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पाकिस्तान लड़ेगा 'आजादी’ की लड़ाई: इमरान की नज़र में उनके हटते ही गुलाम हो जाएगा देश!

Fri, 08 Apr 2022 04:16 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 08 Apr 2022 04:16 PM IST
सार

 पीटीआई का आकलन है कि इमरान खान ने जो आरोप लगाए, उस पर जनता के एक बड़े हिस्से में यकीन किया गया है। इससे अगले आम चुनाव- चाहे ये जब कभी हों- पीटीआई को फायदा होगा। सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री फारूक हबीब ने कहा है कि इमरान खान के डर से सभी चोर इकट्ठे हो गए हैं...

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Pakistan Political Crisis: Expert says, PTI revealed its strategy to project the next government formed by opposition parties as foreigners government
इमरान खान - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थक अब नए सिरे से ‘पाकिस्तान की आजादी’ की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं। भंग नेशनल असेंबली को बहाल करने और रद्द अविश्वास प्रस्ताव पर शनिवार को मतदान कराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इमरान समर्थक ‘बागी’ तेवर में नजर आ रहे हैं। कोर्ट के फैसले को सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। ये फैसला आने के तुरंत बाद सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने कहा कि सरकार बदलने के बाद ‘लड़ाई 23 मार्च 1940 के मुकाम’ से शुरू होगी।

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मुस्लिम लीग ने 23 मार्च 1940 को ही मुसलमानों के लिए पाकिस्तान नाम से अलग देश बनाने का प्रस्ताव पारित किया था। ये प्रस्ताव लाहौर में पार्टी के हुए अधिवेशन में पास किया गया था। विश्लेषकों के मुताबिक 23 मार्च 1940 को चर्चा में लाकर पीटीआई ने विपक्षी दलों की अगली बनने वाली सरकार को ‘विदेशियों की सरकार’ के रूप में पेश करने की अपनी रणनीति जाहिर की है। फव्वाद चौधरी ने कहा- ‘हमें स्वतंत्र पाकिस्तान के लिए संघर्ष करना होगा। विपक्ष पाकिस्तान को गुलामी की तरफ ले जाने की कोशिश कर रहा है, जिसे हम सफल नहीं होने देंगे।’

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अमेरिका का गुलाम बन गए!

ऐसी बात कहने वाले फव्वाद चौधरी अकेले नेता नहीं हैं। बल्कि संकेत यह है कि पार्टी ने अगली सरकार को विदेशी साजिश से बनी सरकार के रूप में पेश करने की ठोस रणनीति तैयार की है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद प्रधानमंत्री के राजनीतिक संचार संबंधी विशेष सलाहकार शाहबाज गिल ने कहा- ‘हमारे पूर्वजों ने अपना सब कुछ कुर्बान करते हुए एक स्वतंत्र देश की स्थापना करने के लिए 1947 में वाघा बॉर्डर पार किया था। लेकिन शायद उन्हें नहीं मालूम था कि हम ब्रिटेन की जगह अमेरिका का गुलाम बन जाएंगे। अब ये मुमकिन है कि पाकिस्तान उस हाल में पहुंच जाए, जहां यह 1947 में था।’

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अविश्वास प्रस्ताव के दौरान इमरान खान ने आरोप लगाया था कि अमेरिका उनकी सरकार की स्वतंत्र विदेश नीति से खफा है। इसलिए उसके इशारे पर उनकी सरकार गिराने की साजिश रची गई है। पीटीआई का आकलन है कि इमरान खान ने जो आरोप लगाए, उस पर जनता के एक बड़े हिस्से में यकीन किया गया है। इससे अगले आम चुनाव- चाहे ये जब कभी हों- पीटीआई को फायदा होगा। सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री फारूक हबीब ने कहा है कि इमरान खान के डर से सभी चोर इकट्ठे हो गए हैं। इमरान खान की इस बात पर लोगों ने यकीन किया है। उन्होंने कहा- ‘जब चुनाव होंगे, तब जनता विपक्ष को बताएगी कि विदेशी षड्यंत्र का समर्थन करने वालों के साथ कैसा व्यवहार होता है।’ आर्थिक मामलों के मंत्री कमर अयूब ने भी कहा कि जब भी चुनाव हों, विपक्षी नेताओं को पाकिस्तान की जनता सबक सिखाएगी।


पर्यवेक्षकों के मुताबिक पीटीआई के नेताओं की इन टिप्पणियों से अंदाजा लग गया है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान में सियासी कटुता बनी रहेगी। इससे यह भी जाहिर हुआ है कि इमरान खान सामान्य राजनीतिक कायदों से नहीं, बल्कि ‘नेकी बनाम बदी’ का नैरेटिव रखते हुए अभी से अगले आम चुनाव के प्रचार अभियान में जुट जाएंगे। 

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