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US: पेंटागन के अधिकारी का दावा- भारत के साथ आधुनिक हथियारों पर काम कर रहा अमेरिका, चीन को बताया खतरा

Fri, 21 Jul 2023 07:36 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 21 Jul 2023 07:36 AM IST
सार

पेंटागन के एक सहायक सचिव एली रेटनर ने बृहस्पतिवार को अमेरिकी संसद में कहा कि चीन के दबाव डालने वाले रवैये का जवाब देना जरूरी है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के सामने अवरोध बनाने के लिए सहयोगियों और साझेदारों के साथ अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। 

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Pentagon official claims America working on modern weapons with India threat to China
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विस्तार

चीन के खतरे को भांपते हुए अमेरिका ने भारत के साथ विस्तारित मारक क्षमता युक्त आर्टिलरी और इंफेंट्री वाहन बनाने के प्रस्ताव पर काम शुरू कर दिया है। यह वाहन चीन से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत की कार्रवाई संबंधी जरूरतें पूरी करने में मदद कर सकेंगे।

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यह दावा पेंटागन के एक सहायक सचिव एली रेटनर ने बृहस्पतिवार को अमेरिकी संसद में चीन पर बनी स्थायी समिति के समक्ष किया। हाल में अमेरिका के चीन से बिगड़े संबंधों पर समिति सुनवाई कर रही है। यहां अपने वक्तव्य की शुरुआती टिप्पणी में हिंद-प्रशांत सुरक्षा मामलात देख रहे रेटनर ने कहा कि चीन के दबाव डालने वाले रवैये का जवाब देना जरूरी है।.रेटनर ने कहा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के सामने अवरोध बनाने के लिए सहयोगियों और साझेदारों के साथ अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। यह बड़े रक्षा हथियारों का विकास व उत्पादन मिलकर करने पर केंद्रित है। पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा में भारत के साथ जेट इंजन उत्पादन, अत्याधुनिक तकनीकों और रक्षा औद्योगिक सहयोग पर भी ठोस वादे किए गए हैं।

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चीन के खिलाफ लामबंद हुए पश्चिमी देश अब शोध में भी सहयोग बंद करेगा जर्मनी
पश्चिमी देशों ने चीन के खिलाफ मोर्चा खोलने का फैसला किया है। चीनी चुनौती से निपटने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बाद अब यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी ने भी उसे तेवर दिखाए हैं। हाल ही में जर्मनी ने एक बयान में एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन को ‘साझेदार, प्रतिस्पर्धी और ढांचागत प्रतिद्वंद्वी’ बताया है। जर्मन सरकार ने बृहस्पतिवार को 64 पन्नों का दस्तावेज जारी करते हुए कहा कि उसका उद्देश्य जर्मन अर्थव्यवस्था की चीन पर निर्भरता खत्म करना है। नई नीति में वह चीन के साथ शोध में भी सहयोग बंद करेगा। बयान के मुताबिक, जर्मन सरकार उन रिसर्च परियोजनाओं में भी साथ नहीं देगी, जिनसे जर्मनी को बौद्धिक खतरा पैदा हो। 

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लंबी दूरी के हथियार खरीद रहा ऑस्ट्रेलिया
चीन से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया अपनी सेना में लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता वाले हथियार खरीद रहा है। उसने ऑकस (ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, यूएस) संधि की घोषणा भी की है। इसके तहत अमेरिका और ब्रिटेन उसकी मदद करेंगे।


एच-1बी : कनाडा में पहले दिन वर्क परमिट योजना का लक्ष्य पूर्ण
अमेरिका में 10,000 एच-1बी वीजा धारकों को देश में आने और काम करने की अनुमति देने के कनाडाई सरकार के फैसले से भारतीय पेशेवरों को काफी लाभ की उम्मीद है। इस योजना को पहले दिन में अपना लक्ष्य पूरा करने के साथ जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। कनाडा ने एच-1बी वीजा धारकों के लिए नया वर्क परमिट 16 जुलाई को आवेदन के लिए खोला। लेकिन बहुत कम समय में ही इसने अपना निर्धारित लक्ष्य पूरा कर लिया। आव्रजन, शरणार्थी और नागरिकता कनाडा (आईआरसीसी) का कहना है कि आवेदक अब इस योजना के लिए आवेदन नहीं कर सकते क्योंकि इसे बंद कर दिया गया है।

भारत, अमेरिका मादक पदार्थ नीति के खाके पर काम करेंगे
भारत और अमेरिका 21वीं सदी के लिए एक व्यापक और गहन द्विपक्षीय मादक पदार्थ नीति का खाका तैयार करने की दिशा में काम करने पर सहमत हुए। राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने दोनों देशों के अधिकारियों के बीच इस संबंध में बातचीत होने के बाद यह जानकारी दी। 

राष्ट्रीय मादक द्रव्य नियंत्रण नीति कार्यालय के निदेशक डॉ. राहुल गुप्ता ने यहां अमेरिका-भारत स्वापक रोधी कार्यसमूह (सीएनडब्ल्यूजी) की चौथी वार्षिक बैठक के समापन के बाद बताया कि पिछले कुछ दिनों में हमने वास्तव में तीन स्तंभों पर काम किया है। 

  • पहला मादक पदार्थों के खिलाफ और अवैध नशीले पदार्थों के तस्करों और उत्पादकों के नेटवर्क को बाधित करना। 
  • दूसरा मादक पदार्थों की मांग और इसके नुकसान को कम करना। इसमें न केवल यह देखना शामिल है कि हम नशे से पीड़ित लोगों की मदद कैसे करते हैं, बल्कि नशे की लत को कैसे रोकते हैं। इस पर भी काम किया जाएगा। 
  • तीसरा स्तंभ से औषधि आपूर्ति श्रृंखला और दवा उद्योग के विकास को सुनिश्चित करना है।
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