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तैयारी: पाकिस्तान के एनएसए युसूफ मोईद करेंगे काबुल का दौरा, यह मसला सुलझाने की करेंगे कोशिश
Fri, 07 Jan 2022 09:42 PM IST
Amit Mandal
पीटीआई, इस्लामाबाद
पीटीआई, इस्लामाबाद
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 07 Jan 2022 09:42 PM IST
सार
बैठक के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि एनएसए के नेतृत्व में पाकिस्तानी अधिकारियों का एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल जल्द ही अफगानिस्तान का दौरा करेगा।
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पाकिस्तान के एनएसए मोईद यूसुफ
- फोटो : twitter.com/yusufmoeed
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विस्तार
पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) मोईद यूसुफ इस महीने के अंत में काबुल का दौरा करेंगे ताकि सीमा पर बाड़ लगाने के विवादास्पद मुद्दे पर पड़ोसी देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम किया जा सके। डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, यूसुफ को काबुल भेजने का फैसला गुरुवार को अफगानिस्तान अंतर-मंत्रालयी समन्वय प्रकोष्ठ की उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।
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बैठक के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि एनएसए के नेतृत्व में पाकिस्तानी अधिकारियों का एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल जल्द ही अफगानिस्तान का दौरा करेगा, ताकि सभी सहायता संबंधी संभावनाओं पर अफगान सरकार के साथ बातचीत की जा सके। एनएसए के दौरे की तारीख अभी तय नहीं हुई है। हालांकि, सूत्रों ने संकेत दिया कि यह दौरा संभवत: 17-18 जनवरी को हो सकता है। तालिबान के कमांडर मावल्लवी सनाउल्लाह संगीन ने चेतावनी दी थी कि वह डूरंड रेखा के साथ किसी भी रूप में पाकिस्तान द्वारा बाड़ लगाने की अनुमति नहीं देगा।
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संगीन ने बुधवार को टोलो न्यूज को बताया था कि हम (तालिबान) किसी भी समय, किसी भी रूप में बाड़ लगाने की अनुमति नहीं देंगे। उन्होंने (पाकिस्तान) पहले जो कुछ किया, उन्होंने किया, लेकिन हम अब इसकी अनुमति नहीं देंगे। अब कोई बाड़ नहीं होगी। संगीन की प्रतिक्रिया इस सप्ताह की शुरुआत में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की टिप्पणियों के बाद आई, जब उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे को राजनयिक चैनलों के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाएगा।
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कुरैशी ने सोमवार को इस्लामाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा था कि कुछ शरारती तत्व इस मुद्दे को बेवजह उठा रहे हैं, लेकिन हम इस पर गौर कर रहे हैं। हम अफगान सरकार के संपर्क में हैं। उम्मीद है कि हम कूटनीतिक रूप से इस मुद्दे को सुलझाने में सक्षम होंगे। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच 2,670 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा डूरंड रेखा पर इन दोनों देशों की सेनाओं के बीच समय-समय पर झड़पें होती रही हैं।