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पाक अधिकृत कश्मीर के कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान के खिलाफ की रैली, कहा- बंद हो अवैध निर्माण

Sun, 18 Nov 2018 10:03 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 18 Nov 2018 10:03 AM IST
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Activists from various parts of PoK have gathered in Bagh district against Pakistan government
पीओके में एकत्रित हुए प्रदर्शनकारी

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से आए कार्यकर्ता बाग जिले में इकट्ठा हुए। जहां उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ एक विरोध रैली निकालते हुए अवैध और सशक्त व्यवसाय को खत्म करने की मांग की। यह प्रदर्शन यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के दो दिवसीय सम्मेलन के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था।

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कार्यकर्ताओं ने बांध और दूसरी परियोजनाओं को लेकर चिंता जाहिर की। जिसमें उनका दावा है कि स्वदेशी लोगों को अलग रखा जा रहा है। यूकेपीएनपी के पूर्व विदेशी मामलों के केंद्रीय सचिव जमील मकसूद ने कहा, 'वह (प्रदर्शनकारी) पाकिस्तान की सरकार से मांग कर रहे हैं कि वह गिलगित बलिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के दूसरे इलाकों में हो रहे दियामेर-भाषा बांध निर्माण कार्य को रोक दें।'
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मकसूद ने कहा, 'पार्टी के नेतृत्व में भी पाकिस्तान सरकार के रावलकोट, कोटली, बाग, नीलम, मुजफ्फराबाद और दूसरे क्षेत्रों में हो रहे राज्य विषय नियमों का उल्लंघन करके यहां कि जमीन को अपने सेवानिवृत्त जवानों, नौकरशाहों और व्यवसायियों को दे रहे हैं। इस मसले पर उन्होंने चिंता जाहिर की।' यूकेपीएनपी के निर्वासित अध्यक्ष सरदार शौकत अली कश्मीरी ने कार्यकर्ताओं को बाग में टेलिफोन के जरिए संबोधित किया।
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अली ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि वह से पाकिस्तान से आग्राह करें कि वह उनके क्षेत्र को खाली करके वहां स्थानीय प्रधिकरण को स्थापित करे और स्वदेशी लोगों के मौलिक अधिकारों को पुनर्जीवित करे। मकसूद ने कहा, 'कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान से मांग की है कि वह उनके जेल में बंद कार्यकर्ताओं को रिहा कर दे। जिसमें बाबा जान भी शामिल हैं। उन्हें गिलगित बलिस्तान और मुजफ्फराबाद में शांतिपूर्ण तरीके से स्थानीय विकास और स्थानीय लोगों को सशक्त करने की मांग उठाने के कारण जेल में बंद किया गया है।'

विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बांध और अन्य परियोजनाओं के निर्माण के कारण पीओके और गिलगित बलिस्तान में गंभीर पर्यावरणीय चिंताओं को लेकर अपनी आवाज उठाई। नीलम-झेलम जिसे कि जम्मू और कश्मीर में किशन गंगा के नाम से जाना जाता है, इस नदी को मोड़ने के कारण गंभीर पर्यवरणीय प्रभाव पड़ा है जिसका खामियाजा मुजफ्फराबाद के लोगों को उठाना पड़ रहा है। पाकिस्तान ऐसे बांध बना रहा है जिसका फायदा स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है। 



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