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Pakistan IMF Loan: अंधेरे में हाथ-पांव मार रही है बढ़ती मुश्किलों से परेशान शहबाज शरीफ सरकार?

Wed, 22 Mar 2023 04:23 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 22 Mar 2023 04:23 PM IST
सार

पाकिस्तान वित्तीय रूप से दिवालिया होने के कगार है। जानकारों का कहना है कि ऐसे मौके पर सरकार को एडवेंचर करने के बजाय अर्थव्यवस्था को सुधारने की समग्र योजना बनाने में ध्यान लगाना चाहिए। लेकिन ऐसा लगता है कि शहबाज शरीफ सरकार अपनी बढ़ती अलोकप्रियता का इलाज ढूंढने में लगी हुई है...

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Pakistan IMF Loan: pakistan Government started changing the policy of reducing government expenditure
शहबाज शरीफ, आईएमएफ - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से तुरंत ऋण मिलने की उम्मीद टूटने के बाद अब पाकिस्तान सरकार ने सरकारी खर्च घटाने की नीति में बदलाव शुरू कर दिया है। आईएमएफ ने पाकिस्तान सरकार पर राजकोषीय घाटा कम करने की शर्त लगाई थी। इसके तहत शहबाज शरीफ सरकार ने पेट्रोलियम पर सब्सिडी में भारी कटौती की, जिससे देश में पेट्रोल और डीजल के दाम तेजी से बढ़े। लेकिन पिछले दिनों सरकार ने दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए ईंधन सब्सिडी की नई योजना का एलान किया।

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विश्लेषकों के मुताबिक इस योजना का मकसद नेक है। इसके तहत सरकार निम्न मध्य वर्ग और ऑटो चालकों को राहत देना चाहती है। लेकिन इस योजना पर अमल करना आसान नहीं होगा। सरकार की योजना के मुताबिक दोपहिया और तिपहिया वाहन मालिकों को हर महीने 100 (पाकिस्तानी) रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। लेकिन आलोचकों के मुताबिक यह रकम किस मद से दी जाएगी, इस बारे में सरकार ने कोई जानकारी नहीं दी है।

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पाकिस्तान में ढाई करोड़ से ज्यादा दोपहिया और तिपहिया वाहन हैं। औसतन इनमें रोजाना आधा लीटर ईंधन की खपत होती है। विश्लेषकों के मुताबिक इस हिसाब से सरकार ने सवा करोड़ लीटर ईंधन को सब्सिडाइज्ड करने का फैसला किया है। इस लिहाज से सरकार को रोजाना सवा अरब रुपये का खर्च करने होंगे। यानी मासिक खर्ज 30 करोड़ 75 लाख रुपये का आएगा। अगर सालाना बजट के लिहाज से हिसाब लगाएं, तो इस सब्सिडी पर सरकार को साढ़े चार अरब रुपये खर्च करने होंगे। जिस समय सरकार का खजाना रोज चूकता जा रहा है, उस समय इतनी रकम का इंतजाम वह कैसे करेगी, यह सवाल चर्चा में है।

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परिवहन विशेषज्ञों ने कहा है कि बेहतर होता सरकार ऐसी सब्सिडी का एलान करने के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का जाल बिछाने की योजना पर काम करती। उससे देश में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य भी होता, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होते। साथ ही यह माना जाता है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्रोत्साहन परिवहन प्रदूषण का एक उचित उपाय है। इसके विपरीत सरकार ने निजी परिवहन को सब्सिडी देने का फैसला का है। इससे ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।

अखबार द न्यूज में छपे एक विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि समान ईंधन की दो कीमत प्रणाली लागू करना समस्या को और बढ़ा सकता है। इससे ईंधन की कालाबाजारी भी बढ़ सकती है। यह संभव है कि बहुत से लोग सब्सिडाइज्ड ईंधन खरीद कर उसे महंगे दाम पर खुले बाजार में बेचने लगें।

पाकिस्तान वित्तीय रूप से दिवालिया होने के कगार है। जानकारों का कहना है कि ऐसे मौके पर सरकार को एडवेंचर करने के बजाय अर्थव्यवस्था को सुधारने की समग्र योजना बनाने में ध्यान लगाना चाहिए। लेकिन ऐसा लगता है कि शहबाज शरीफ सरकार अपनी बढ़ती अलोकप्रियता का इलाज ढूंढने में लगी हुई है। इसलिए उसने समाज के एक बड़े तबके को राहत देने का एलान किया है। लेकिन इससे समस्या हल होने के बजाय मुमकिन है कि स्थितियां और बिगड़ जाएं। सब्सिडी की योजना आईएमएफ को भी पसंद नहीं आएगी और इस कारण संभव है कि उससे कर्ज पाना और कठिन हो जाए।

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