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Pentagon: पेंटागन का सात बड़ी टेक कंपनियों से करार, सैन्य रणनीति में बड़े बदलाव की दस्तक; भारत के लिए मौका
Sat, 02 May 2026 05:18 AM IST
Devesh Tripathi
अमर उजाला नेटवर्क, न्यूयॉर्क
अमर उजाला नेटवर्क, न्यूयॉर्क
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 02 May 2026 05:18 AM IST
सार
पेंटागन के अनुसार इन एआई टूल्स का इस्तेमाल कानूनी ऑपरेशनल उपयोग के लिए किया जाएगा। यह पहल अमेरिकी सेना को एआई-फर्स्ट फाइटिंग फोर्स में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसका उद्देश्य युद्ध के सभी डोमेन जमीन, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष और साइबर में तेज और सटीक निर्णय क्षमता हासिल करना है।
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पेंटागन
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
अमेरिकी रक्षा विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस) ने शुक्रवार को सात प्रमुख टेक कंपनियों के साथ एक अहम समझौते की घोषणा की है, जिसके तहत उनके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई टूल्स का उपयोग पेंटागन के क्लासिफाइड नेटवर्क में किया जाएगा। इस हाई-प्रोफाइल करार में एंथ्रोपिक को शामिल नहीं किया गया है, जिसे ट्रंप प्रशासन ने पहले ब्लैकलिस्ट कर दिया था। पेंटागन का यह कदम केवल एक तकनीकी समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक सैन्य रणनीति में बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।
एआई को सीधे युद्ध क्षमता से जोड़ने की यह पहल रूस, चीन और भारत समेत दुनिया की सभी बड़ी सेनाओं को सतर्क करने वाली है। इससे भविष्य के युद्धों में तकनीकी श्रेष्ठता और निर्णय गति निर्णायक कारक बन सकती है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते में एलन मस्क की स्पेसएक्स, चैटजीपीटी बनाने वाली ओपनएआई, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया, अमेजन वेब सर्विसेज और रिफ्लेक्शन जैसी एआई व टेक कंपनियां शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका में पेंटागन-बिग टेक गठजोड़ के बाद रूस, चीन और भारत अपनी-अपनी एआई इकोसिस्टम को तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। चीन में बाइडू, अलीबाबा, टेनसेंट और हुआवेई जैसी कंपनियां पहले से ही उभरती हुई एआई क्षमताओं को रक्षा क्षेत्र से जोड़ रही हैं।
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एआई-फर्स्ट फाइटिंग फोर्स में अहम
पेंटागन के अनुसार इन एआई टूल्स का इस्तेमाल कानूनी ऑपरेशनल उपयोग के लिए किया जाएगा। यह पहल अमेरिकी सेना को एआई-फर्स्ट फाइटिंग फोर्स में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसका उद्देश्य युद्ध के सभी डोमेन जमीन, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष और साइबर में तेज और सटीक निर्णय क्षमता हासिल करना है।
दौड़ से एंथ्रोपिक क्यों बाहर?
हाल तक एंथ्रोपिक का क्लॉड मॉडल पेंटागन के क्लासिफाइड नेटवर्क में उपलब्ध एकमात्र एआई सिस्टम था। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कंपनी से संबंध तोड़ने का फैसला किया, क्योंकि एंथ्रोपिक ने अपने एआई को सभी कानूनी उद्देश्यों, जिसमें स्वायत्त हथियार और व्यापक निगरानी शामिल हैं,के लिए इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
टाटा, रिलायंस जियो, इंफोसिस जैसी कंपनियों के पास होगा मौका
रूस में यांडेक्स, स्बेर (स्बेरबैंक का टेक विंग) और रोस्टेक से जुड़े प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा मिल सकता है, खासकर स्वायत्त सिस्टम और साइबर क्षमताओं में। भारत के संदर्भ में टाटा ग्रुप, रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स, इंफोसिस, एचसीएलटेक, टेक महिंद्रा और तेजी से उभरते डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए रक्षा एआई में नए अवसर खुल सकते हैं, जहां सरकारी पहलें जैसे रक्षा नवाचार संगठन (आईडेक्स) और डीआरडीओ के साथ साझेदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रतिस्पर्धा आने वाले वर्षों में वैश्विक एआई सैन्य संतुलन को बहुध्रुवीय बना सकती है।
अन्य वीडियो
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एआई को सीधे युद्ध क्षमता से जोड़ने की यह पहल रूस, चीन और भारत समेत दुनिया की सभी बड़ी सेनाओं को सतर्क करने वाली है। इससे भविष्य के युद्धों में तकनीकी श्रेष्ठता और निर्णय गति निर्णायक कारक बन सकती है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते में एलन मस्क की स्पेसएक्स, चैटजीपीटी बनाने वाली ओपनएआई, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया, अमेजन वेब सर्विसेज और रिफ्लेक्शन जैसी एआई व टेक कंपनियां शामिल हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका में पेंटागन-बिग टेक गठजोड़ के बाद रूस, चीन और भारत अपनी-अपनी एआई इकोसिस्टम को तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। चीन में बाइडू, अलीबाबा, टेनसेंट और हुआवेई जैसी कंपनियां पहले से ही उभरती हुई एआई क्षमताओं को रक्षा क्षेत्र से जोड़ रही हैं।
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एआई-फर्स्ट फाइटिंग फोर्स में अहम
पेंटागन के अनुसार इन एआई टूल्स का इस्तेमाल कानूनी ऑपरेशनल उपयोग के लिए किया जाएगा। यह पहल अमेरिकी सेना को एआई-फर्स्ट फाइटिंग फोर्स में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसका उद्देश्य युद्ध के सभी डोमेन जमीन, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष और साइबर में तेज और सटीक निर्णय क्षमता हासिल करना है।
दौड़ से एंथ्रोपिक क्यों बाहर?
हाल तक एंथ्रोपिक का क्लॉड मॉडल पेंटागन के क्लासिफाइड नेटवर्क में उपलब्ध एकमात्र एआई सिस्टम था। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कंपनी से संबंध तोड़ने का फैसला किया, क्योंकि एंथ्रोपिक ने अपने एआई को सभी कानूनी उद्देश्यों, जिसमें स्वायत्त हथियार और व्यापक निगरानी शामिल हैं,के लिए इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
टाटा, रिलायंस जियो, इंफोसिस जैसी कंपनियों के पास होगा मौका
रूस में यांडेक्स, स्बेर (स्बेरबैंक का टेक विंग) और रोस्टेक से जुड़े प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा मिल सकता है, खासकर स्वायत्त सिस्टम और साइबर क्षमताओं में। भारत के संदर्भ में टाटा ग्रुप, रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स, इंफोसिस, एचसीएलटेक, टेक महिंद्रा और तेजी से उभरते डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए रक्षा एआई में नए अवसर खुल सकते हैं, जहां सरकारी पहलें जैसे रक्षा नवाचार संगठन (आईडेक्स) और डीआरडीओ के साथ साझेदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रतिस्पर्धा आने वाले वर्षों में वैश्विक एआई सैन्य संतुलन को बहुध्रुवीय बना सकती है।
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