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अफगानिस्तान: तालिबान से बचाव के लिए लोगों ने बनाए हथियारबंद दस्ते, अमेरिकी फौजों के ऐसे जाने से गहरी नाराजगी

Tue, 22 Jun 2021 07:05 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 22 Jun 2021 07:05 PM IST
सार

अमेरिका अफगानिस्तान से अपनी सेना की वापसी की तैयारियों में जुटा हुआ है। इसी सिलसिले में अगले शुक्रवार को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ ग़नी और अफगानिस्तान के सीईओ डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला से मिलेंगे..

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People formed civilian army to defend against Taliban, residents displeasure over withdrawal of US troops
तालिबान - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, वहां लोगों में सुरक्षा संबंधी आशंकाएं गहराती जा रही हैं। इस बीच खबर है कि कई राज्यों में लोगों ने तालिबान का मुकाबला करने के लिए अपने हथियाबंद दस्ते बना लिए हैं। इन राज्यों में ताखर, बाल्ख, बघलाम, बडगीज और परवान शामिल हैं। इन दस्तों के कमांडरों ने अफगानिस्तान की वेबसाइट तोलोन्यूज.कॉम के संवाददाता से कहा कि वे सुरक्षा बलों के साथ मिल कर लड़ेंगे, ताकि जिन जिलों पर तालिबान का कब्जा हो गया है, उन्हें उससे छीना जा सके। अफगानिस्तान के कई नेताओं ने इन दस्तों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा हालात में यह जरूरी है कि लोग खुद हथियार उठाएं।

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अमेरिका अफगानिस्तान से अपनी सेना की वापसी की तैयारियों में जुटा हुआ है। इसी सिलसिले में अगले शुक्रवार को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ ग़नी और अफगानिस्तान के सीईओ डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला से मिलेंगे। इस मुलाकात को अमेरिका में बहुत अहमियत दी जा रही है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि जो बाइडन अफगान नेताओं को यकीन दिलाने की कोशिश करेंगे कि फौज वापसी के बाद भी अफगानिस्तान के साथ अमेरिका के करीबी रिश्ते बने रहेंगे।
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अफगानिस्तान में ये अंदेशा गहरा हो गया है कि विदेशी फौजों की वापसी के बाद तालिबान पूरे देश पर कब्जा कर लेगा। तखार राज्य में वह दस जिलों पर कब्जा कर चुका है। कुछ जिलों की सीमा तक वह पहुंच चुका है। तोलोन्यूज के मुताबिक ऐसे ही जिलों में लोगों ने हथियारबंद दस्ते बनाए हैं। ऐसे एक दस्ते से जुड़े पूर्व मुजाहिदीन कमांडर नजीबुल्लाह नजीब ने तोलोन्यूज से कहा कि अफगानिस्तान के प्रशासन, सेना और पुलिस का पूरा समर्थन ऐसे दस्तों के साथ है।
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तखार प्रांत के अधिकारियों के मुताबिक कई जिलों के सरकारी दफ्तरों और संस्थानों पर तालिबान ने कब्जा कर लिया है। बाल्ख प्रांत के गवर्नर फरहाद अजिमी ने कहा है कि उनके राज्य में तालिबान ने कुछ जिलों पर कब्जा कर लिया है। उसके बाद से उससे लड़ने के लिए पूर्व मुजाहिदीनों को गोलबंद किया गया है। अजिमी ने कहा कि जो स्थान अभी तालिबान के कब्जे में नहीं हैं, उनकी रक्षा करने के लिए अब हजारों लोग तैयार हैं। ये लोग कब्जे वाले इलाकों को तालिबान से छुड़ाने की कोशिश भी करेंगे। विश्लेषकों ने कहा है कि पिछले दो महीनों में तालिबान ने जिस तेजी से कई जिलों को अपने कब्जे में लिया, वैसा पहले कभी नहीं हुआ था।

इस बीच अफगानिस्तान के राजनेताओं में अमेरिका के प्रति गुस्सा देखने को मिल रहा है। बिना अफगानिस्तान में स्थिरता और सुरक्षा का इंतजाम किए एकतरफ ढंग से अपनी फौज वापस बुलाने के उसके फैसले से यहां गहरी निराशा है। दो रोज पहले पूर्व अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई ने अमेरिका के इस फैसले की कड़ी आलोचना की। जबकि पहले करजई को अमेरिका समर्थक समझा जाता था। उन्होंने कहा कि अमेरिका अफगानिस्तान में स्थिरता कायम करने आया था। लेकिन इसमें वह नाकाम रहा। अब जबकि कट्टरपंथी ताकतें चरम मजबूती पर हैं, तब वह अफगानिस्तान को अकेला छोड़ कर जा रहा है।


पर्यवेक्षकों का कहना कि अफगानिस्तान में अमेरिका विरोधी भावनाएं देखते हुए जो बाइडन के लिए यह भरोसा बंधाना मुश्किल होगा कि फौज वापसी के बाद भी उनका प्रशासन अफगानिस्तान की मदद करता रहेगा। इसलिए यहां राष्ट्रपति गनी और सीईओ अब्दुल्ला अब्दुल्ला के साथ बाइडन की मुलाकात के प्रति कोई उत्साह नहीं देखा जा रहा है।

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