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Pakistan: तालिबान को संरक्षण, अफगानों को निष्कासन...; दशकों से बसे लोगों को शहबाज का नया फरमान, कहा- देश छोड़ो
Sat, 02 Aug 2025 11:04 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sat, 02 Aug 2025 11:04 PM IST
सार
पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में रह रहे अफगान नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने का आदेश दिया है। जिनके पंजीकरण कार्ड 30 जून को समाप्त हो गए, उन्हें अवैध माना जाएगा। यह कदम बढ़ते आतंकी हमलों और सुरक्षा कारणों को देखते हुए उठाया गया है। अब तक 10 लाख से अधिक अफगान पाकिस्तान से निकाले जा चुके हैं।
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पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ
- फोटो : ओआरएफ
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विस्तार
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में रह रहे अफगानी नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है। प्रांतीय गृह विभाग ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर कहा कि जिन अफगानों के पास पंजीकरण प्रमाणपत्र हैं और जिनकी वैधता 30 जून को समाप्त हो गई है, उन्हें अब अवैध माना जाएगा।
गृह विभाग की अधिसूचना में कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया है। पीओआर कार्डधारकों को पेशावर और लांडी कोटल में तय ट्रांजिट पॉइंट्स पर पहुंचने को कहा गया है ताकि उन्हें औपचारिक रूप से स्वदेश भेजा जा सके। 31 जुलाई 2025 को पीओआर धारकों की वापसी के फैसले को अंतिम रूप दिया गया और अब कोई विस्तार नहीं मिलेगा।
अफगानियों की बड़े पैमाने पर वापसी
नवंबर 2023 से अब तक पाकिस्तान से 10 लाख से अधिक अफगानियों को वापस भेजा जा चुका है। अकेले अप्रैल 2025 से अब तक 2 लाख अफगान पाकिस्तान छोड़ चुके हैं। इनमें कई ऐसे लोग हैं जो दशकों से पाकिस्तान में रह रहे थे या जिनका जन्म यहीं हुआ था।
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ये भी पढ़ें- लंदन में आमने-सामने प्रवासियों के समर्थक और विरोधी, होटल के बाहर किया गया जोरदार प्रदर्शन
आतंकी घटनाओं के चलते बढ़ा दबाव
पाकिस्तान हाल के वर्षों में कई आतंकी हमलों से प्रभावित हुआ है और इसमें अफगान तालिबान से जुड़े तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हाथ होने का शक जताया गया है। सरकार का दावा है कि इनमें अफगान नागरिकों की भूमिका रही है। इसीलिए अप्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई और तेज की गई है।
ये भी पढ़ें- ईस्ट सियांग में मेंटर सचिव यशपाल गर्ग ने की बैठक, विकास योजनाओं की प्रगति का लिया जायजा
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति
1980 के दशक में सोवियत हमले के दौरान बड़ी संख्या में अफगान पाकिस्तान भागे थे। 2021 में तालिबान की वापसी के बाद फिर से संख्या में वृद्धि हुई। अक्टूबर 2023 को सरकार ने आदेश दिया कि बिना वैध दस्तावेजों वाले अफगानों को देश छोड़ना होगा, नहीं तो उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। खैबर पख्तूनख्वा जैसे सीमावर्ती इलाकों में सबसे ज्यादा अफगान शरणार्थी देखे गए हैं।
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गृह विभाग की अधिसूचना में कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया है। पीओआर कार्डधारकों को पेशावर और लांडी कोटल में तय ट्रांजिट पॉइंट्स पर पहुंचने को कहा गया है ताकि उन्हें औपचारिक रूप से स्वदेश भेजा जा सके। 31 जुलाई 2025 को पीओआर धारकों की वापसी के फैसले को अंतिम रूप दिया गया और अब कोई विस्तार नहीं मिलेगा।
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अफगानियों की बड़े पैमाने पर वापसी
नवंबर 2023 से अब तक पाकिस्तान से 10 लाख से अधिक अफगानियों को वापस भेजा जा चुका है। अकेले अप्रैल 2025 से अब तक 2 लाख अफगान पाकिस्तान छोड़ चुके हैं। इनमें कई ऐसे लोग हैं जो दशकों से पाकिस्तान में रह रहे थे या जिनका जन्म यहीं हुआ था।
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पाकिस्तान हाल के वर्षों में कई आतंकी हमलों से प्रभावित हुआ है और इसमें अफगान तालिबान से जुड़े तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हाथ होने का शक जताया गया है। सरकार का दावा है कि इनमें अफगान नागरिकों की भूमिका रही है। इसीलिए अप्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई और तेज की गई है।
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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति
1980 के दशक में सोवियत हमले के दौरान बड़ी संख्या में अफगान पाकिस्तान भागे थे। 2021 में तालिबान की वापसी के बाद फिर से संख्या में वृद्धि हुई। अक्टूबर 2023 को सरकार ने आदेश दिया कि बिना वैध दस्तावेजों वाले अफगानों को देश छोड़ना होगा, नहीं तो उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। खैबर पख्तूनख्वा जैसे सीमावर्ती इलाकों में सबसे ज्यादा अफगान शरणार्थी देखे गए हैं।