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प्रधानमंत्री इमरान खान का आरोप- विपक्षी नेता सरकार और सेना में दरार डालने की रच रहे हैं साजिश

Sun, 27 Sep 2020 01:12 AM IST
Jeet Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 27 Sep 2020 01:12 AM IST
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pakistani pm Imran Khan says that opposition leaders are trying to create rift between the government and the army
इमरान खान - फोटो : एएनआई

पाकिस्तान में विपक्ष द्वारा गठबंधन बनाने के बाद से सेना और सियासत के बीच गठजोड़ को लेकर विवाद चल रहा है। इस संबंध में सेना प्रमुख जनरल बाजवा द्वारा विपक्षी नेताओं को स्पष्ट कर दिया गया है कि सेना को राजनीति में न घसीटें लेकिन विपक्षी हमलों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि प्रतिपक्षी नेता सरकार और सेना में दरार डालने की साजिश रच रहे हैं।

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इमरान खान ने विपक्षी नेताओं के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा, मैं बहुत अच्छे से जानता हूं कि कुछ नेता सैन्य अफसरों से मिलते रहे हैं। प्राइवेट न्यूज चैनलों के निदेशकों से मुलाकात के दौरान पाक पीएम ने कहा कि उन्हें इस विपक्ष से खतरा महसूस नहीं होता।
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इमरान ने माना कि पिछले दिनों आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा और आईएसआई निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद विपक्ष के नेताओं से मिले थे, और उन्हें इस मीटिंग के बारे में जानकारी मिल गई थी। लेकिन उनका रवैया विपक्षी गठबंधन द्वारा सेना और सियासत पर सवाल उठाने को लेकर काफी बौखलाया हुआ रहा। 
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सेना प्रवक्ता के आरोप पर रेलमंत्री खुश
पाकिस्तान के रेलमंत्री शेख राशिद को पिछले दिनों कुछ विपक्षी नेताओं ने सेना का प्रवक्ता कहा था। इस पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा, मुझे गर्व होता है जब कोई कहता है कि मैं सेना का प्रवक्ता हूं। उन्होंने तंज भी किया कि मैं कम से कम पड़ोसी मुल्क का एजेंट तो नहीं हूं। उन्होंने कहा, यदि मोबाइल डाटा साझा कर दूं तो हंगामा मच सकता है।

पाक कैबिनेट के एजेंडे में नहीं पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा
पाकिस्तान पीएम का मंत्रिमंडल देश में पत्रकारों और मीडिया पर घातक हमलों के मुद्दे पर अपनी प्रथम 62 बैठकों में से किसी में भी चर्चा करने में नाकाम रहा है।


मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ये बैठकें एक सितंबर 2018 से 30 जनवरी 2020 के बीच हुई थी। मीडिया निगरानी संस्था ने कहा कि इस दौरान सात पत्रकारों और एक ब्लॉगर की हत्या हुई, छह मीडिया कर्मियों का अपहरण हुआ। लेकिन किसी भी बैठक में पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा नहीं उठा।

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