Pakistan: तालिबान से परेशान पाकिस्तान और ईरान अब मिल कर करेंगे ‘दहशतगर्दी’ का मुकाबला
बीते हफ्ते पाकिस्तान के प्रांत बलूचिस्तान में एक ही दिन में हुए दो घातक आतंकवादी हमलों में पाकिस्तान के 12 सैनिक मारे गए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस वर्ष किसी एक दिन इतनी संख्या में सैनिकों की जान नहीं गई थी। इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान में अफगानिस्तान के खिलाफ गुस्सा उबल पड़ा है...
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अफगानिस्तान से बढ़ते जा रहे तनाव के बीच पाकिस्तान ने ईरान का हाथ थामा है। अफगानिस्तान से आतंकवाद की बढ़ रही चुनौतियों के बीच अब इन दोनों देशों ने मिलकर इस ‘साझा खतरे’ का मुकाबला करने का इरादा जताया है। यह बात पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल असीम मुनीर की दो दिन की तेहरान यात्रा के आखिरी दिन रविवार को जारी साझा बयान में कही गई। बयान में कहा गया है कि दोनों देश सीमा सुरक्षा के नए तरीकों को ढूंढने का प्रयास करेंगे, ताकि आतंकवाद का मुकाबला वे कर सकें।
बीते हफ्ते पाकिस्तान के प्रांत बलूचिस्तान में एक ही दिन में हुए दो घातक आतंकवादी हमलों में पाकिस्तान के 12 सैनिक मारे गए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस वर्ष किसी एक दिन इतनी संख्या में सैनिकों की जान नहीं गई थी। इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान में अफगानिस्तान के खिलाफ गुस्सा उबल पड़ा है। यह खुलकर आरोप लगाए गए हैं कि आतंकवादियों को अफगानिस्तान में शासन कर रहे तालिबान के संरक्षण के कारण पाकिस्तान में ऐसे हमले हो रहे हैं। पाकिस्तान को निशाना बना रहे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के अड्डे अफगानिस्तान में ही है, जहां से वह हमलों को अंजाम दे रहा है।
टीटीपी की गतिविधियों को लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पहले भी तनाव पैदा हो चुका है। अब पाकिस्तान सरकार के सूत्रों ने खुल कर आरोप लगाया है कि काबुल पर काबिज तालिबान ने सिर्फ एक आतंकवादी गुट आईएस-खुरसान को छोड़ कर बाकी तमाम ऐसे गुटों को संरक्षण दे रखा है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इस बार पाकिस्तान ने तालिबान के खिलाफ जितनी कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया है, वैसा पहले देखने को नहीं मिला था।
बीते शुक्रवार को पाकिस्तान सेना के जन संपर्क कार्यालय ने एक बयान में कहा- टीटीपी को अफगानिस्तान में सुरक्षित पनाह और अपनी गतिविधियां चलाने की आजादी मिली हुई है, जिसकी हम निंदा करते हैं। शनिवार को रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तालिबान पर ‘अपने पड़ोसी और दोस्त देशों के प्रति अपने कर्त्तव्य की अनदेखी’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान दोहा शांति समझौते में किए अपने वादे का खुलकर उल्लंघन कर रहा है। ख्वाजा ने कहा- ‘इस स्थिति को ज्यादा लंबे समय तक नहीं चलने दिया जा सकता।’
पाकिस्तान ने अभी तक इस बारे में अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है कि क्या वह सीमा पार कर टीटीपी के अड्डों पर हमला करेगा। लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक पाकिस्तान का सब्र जवाब दे रहा है, इसका संकेत देने में पाकिस्तान की सेना और सरकार ने अब कोई कसर नहीं छोड़ी है। पाकिस्तान के अखबारों में छपी टिप्पणियों में आरोप लगाया गया है कि टीटीपी काबुल सरकार का सबसे करीबी सहयोगी बना हुआ है। एक तरह से वह काबुल से चल रही सरकार का ही हिस्सा बना हुआ है। इस तरह पाकिस्तान पर हो रहे आतंकवादी हमलों का आरोप अब परोक्ष रूप से तालिबान सरकार पर मढ़ा जाने लगा है।
जनरल मुनीर की ईरान यात्रा के दौरान जारी साझा बयान को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। ईरान भी अफगानिस्तान में आतंकवादी संगठनों के चल रहे अड्डों से परेशान रहा है।