Pakistan: पाकिस्तान में शहबाज और इमरान के बीच तू डाल-डाल, मैं पात-पात का खेल
Pakistan: पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक असेंबली भंग होने के बाद 60 दिन के अंदर उसका चुनाव कराना जरूरी हो जाता है। पीडीएम अभी चुनाव टलवाने की रणनीति पर चल रहा है। इसलिए उसने देश के सबसे बड़े प्रांत पंजाब की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। पंजाब में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) के नेता परवेज इलाही मुख्यमंत्री हैं...
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पाकिस्तान (Pakistan) के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) ने देश में जल्द ही आम चुनाव कराने की अपनी मांग मनवाने के लिए एलान किया है कि उनकी पार्टी 23 दिसंबर को अपने बहुमत वाले दोनों राज्यों- पंजाब और खैबर पख्तूनवा की प्रांतीय असेंबलियों को भंग करवा देगी। लेकिन ऐसा होने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाले गठबंधन- पाकिस्तान डेमोक्रेटिक एलायंस (पीडीएम) ने अपनी चाल चल दी है।
पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक असेंबली भंग होने के बाद 60 दिन के अंदर उसका चुनाव कराना जरूरी हो जाता है। पीडीएम अभी चुनाव टलवाने की रणनीति पर चल रहा है। इसलिए उसने देश के सबसे बड़े प्रांत पंजाब की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। पंजाब में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) के नेता परवेज इलाही मुख्यमंत्री हैं। पीएमएल (क्यू) इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का सहयोगी दल है।
कानून विशेषज्ञों के मुताबिक अविश्वास प्रस्ताव पेश होने के बाद उस पर मतदान से पहले असेंबली भंग नहीं हो सकती। विधि विशेषज्ञ मुनीब फारूक ने अखबार द न्यूज से कहा- ‘अगर मुख्यमंत्री विश्वास मत हासिल कर लेते हैं, तब वे सदन भंग कराने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। लेकिन अभी महत्त्वपूर्ण सवाल यह हो गया है कि क्या इलाही बहुमत हासिल कर पाएंगे?’
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अपनी सदस्यता जाने के डर से संभव है कि पीटीआई-पीएमएल (क्यू) गठबंधन के कुछ सदस्य अविश्वास प्रस्ताव पारित करवाने में सहायक बन जाएं। फारूक ने कहा कि अगर इलाही सरकार गिर गई, तो फिर गवर्नर पंजाब असेंबली के किसी सदस्य को सरकार बनाने की कोशिश करने के लिए कह सकते हैं। गवर्नर की नियुक्ति शहबाज शरीफ सरकार ने की है। इसलिए अनुमान है कि सदन भंग होने से रोकने की वे पूरी कोशिश करेंगे।
विश्लेषकों के मुताबिक इस महीने यह खबर चर्चित हुई थी कि कुछ ‘मित्र’ देशों के हस्तक्षेप के कारण शहबाज शरीफ सरकार समय से पहले चुनाव कराने पर राजी हो गई है। लेकिन अब ऐसा लगता है कि इस बारे में बनी सहमति टूट गई है। बल्कि अब चर्चा यह है कि चुनाव को तय समय से भी आगे ले जाने की कोशिश हो सकती है। ये चर्चा निर्वाचन आयोग के एक बयान के बाद शुरू हुई है, जिसमें आयोग ने कहा था कि अगर जनगणना की रिपोर्ट उसे सही समय पर नहीं मिली, तो वह तय समय यानी अगले साल अक्तूबर में चुनाव नहीं करवा पाएगा। जनगणना की रिपोर्ट अगले मार्च या अप्रैल में अपेक्षित है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इन्हीं संकेतों के कारण इमरान खान ने दो असेंबलियां भंग कराने की रणनीति पर आगे बढ़ने का एलान किया। लेकिन पीडीएम उनकी इस कोशिश को भी नाकाम करने में जुटी हुई है। इस बीच द न्यूज की एक रिपोर्ट में चर्चा है कि पंजाब के मुख्यमंत्री इलाही भी मुख्यमंत्री की अपनी कुर्सी बचाने के लिए पाला बदल सकते हैं। यह संभव है कि वे शहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन से हाथ मिला लें। प्रांतीय असेंबली इन दोनों के दलों की साझा संख्या बहुमत के लिए जरूरी 186 से अधिक हो जाएगी। ऐसा हुआ, तो इससे इमरान खान को एक बड़ा सियासी धक्का लगेगा।