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...तो इसलिए बेहाल हैं मुस्लिम देश!

Sun, 31 Aug 2014 08:52 PM IST
अशोक कुमार/बीबीसी संवाददाता
अशोक कुमार/बीबीसी संवाददाता Updated Sun, 31 Aug 2014 08:52 PM IST
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news analysis of islamic countries.

पाकिस्तानी मीडिया में दो मुद्दे लगातार छाए हैं। एक तो पाकिस्तान का सियासी संकट और दूसरा भारत से बातचीत टूटना। औसाफ ने पाकिस्तान में जारी संकट में बतौर मध्यस्थ सेना प्रमुख की भूमिका को देश के हित में बताया है।

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अखबार कहता है कि जब इमरान खान और ताहिरुल कादरी सेना प्रमुख से मिल रहे थे तो कहीं नए चुनावों की अटकलें लगाई जा रही थीं तो कोई नई सरकार बनाए जाने के कयास लगा रहा था। लेकिन इनका सच से कोई वास्ता नहीं निकला।
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अखबार के मुताबिक जब राजनेता संकट को हल करने में नाकाम हो गए तो सेना को आगे आना पड़ा है।

पेशावर से छपने वाले रोजनामा मशरिक का कहना है कि संकट को सुलझाने के लिए फ़ौज का दरवाजा खटखटाने से साफ़ है कि राजनेताओं को एक दूसरे पर तो भरोसा है ही नहीं बल्कि लोकतंत्र पर भी उनका विश्वास कम ही लगता है।

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मुश्किलों में मुस्लिम देश

news analysis of islamic countries.

दैनिक जंग ने इस हवाले से बड़ी तस्वीरें पेश करने की कोशिश की है। अखबार लिखता है कि दुनिया के ज्यादातर देश चुनाव और व्यवस्था से जुड़ी खामियों के बावजूद तरक्‍की की राह पर बढ़ रहे हैं, जबकि सभी संसाधनों से संपन्न होने के बावजूद मुस्लिम देश मुश्किलों में घिरे हैं।

अखबार की राय है कि मुस्लिम देशों में राजनेता अपने सियासी लक्ष्यों और इरादों को हासिल करने के लिए अफरा-तफरी और हलचल पैदा करने वाले रास्तों को चुनते हैं, जिससे देश मुश्किल में घिरते हैं।

आजकल का इसी विषय पर कार्टून है जिसमें नवाज शरीफ और उनके साथी नदी में डूब रहे हैं जबकि परवेज मुशर्रफ एक ऊंचे से टीले पर बैठ कर मुस्करा रहे हैं।

रोज़नामा दुनिया ने लिखा है कि कश्मीरी नेताओं से पाकिस्तानी उच्चायुक्त की मुलाकातों पर भारत ने तूफान खड़ा कर दिया।

अखबार की राय है कि कश्मीर मसले में मुख्य पक्ष तो कश्मीरी हैं। ऐसे में अगर पाकिस्तान को कश्मीरियों के रुख की जानकारी नहीं होगी तो वे इस मुद्दे पर बातचीत कैसे करेगा।

कुछ ऐसी ही बातें जंग में छपे मलीहा लोधी के लेख में कही गई हैं जिसका शीर्षक है, "भारत की कलाबाजियां कोई नई बात नहीं।"

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