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बांग्लादेश को लुभाने में क्यों जुट गया है पाकिस्तान? क्या 1971 के नरसंहार के लिए मांगेगा माफी
Sat, 09 Jan 2021 03:28 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 09 Jan 2021 03:28 PM IST
सार
2016 में जब बांग्लादेश ने अपने स्वतंत्रता संग्राम के दिनों की घटनाओं को लेकर आरोपियों पर मानवता के खिलाफ अपराध का मुकदमा चलाने का फैसला किया, तो दोनों देशों के रिश्ते और बिगड़ गए...
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Bangladesh State Minister for Foreign Affairs Shahriar Alam, right, speaks with Pakistan High Commissioner in Dhaka Imran Ahmed Siddiqui
- फोटो : Bangladesh Ministry of Foreign Affairs
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विस्तार
पाकिस्तान ने बांग्लादेश के नागरिकों पर लगे वीजा संबंधी प्रतिबंधों को हटा लिया है। ढाका स्थित पाकिस्तानी उच्चायुक्त इमरान अहमद सिद्दिकी ने यहां जारी एक बयान में ये घोषणा की। इसके पहले बांग्लादेश के विदेश राज्यमंत्री शहरयार आलम से उनकी बातचीत हुई। इमरान अहमद सिद्दिकी ने अपने बयान में कहा कि दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संपर्कों को गहरा बनाने का फैसला किया है।
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बाद में एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में सिद्दिकी ने उम्मीद जताई कि अब बांग्लादेश भी पाकिस्तानी नागरिकों के मामले में ऐसा ही कदम उठाएगा। बांग्लादेश की तरफ से अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं आया है।
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यहां के विश्लेषकों ने पाकिस्तान के ताजा फैसले को बहुत अहमियत दी है। इसे दोनों देशों के बीच ठंडे रिश्ते में गरमाहट लाने की कोशिश के रूप में देखा गया है। बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्ते कभी बहुत अच्छे नहीं रहे। बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई के दौरान पाकिस्तान फौज की तरफ से ढाए गए जुल्मों के जख्म से बांग्लादेश आज तक नहीं उबरा है।
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2016 में जब बांग्लादेश ने अपने स्वतंत्रता संग्राम के दिनों की घटनाओं को लेकर आरोपियों पर मानवता के खिलाफ अपराध का मुकदमा चलाने का फैसला किया, तो दोनों देशों के रिश्ते और बिगड़ गए। इसके पहले 2009 में बांग्लादेश ने इसी मुकदमे के मकसद से “अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल” का गठन किया था।
इस बीच बांग्लादेश के चीन से संबंध गहरे हुए हैं। उधर नदी जल बंटवारे और भारत के नागरिकता संशोधन कानून एवं असम में लागू हुए नेशनल सिटिजंस रजिस्टर (एनआरसी) के मुद्दों पर भारत के साथ बांग्लादेश क संबंधों में पेचीदगियां खड़ी हुई हैं। विश्लेषकों के मुताबिक पाकिस्तान के साथ उसके रिश्तों में सुधार के मिल रहे संकेतों के बीच इन सभी घटनाक्रमों की भूमिका है।
खबरों के मुताबिक पाकिस्तान उच्चायुक्त से बातचीत में बांग्लादेश के विदेश उप मंत्री ने कहा कि उनका देश सभी देशों से दोस्ती और किसी के प्रति दुर्भावना ना रखने की नीति अपनाएगा। उन्होंने पाकिस्तान को पूरा सहयोग देने का वादा किया। हाल में पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमीन से भी मुलाकात की है।
बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक विदेश उप मंत्री आलम ने पाकिस्तान के साथ संबंध मजबूत करने की इच्छा जताई। उन्होंने पाकिस्तान से अपील की कि वह दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार समझौते (साफ्टा) के प्रावधानों का उपयोग करते हुए बांग्लादेश में बनी चीजों को अपने यहां अधिक बाजार मुहैया कराए। गौरतलब है कि अभी दोनों देशों के व्यापार में पाकिस्तान फायदे की स्थिति में है।
आलम ने पाकिस्तान से यह अनुरोध भी किया कि वह 1971 के बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए नरसंहार के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगे। पाकिस्तान अब तक इसके लिए तैयार नहीं है। यह मुद्दा दोनों देशों के बीच रिश्ते में एक बड़ा पेंच है।
यहां जानकारों का कहना है कि जब तक ये मुद्दा कायम है, दोनों देशों के रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते। इसके बावजूद पाकिस्तान अब संबंध सुधारने को काफी महत्व दे रहा है। इसके पीछे चीन की भूमिका भी देखी जा रही है। चीन की दिलचस्पी दक्षिण एशिया के देशों को अधिक से अधिक अपने पाले में लाने की है, ताकि वह भारत की घेराबंदी कर सके।