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पाकिस्तान: एस्टेब्लिशमेंट की नाराजगी आगे भी भारी पड़ सकती है इमरान खान को

Mon, 04 Apr 2022 06:43 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 04 Apr 2022 06:43 PM IST
सार

सेना के सूत्रों ने कहा कि सियासी हालत पर विचार-विमर्श के लिए सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा और खुफिया एजेंसी आईएसआई के महानिदेशक बीते बुधवार को प्रधानमंत्री खान से मिले। उस बैठक के दौरान हुई चर्चा में दोनों पक्षों ने संभावित तीन विकल्पों पर बातचीत की। यह एस्टेब्लिशमेंट का प्रस्ताव नहीं था...

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Pakistan Political crisis: Pak army role is very impoternt to deciding the future of country in ongoing crisis
इमरान खान और कमर जावेद बाजवा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान में रविवार को तेजी से घटी घटनाओं के बाद अब निगाहें आम तौर पर सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। लेकिन पर्यवेक्षकों के एक हिस्से की राय है कि आगे की घटनाओं को तय करने में ‘एस्टेब्लिशमेंट’ की भूमिका कहीं ज्यादा अहम साबित हो सकती है। इमरान खान ने रविवार को अपनी पार्टी तहरीक-ए-पाकिस्तान (पीटीआई) के नेताओं की एक बैठक में फिर इस बात का जिक्र किया कि एस्टेब्लिशमेंट ने उनके सामने तीन विकल्प रखे थे। पाकिस्तान में सेना और खुफिया तंत्र के सर्वोच्च नेतृत्व को एस्टेब्लिशमेंट का हिस्सा समझा जाता है।

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इमरान खान ने कहा है कि अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने या उसके बिना इस्तीफा दे देने के विकल्प उन्हें मंजूर नहीं थे। इसलिए उन्होंने तीसरे विकल्प- यानी समय से पहले आम चुनाव कराने के विकल्प को स्वीकार किया है। लेकिन सेना के जन संपर्क विभाग ने रविवार को फिर खंडन किया कि सेना की मौजूदा सियासी घटनाओं में कोई भूमिका है। इसके अलावा पाकिस्तान के अखबार द न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक निजी बातचीत में भी सैन्य सूत्र इमरान खान के दावे को गलत बता रहे हैं।

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एस्टेब्लिशमेंट ने विकल्पों से किया इनकार

द न्यूज से बातचीत में सेना के सूत्रों ने कहा कि एस्टेब्लिशमेंट ने अपनी पहल पर इमरान खान सरकार के सामने कोई विकल्प नहीं रखा। बल्कि खुद सरकार की तरफ से ही सैन्य नेतृत्व से फोन पर संपर्क किया गया और सियासी हालत पर विचार-विमर्श के लिए उसके साथ बैठक का अनुरोध किया गया। इस अनुरोध के बाद सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा और खुफिया एजेंसी आईएसआई के महानिदेशक बीते बुधवार को प्रधानमंत्री खान से मिले। उस बैठक के दौरान हुई चर्चा में दोनों पक्षों ने संभावित तीन विकल्पों पर बातचीत की। यह एस्टेब्लिशमेंट का प्रस्ताव नहीं था।

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सैन्य सूत्रों ने अखबार से कहा कि इमरान खान ने बैठक के दौरान ही इस्तीफा देने या अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने के विकल्पों को ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि नया चुनाव ही सही रास्ता है। सेना के सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री से बातचीत के बाद सेनाध्यक्ष और आईएसआई प्रमुख उसी दिन विपक्षी नेताओं से भी मिले। उन्होंने उनके सामने तीन विकल्प रखे। लेकिन विपक्षी नेताओं ने नेशनल असेंबली भंग कर तुरंत नया चुनाव कराने के विकल्प को ठुकरा दिया। इसके बाद सेना प्रमुख और आईएसआई के महानिदेशक ने उनसे कहा कि उनका मकसद देश की सियासी घटनाओं में हस्तक्षेप करना नहीं है।

बाजवा ने पाकिस्तान सिक्योरिटी डॉयलॉग में किया खुलासा

पाकिस्तान के सियासी हलकों में चल रही चर्चा के मुताबिक इस ‘सामान्य बातचीत’ को सार्वजनिक कर देने की वजह से एस्टेब्लिशमेंट में इमरान खान के प्रति नाराजगी है। इसके अलावा इमरान खान ने जिस तरह पाकिस्तान के अंदरूनी घटनाक्रम में अमेरिका को निशाना बना रखा है, उससे भी सेना खुश नहीं है। इसका इजहार बीते सप्ताहांत हुआ, जब सेना प्रमुख बाजवा ने पाकिस्तान सिक्योरिटी डॉयलॉग को संबोधित करते हुए अमेरिका से पाकिस्तान के लंबे और खास संबंधों की चर्चा की। उन्होंने यूक्रेन पर रूस के हमले की आलोचना भी की, जबकि इमरान सरकार ऐसा करने से बचती रही है।     



समझा जाता है कि एस्टेब्लिशमेंट से बढ़ी खाई इमरान खान के लिए आगे भी मुश्किलें पैदा करेगी। अनुमान यह है कि एस्टेब्लिशमेंट के रुख का असर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी पड़ सकता है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इन चर्चाओं का संकेत यह है कि इमरान खान की आगे की राह आसान नहीं है।

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