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Report: अमेरिका के लिए भरोसेमंद साथी नहीं, 'सिरदर्द' है पाकिस्तान; इस अमेरिकी रिपोर्ट में हुए कई बड़े खुलासे

Sat, 25 Apr 2026 10:09 PM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Sat, 25 Apr 2026 10:09 PM IST
सार

क्या खुद को अमेरिका का रणनीतिक साझेदार बताने वाला पाकिस्तान असल में पीठ पीछे उसे धोखा दे रहा है? क्या अमेरिका-ईरान विवाद में पाकिस्तान कभी एक निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है? आखिर क्यों इस्लामाबाद ने अपनी धरती पर हमास के नेताओं-आतंकियों को खुली छूट दी थी और हर अहम मोर्चे पर अमेरिका के बजाय ईरान के साथ खड़ा नजर आया? आइए, इस खबर में जानते हैं...

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Pakistan Not a Reliable Partner for US but Headache Major Revelations Emerge in American Report
डोनाल्ड ट्रंप और शहबाज शरीफ - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस नई रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि पाकिस्तान अमेरिका के लिए एक भरोसेमंद साथी बिल्कुल भी नहीं है। पाकिस्तान को एक मध्यस्थ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि वह एक ऐसा देश है जो अमेरिका के लिए लगातार मुश्किलें खड़ी कर रहा है। 
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राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य संबंधों के बावजूद पाकिस्तान ने बार-बार यह साबित किया है कि वह अमेरिका के लिए एक धोखेबाज और गैर-भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार है। रिपोर्ट के अनुसार, अब समय आ गया है कि अमेरिका उसे दिए गए 'प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी' (एमएनएनए) के खास दर्जे पर गंभीरता से दोबारा विचार करे।
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क्या कहती है रिपोर्ट?
'अमेरिकन थिंकर' रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के साथ रिश्ते मजबूत किए हैं। ट्रंप मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और उनके प्रशासन ने पाकिस्तान को वह खास दर्जा दिया हुआ है जिससे उसे सैन्य सहयोग और हथियार आसानी से मिल जाते हैं। साल 2025 की गर्मियों में पाकिस्तान के असली नेता माने जाने वाले सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने थोड़े ही समय में दो बार व्हाइट हाउस का दौरा किया था। अमेरिका ने क्रिप्टो इंडस्ट्री जैसे नए क्षेत्रों में भी पाकिस्तान के साथ काम करने में दिलचस्पी दिखाई। इसके अलावा 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने से भी पाकिस्तान का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंचा हुआ है, लेकिन रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान इस भरोसे के लायक नहीं है।
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क्या पाकिस्तान निष्पक्ष मध्यस्थ हो सकता है?
इस रिपोर्ट में अमेरिका-ईरान विवाद में पाकिस्तान को एक निष्पक्ष मध्यस्थ मानने पर बहुत बड़ा सवाल उठाया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 7 अक्टूबर, 2023 को इस्राइल पर हमास के हमले के बाद, इस्लामाबाद ने हमास के प्रतिनिधियों को अपनी धरती पर खुली छूट दी। हमास के वर्तमान विशेष प्रतिनिधि नाजी जहीर को पाकिस्तान में कई बड़े कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनाया गया। वह इस्राइल विरोधी रैलियों में शामिल हुए। सबसे खतरनाक बात यह है कि जहीर ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे खूंखार आतंकी संगठनों के साथ मंच साझा किया, जिन्हें अमेरिका ने आतंकी घोषित किया है और जो भारत में हमलों से जुड़े हैं।


पाकिस्तान ईरान के साथ खड़ा है?
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की अमेरिका विरोधी मानसिकता जून 2025 के '12-दिवसीय युद्ध' में पूरी तरह से खुलकर सामने आ गई थी। यह सीधा युद्ध ईरान और अमेरिका-इस्राइल गठबंधन के बीच हुआ था, जिसमें पाकिस्तान ने खुलकर ईरान का समर्थन किया था। यह सिलसिला 2026 में भी जारी रहा। 24 जनवरी को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान ने ईरान के खिलाफ होने वाली जांच को रोकने के लिए वोट किया था। यह जांच ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा को लेकर थी। इस मदद के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान को धन्यवाद भी दिया था।

ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत पर पाकिस्तान ने क्या प्रतिक्रिया दी?
मार्च महीने में जब अमेरिका और इस्राइल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई मारे गए, तब भी पाकिस्तान का ईरान प्रेम सामने आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खामेनेई की मौत पर दुख जताया और उसे 'शहादत' का नाम दिया। उन्होंने दुख की उस घड़ी में ईरानी लोगों के साथ पूरी एकजुटता भी दिखाई। रिपोर्ट के अंत में कहा गया है कि इन सभी घटनाओं से यह साबित होता है कि पाकिस्तान, अमेरिका-ईरान संघर्ष में कभी भी निष्पक्ष नहीं रह सकता। वाशिंगटन भले ही इस्लामाबाद पर अपना भरोसा जता रहा हो, लेकिन पाकिस्तान हमेशा अमेरिका के साथ अपनी प्रतिबद्धताओं को किनारे रखकर ईरान के साथ अपने रिश्तों को ज्यादा अहमियत देता है।


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