Pakistan: आधुनिक युग में बार्टर सिस्टम से कारोबार की पाकिस्तान की योजना मुंह के बल गिरी
पाकिस्तान सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने 57 ऐसी वस्तुओं की सूची पिछले महीने जारी की थी, जिनमें एक के बदले दूसरी चीज का आदान-प्रदान कर तीन देशों के साथ व्यापार किया जा सकता है। इन वस्तों में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस शामिल हैं...
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पाकिस्तान सरकार कर्ज की नई किस्त देने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को मनाने में कामयाब रही, लेकिन देश को आर्थिक संकट से निकालने की उसकी एक दूसरी रणनीति मुंह के बल गिर पड़ी है। महीने भर पहले पाकिस्तान सरकार ने अफगानिस्तान, ईरान और रूस के साथ वस्तुओं की अदला-बदली (बार्टर सिस्टम के जरिए) कारोबार करने का प्रावधान किया था। यह निर्णय विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से आ रही गिरावट को रोकने के लिए लिया गया था। लेकिन यह रणनीति आगे नहीं बढ़ पाई है।
पाकिस्तान सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने 57 ऐसी वस्तुओं की सूची पिछले महीने जारी की थी, जिनमें एक के बदले दूसरी चीज का आदान-प्रदान कर तीन देशों के साथ व्यापार किया जा सकता है। इन वस्तों में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस शामिल हैं। पाकिस्तान सरकार ने इसके लिए बिजनेस-टू-बिजनेस बार्टर ट्रेड मेकेनिज्म 2023 नाम से आदेश जारी किया था। अब महीने भर जानकारों का कहना है कि यह सिस्टम कारोबारियों का ध्यान तक नहीं खिंच पाया है। यह भी खबर है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इस सिस्टम के तहत कारोबार करने में कोई रुचि नहीं दिखाई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक प्राचीन और मध्य काल में बार्टर सिस्टम ही प्रचलित था। लेकिन आधुनिक दौर में इस माध्यम से कारोबार लगभग ना के बराबर रह गया है। पाकिस्तान के प्रांत खैबर पख्तूनवा के व्यापारियों की संस्था सरहद चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारी शाहिद हुसैन ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम को बताया- ‘सीमाई इलाकों में रहने वाले कई व्यापारी पहले ही अफगानिस्तान से चीजें मंगवाते हैं और उनके बदले पाकिस्तान में निर्मित होने वाली वस्तुएं उन्हें देते हैं। लेकिन ऐसे कारोबार की मात्रा बहुत थोड़ी है।’
वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर निक्कईएशिया को बताया कि पाकिस्तान सरकार ने यह कदम विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार आ रही गिरावट से पैदा हुई हताशा में उठाया। जिस समय ये निर्णय लिया गया, पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में महज तीन बिलियन डॉलर रह गए थे। अधिकारी ने कहा- ‘इसके पीछे मुख्य उद्देश्य अफगानिस्तान और ईरान से व्यापार बढ़ाना था।’
विश्लेषकों के मुताबिक अफगानिस्तान खुद गहरे वित्तीय संकट में है। इस कारण निर्यात से विदेशी मुद्रा हासिल करने के लिए वह भी बेसब्र है। ऐसे में पाकिस्तान की जरूरत को पूरा करने के लिए बार्टर सिस्टम अपनाने में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है। अफगानिस्तान के लिए तमाम विदेशी सहायता पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखा है।
वैसे ऊपरी तौर पर तीनों देश पाकिस्तान के साथ बार्टर सिस्टम के तहत कारोबार करने पर सहमति जता चुके हैं। इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट के प्रमुख आबिद कयूम सुलेरी ने बताया- ‘तीनों देश इसके लिए सहमत हैं, क्योंकि उनके सामने भी बैंकिंग सिस्टम संबंधी अपनी समस्याएं हैं।’
विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान इस माध्यम से बिना डॉलर खर्च किए रूस और ईरान से तेल और गैस मंगवाना चाहता है। साथ ही उसे उम्मीद है कि इससे ईरान और अफगानिस्तान से लगी सीमा पर होने वाली तस्करी पर रोक लगेगी।