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Pakistan: निधन के नौ महीने बाद मुशर्रफ की याचिका पर कोर्ट में सुनवाई; देशद्रोह के मामले में सुनाई गई थी सजा

Mon, 06 Nov 2023 05:55 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 06 Nov 2023 05:55 PM IST
सार

Pakistan: पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) काजी फैज ईसा, न्यायमूर्ति सैयद मंसूर अली शाह, न्यायमूर्ति अमीनुद्दीन खान और न्यायमूर्ति अतहर मिनाल्लाह की चार सदस्यीय पीठ विशेष अदालत द्वारा मुशर्रफ को सुनाई गई मौत की सजा को पलटने की मांग वाली अपीलों पर सुनवाई करेगी। 

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Pakistan's apex court to take up deceased dictator Musharraf's plea against death penalty
परवेज मुशर्रफ - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान की शीर्ष अदालत पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की ओर से दायर उन अपीलों पर शुक्रवार को सुनवाई शुरू करेगी, जिसमें देशद्रोह के एक मामले में विशेष अदालत द्वारा उन्हें सुनाई गई मौत की सजा को पलटने की मांग की गई थी। मुशर्रफ को 2019 में विशेष अदालत ने उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सजा सुनाई थी, जिसने उन्हें तीन नवंबर, 2007 को संविधान को स्थगित रखकर आपातकाल लगाने के लिए राजद्रोह का दोषी पाया था।

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इस फैसले ने देश की सेना को नाराज कर दिया था। यह पहली बार था जब पाकिस्तान में किसी पूर्व शीर्ष सैन्य अधिकारी को देशद्रोह के लिए इस तरह की सजा का सामना करना पड़ा था। बाद में लाहौर उच्च न्यायालय ने मौत की सजा को रद्द कर दिया था। सेना ने 75 वर्षों से अधिक समय तक की अवधि के लिए पाकिस्तान में शासन किया है। 

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मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) काजी फैज ईसा, न्यायमूर्ति सैयद मंसूर अली शाह, न्यायमूर्ति अमीनुद्दीन खान और न्यायमूर्ति अतहर मिनाल्लाह की चार सदस्यीय पीठ विशेष अदालत द्वारा मुशर्रफ को सुनाई गई मौत की सजा को पलटने की मांग वाली अपीलों पर सुनवाई करेगी। मुशर्रफ ने अपने वकील सलमान सफदर के जरिए दोषसिद्धि को रद्द करने के लिए अपील दायर की थी क्योंकि मुकदमा संविधान के साथ-साथ आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) 1898  के उल्लंघन के लिए चलाया गया था और पूरा किया गया था।

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स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अपील में कहा गया है कि पूर्व राष्ट्रपति पर पूरी तरह असंवैधानिक तरीके से संवैधानिक अपराध का मुकदमा चलाया गया। याचिका में कहा गया है कि मुशर्रफ पाकिस्तानी सेना के पूर्व चार सितारा जनरल हैं और उनका करियर उल्लेखनीय रूप से प्रतिष्ठित रहा है। एक अन्य घटनाक्रम में सिंध उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने विशेष अदालत के फैसले को असंवैधानिक घोषित करने के लाहौर उच्च न्यायालय के जनवरी 2020 के फैसले को भी चुनौती दी थी और उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करने की मांग की थी। 

याचिका में शीर्ष अदालत से संविधान को नष्ट करने के लिए विशेष अदालत द्वारा दी गई सजा को बहाल करने का भी अनुरोध किया गया था।  वकील रशीद ए. रजवी द्वारा दायर अपील में कहा गया था कि उच्च न्यायालय का फैसला पूरी तरह से अवैधता, तथ्यों की गलत समझ, कानून की अनदेखी से ग्रस्त है और इसलिए शीर्ष अदालत इसे निरस्त कर सकती है।

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