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Hindi News ›   World ›   Pakistan: shahbaz Sharif and Nawaz Sharif agreed to replace General Qamar Javed Bajwa

Pakistan: पाकिस्तान में नए सेनाध्यक्ष की नियुक्ति पर सियासत का जैसे कोई अंत नहीं

Mon, 14 Nov 2022 03:50 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 14 Nov 2022 03:50 PM IST
सार

Pakistan: इमरान खान ने कहा है कि शरीफ, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सह-अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी और इन दोनों के परिजन ‘चोर’ हैं, जिन्हें सेनाध्यक्ष जैसे अहम पद पर नियुक्ति करने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए...

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Pakistan: shahbaz Sharif and Nawaz Sharif agreed to replace General Qamar Javed Bajwa
Pakistan: इमरान खान और कमर जावेद बाजवा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान में नए सेनाध्यक्ष की नियुक्ति के सवाल पर सियासत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। ऐसी खबर आ चुकी है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) के सुप्रीमो नवाज शरीफ के बीच जनरल कमर जावेद बाजवा की जगह पर उनके बाद के सबसे वरिष्ठ अधिकारी को सेनाध्यक्ष नियुक्त करने पर सहमति बन गई है। लेकिन इससे पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान संतुष्ट नहीं हैं। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने मांग रख दी है कि नियुक्ति से पहले उससे राय-मशविरा किया जाए।

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सत्ताधारी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक एलायंस (पीडीएम) के सूत्रों ने आरोप लगाया है कि इमरान खान ने सेनाध्यक्ष नियुक्ति के सवाल को सियासी रंग दे दिया है। उनका इल्जाम है कि खान ने इस बारे में अपना रुख बार-बार बदला है। अपनी पार्टी के रुख के बारे में उन्होंने जानबूझ कर भ्रम बनाए रखा है, इस मुद्दे से अधिकतम राजनीतिक लाभ वे हासिल कर सकें।

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राजनीतिक विश्लेषक इस बात से सहमत हैं कि सेनाध्यक्ष की नियुक्ति के सवाल पर इमरान खान ने कोई ठोस मांग सामने नहीं रखी है। कभी उन्होंने मेरिट के आधार पर नियुक्ति की मांग की है, तो कभी कहा है कि शहबाज शरीफ ये महत्त्वपूर्ण नियुक्ति करने के लायक नहीं हैं। कुछ जानकारों के मुताबिक खान इस बात इस मामले में दबाव बनाए रखना चाहते हैं, ताकि ये नियुक्ति बिना सहमति के ना हो। लेकिन साथ ही वे लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जिससे सरकार के लिए उनसे बातचीत करना कठिन बना हुआ है।

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इमरान खान ने कहा है कि शरीफ, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सह-अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी और इन दोनों के परिजन ‘चोर’ हैं, जिन्हें सेनाध्यक्ष जैसे अहम पद पर नियुक्ति करने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए। पीपीपी भी सत्ताधारी गठबंधन में शामिल है। कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि शरीफ और जरदारी अपने पसंद का सेनाध्यक्ष बनाना चाहते हैं, क्योंकि अगर कोई ‘देशभक्त’ व्यक्ति इस पद पर आया, तो वह उनकी लूट पर सवाल उठाएगा।

इमरान खान के इस बयान से सत्ताधारी गठबंधन के साथ-साथ सेना भी गुस्सा देखा गया था। इसका यह मतलब माना गया था कि इमरान की निगाह में सेना में गैर देशभक्त अफसर भी हैं। इस गुस्से का अंदाजा लगने पर पीटीआई अध्यक्ष ने अपना रुख उस समय नरम कर लिया था। तब उन्होंने कहा था कि सरकार को यह नियुक्ति करने का अधिकार है। लेकिन कुछ समय बाद ही उनकी जुबान फिर तीखी हो गई।

राजनीतिक विश्लेषक जैगम खान के मुताबिक ऐसा लगता है कि इमरान खान सभी वरिष्ठ सेना अधिकारियों को नापसंद करने लगे हैं। उन्होंने अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बातचीत में कहा कि इमरान उस समय को वापस लाना चाहते हैं, जब सेना उनके पक्ष में थी। लेकिन अब समय बदल गया है। जैगम खान ने कहा- नए हालात में ऐसा लगता है कि इमरान खान अब अपनी लोकप्रियता को अपनी ताकत बना कर इस मामले में ऊंचा दांव खेल रहे हैं।

थिंक टैकं पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ लेजिस्लेटिव डेवलपमेंट एंड ट्रांसपैरेंसी के अध्यक्ष अहम बिलाल महबूब ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बातचीत में कहा- ‘अगर प्रधानमंत्री नियम के हिसाब से चलते हैं और उनका फैसला संदेह से परे रहता है, तो सरकार को किसी की चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। यह प्रधानमंत्री का संवैधानिक अधिकार है और उन्हें यह कदम बिना ये धारणा बनाए उठाना चाहिए कि वे किसी और से निर्देश ले रहे हैं।’

लेकिन दूसरे विश्लेषकों के मुताबिक शहबाज शरीफ ने इस मामले में लंदन में बैठे अपने भाई से राय-मशविरा कर पहले ही ये धारणा बना दी है कि फैसले नवाज शरीफ ले रहे हैं।

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