Pakistan Politics: विपक्ष से वार्ता की पेशकश, क्या है शहबाज का अचानक नजरिया बदलने का राज?
इस बीच देश में पीटीआई के इस्लामाबाद तक प्रस्तावित ‘हकीकी आजादी मार्च’ को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। ये चिंता सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है। पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने गुरुवार को विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के लिए चेतावनी जारी की।
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अब तक पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को गद्दार कहते रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अब अचानक उनसे बातचीत की पेशकश कर दी है। यहां सियासी हलकों में उनके नजरिए में आए इस बदलाव के कारणों पर कयास लगाए जा रहे हैं। सत्ताधारी गठबंधन के समर्थकों की कहना है कि प्रधानमंत्री ने देश में बढ़ रही सियासी गरमाहट पर विराम लगाने के लिए ये पहल की है। जबकि आलोचकों ने राय जताई है कि सरकार बनाने के सात महीने बाद भी इमरान खान की लोकप्रियता में सेंध ना लगा पाने और खान की पार्टी- पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के लगातार आक्रामक बने रहने से शरीफ दबाव में आ गए हैं।
इस बीच देश में पीटीआई के इस्लामाबाद तक प्रस्तावित ‘हकीकी आजादी मार्च’ को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। ये चिंता सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है। पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने गुरुवार को विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के लिए चेतावनी जारी की। इसमें कहा गया कि सियासी नेता देश के कानून का उल्लंघन करने से बाज आएं, वरना इसके नतीजे उन्हें भुगतने होंगे।
सुप्रीम कोर्ट में इमरान खान के खिलाफ से पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) सरकार की तरफ से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई चल रही है। इस याचिका में खान को इस्लामाबाद तक मार्च आयोजित करने से रोकने की गुजारिश की गई है। सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि सड़कों पर हिंसा हुई, तो सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करेगा।
विपक्ष से बातचीत की पहल प्रधानमंत्री शरीफ ने इस्लामाबाद में एक समारोह के दौरान की। लेकिन इसी दौरान उन्होंने कहा कि विपक्ष दोहरे मानदंडों पर चलता है। जब वह चार साल तक सत्ता में रहा, तब उसने कभी भी उस समय के विपक्ष से बातचीत नहीं की।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों की राय है कि प्रधानमंत्री की पेशकश के बावजूद सचमुच दोनों पक्षों में आपसी मतभेद दूर करने के लिए वार्ता होगी, इसकी संभावना कम है। इमरान खान मौजूदा सत्ताधारियों को भ्रष्ट, चोर और दलालों का झुंड कहते रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि ऐसे लोगों के साथ वे कभी बातचीत नहीं करेंगे। इसके अलावा हाल में उप चुनावों में मिली बड़ी जीत के बाद खान और उनकी पार्टी का रुख ज्यादा आक्रामक हो गया है।
इसीलिए पार्टी के प्रस्तावित आजादी मार्च के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा होने की आशंका गहरा गई है। मार्च रुकवाने के लिए सरकार ने न्यायपालिका से उम्मीद जोड़ी थी। लेकिन न्यायपालिका ने मार्च पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। जबकि गृह मंत्रालय की तरफ दायर याचिका में कहा गया है कि इमरान खान इस्लामाबाद पर हमला करने की घोषणाएं कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष अटार्नी जनरल रख रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि मई में जब इमरान खान ने इस्लामाबाद तक मार्च का आयोजन किया था, तब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को कानून-व्यवस्था के पालन संबंधी जो आश्वासन दिए थे, उन पर उन्होंने अमल नहीं किया। इसलिए इस बार उनके आयोजन पर कोर्ट को रोक लगा देनी चाहिए।