Pakistan: विदेशी निवेश के लिए समर्पण की मुद्रा में पाकिस्तान, कानून से मुक्ति देने को तैयार
Pakistan: शहबाज शरीफ सरकार ने अब विदेशी निवेश संरक्षण बिल लाने की घोषणा कर दी है। सरकार ने कहा है कि इसके जरिए विदेशी निवेशकों को पाकिस्तान में सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जाएगा। देश में निवेश करने वाली कंपनियों की शिकायतें बढ़ती चली गई हैं। नया कानून उन्हें ऐसी शिकायतों से मुक्ति दिलवाएगा...
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आर्थिक संकट में गहराई तक डूबे पाकिस्तान की सरकार ने अब विदेशी निवेशकों को संरक्षण देने के विशेष उपाय करने की घोषणा की है। शहबाज शरीफ सरकार ने इसके लिए विशेष कानून बनाने का फैसला किया है। प्रस्तावित कानून के तहत विदेशी निवेशकों को पाकिस्तान के अंदर न्यायिक और संसदीय कार्यवाहियों से मुक्ति दे दी जाएगी। बताया गया है कि ये कानून पारित कराने के लिए संसद के ऊपरी सदन सीनेट का विशेष अधिवेशन बुलाया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रेको डिग मामले में सुप्रीम कोर्ट का अनुकूल निर्णय आने से शहबाज शरीफ सरकार का हौसला बढ़ा है। पाकिस्तान सरकार ने रेको डिग माइनिंग प्रोजेक्ट पर फिर से काम शुरू करने के लिए दो विदेशी कंपनियों एंतोफागस्ता और बैरिक गोल्ड कॉरपोरेशन से करार किया था। उस करार में इन कंपनियों को न्यायिक और संसदीय कार्यवाहियों से मुक्ति दी गई थी। बीते शुक्रवार को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इस करार को वैध ठहरा दिया।
यह करार संवैधानिक है या नहीं, इसे परखने के लिए खुद सरकार ने इसे राष्ट्रपति के रेफरेंस (प्रेसिडेंशियल रेफरेंस) के जरिए सुप्रीम कोर्ट के पास पिछले महीने भेजा था। उधर आलोचकों ने कहा है कि बढ़ते आर्थिक संकट से फैली बदहवासी के बीच पाकिस्तान सरकार ने विदेशी निवेशकों को देश के कानून से ऊपर कर दिया था। इसी माहौल के कारण सुप्रीम कोर्ट ने भी इस करार को सही ठहरा दिया है। अब ये चलन तेजी से आगे बढ़ेगा।
शहबाज शरीफ सरकार ने अब विदेशी निवेश संरक्षण बिल लाने की घोषणा कर दी है। सरकार ने कहा है कि इसके जरिए विदेशी निवेशकों को पाकिस्तान में सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जाएगा। सरकारी सूत्रों ने कहा है कि देश में निवेश करने वाली कंपनियों की शिकायतें बढ़ती चली गई हैं। नया कानून उन्हें ऐसी शिकायतों से मुक्ति दिलवाएगा। अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक अभी सरकार के अंदर इस बात पर विचार किया जा रहा है कि बिल को पहले सीनेट में पेश किया जाए, या संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली में।
रेको डिग करार पिछले मार्च में हुआ था। तब इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में थी। इसके पहले 2013 में सुप्रीम कोर्ट ऐसे प्रावधान वाले एक करार को रद्द कर दिया था। लेकिन इस बार कोर्ट ने कहा कि रेको डिग समझौते से उसके 2013 के फैसले का उल्लंघन नहीं होता है। कोर्ट ने कहा कि रेको डिग का नया करार पारदर्शिता बरतते हुए और बुद्धिमानी का परिचय देते हुए किया गया है। इससे किसी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।
वैसे बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि रेको डिग करार के वैध ठहराए जाने के बावजूद इस परियोजना पर तुरंत काम शुरू होने की संभावना नहीं है। अभी निवेशकों का भरोसा बंधाने के लिए सरकार को कई और कदम उठाने होंगे। इन विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी निवेश (संरक्षण और प्रोत्साहन) बिल-2022 अगर पारित हो गया, तो उसके बाद जरूर परियोजना शुरू की संभावनाएं मजबूत होंगी। उम्मीद जताई गई है कि सरकार 15 दिसंबर तक ये बिल पारित करा लेगी।