस्य रॉबिन केली ने एक बयान में कहा कि पेटेंट हटाने से वैक्सीन की मौजूदा कमी खत्म नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पेटेंट हटाने के बावजूद उत्पादन और कच्चे माल संबंधी दिक्कतें बनी रहेंगी। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत अमेरिका को घरेलू उत्पादन बढ़ाने, कोविड-19 के प्रभावी वैक्सीन बनाने में दूसरे देश की मदद, और वैक्सीन उपलब्ध कराने की अंतरराष्ट्रीय पहल- कोवैक्स को अधिक धन मुहैया कराने जैसे कदम उठाने चाहिए।
विज्ञापन
वेबसाइट इंटरसेप्ट ने पिछले हफ्ते खबर दी थी कि पेटेंट के मामले में फैसले को प्रभावित करने के लिए दवा उद्योग ने लॉबिंग की अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वेबसाइट कॉमनड्रीम्स के मुताबिक वॉशिंगटन के सत्ता हलकों में इस लॉबिंग का असर होता दिख रहा है। मंगलवार को हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के सिर्फ 110 सदस्यों ने दस्तखत किए। जबकि सदन में पार्टी के 218 सदस्य हैं। पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रपति बाइडन के पास अवसर है कि वे दुनियाभर में लोगों की जान बचाने में मददगार बनें। इससे वे डोनाल्ड ट्रंप के दौर में दुनिया में खराब हुई अमेरिका की छवि को सुधारने में भी सहायक हो सकते हैं।
विज्ञापन
पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव अभियान के समय जो बाइडन ने दो टूक कहा था कि कोरोना वैक्सीन के मामले में पेटेंट को स्थगित करना ही एकमात्र मानवीय कदम होगा। लेकिन अभी तक उन्होंने ऐसा कदम नहीं उठाया है। पेटेंट को अस्थायी रूप से स्थगित करने की मांग पर भी उनके प्रशासन ने कोई टिप्पणी नहीं की है। हाउस के 110 सदस्यों ने अपने पत्र में कहा- ‘महामारी को जल्द खत्म करने और अमेरिकी एवं दुनिया भर के लोगों की जान बचाने के लिए हम आपसे आग्रह करते हैं कि ट्रंप प्रशासन के फैसले को पलट दें। प्रशासन तुरंत ये घोषणा करे कि विश्व व्यापार संगठन में बौद्धिक संपदा अधिकारों को हटाने की मांग का अमेरिका समर्थन करता है।’
इसके पहले सोशलिस्ट नेता बर्नी सैंडर्स के नेतृत्व में कांग्रेस के उच्च सदन सीनेट के दस डेमोक्रेटिक सदस्यों ने राष्ट्रपति बाइडन को एक पत्र लिख ऐसी ही अपील की थी। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की एक बैठक जिनेवा में बुधवार और गुरुवार को होनी तय है। इसमें अमेरिका क्या रुख लेता है, इस पर दुनिया भर की नजर है। डब्ल्यूटीओ में पेटेंट हटाने का प्रस्ताव सबसे पहले भारत और दक्षिण अफ्रीका ने रखा था। उसके बाद बड़ी संख्या में दूसरे देशों ने इसका समर्थन किया है। दुनि भर के जन संगठन भी इस मांग का समर्थन कर रहे हैं।
डब्ल्यूटीओ के व्यापार संबंधी बौद्धिक संपदा अधिकारों (पेटेंट) के समझौते के तहत सभी देश पेटेंट की रक्षा करने के लिए वचनबद्ध हैं। इस समझौते के कारण दुनियाभर में अमेरिकी और यूरोपीय दवा कंपनियों का वर्चस्व बना रहा है। समझौते के तहत ये कंपनियां जो दवा बनाती हैं, उस फॉर्मूले से कोई दूसरी कंपनी वह दवा नहीं बना सकती। अगर कोरोना वैक्सीन के मामले में पेटेंट हटा दिया जाएगा, तो अभी जितनी भी वैक्सीन बनी हैं, उनका अलग-अलग देशों में उत्पादन करने का रास्ता खुल जाएगा। वैक्सीन की कमी को दूर करने का इसे एकमात्र रास्ता समझा जा रहा है। लेकिन दवा कंपनियां अपने मुनाफे पर समझौता करने को तैयार नहीं हैं।