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अलगाववादी नेता गिलानी को मिलेगा पाक का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'निशान-ए-पाकिस्तान'

Tue, 28 Jul 2020 05:13 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 28 Jul 2020 05:13 PM IST
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Pakistan Senate passed resolution to Nishan-e-Pakistan for Syed Ali Shah Geelani
सैयद अली शाह गिलानी - फोटो : फाइल

पाकिस्तान ने कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'निशान-ए-पाकिस्तान' से सम्मानित करने का फैसला किया है। इसे लेकर पाकिस्तानी सीनेट में प्रस्ताव स्वीकार हो गया है। सीनेट ने सरकार से यह भी कहा है कि इस्लामाबाद में प्रस्तावित एक विश्वविद्यालय का नाम भी गिलानी के नाम पर रखा जाए। प्रस्ताव में यह भी मांग की गई कि गिलानी की जीवनगाथा को राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। 

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पाक सीनेट यानी संसद के उच्च सदन ने सोमवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। सीनेट ने भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के खत्म किए जाने की पहली सालगिरह पर पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बनी अपनी कथित विधानसभा में पांच अगस्त को विशेष सत्र बुलाने को भी अनुमति दी है। बता दें कि 90 वर्षीय सैयद अली शाह गिलानी ने करीब एक महीना पहले ही ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस में अपने 'आजीवन चेयरमैन' के पद से इस्तीफा दिया था। 

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इस सम्मान के पीछे पाक का मकसद क्या है?

गिलानी को यह सम्मान जम्मू-कश्मीर में वहां के लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए दिया जा रहा है। पाक सीनेट ने प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में रहते हुए भारतीय सेना और सरकारों के खिलाफ आवाज उठाई और जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की आवाज बने। वहीं, कहा यह भी जा रहा है पाक सरकार और आईएसआई लंबे समय से गिलानी को किनारे लगाना चाहती थी और यह फैसला उनके इस्तीफे के बाद स्थितियां सुधारने के लिए कदम भर है। 

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पाक के इस फैसले का भाजपा ने किया विरोध

गिलानी को निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित करने के इस फैसले पर जम्मू-कश्मीर भाजपा ने विरोध प्रकट किया है। जम्मू-कश्मीर भाजपा के अध्यक्ष रविंदर रैना ने इसे लेकर रहा कि हु्र्रियत और पाकिस्तान में कोई अंतर नहीं है। दोनों एक ही हैं। यहां हुर्रियत के नेता पाकिस्तान के इशारों पर ही चलते हैं और कार्रवाइयों को अंजाम देते हैं, जिसका अंजाम जम्मू-कश्मीर के निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ता है और उनकी जान जाती है।

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