{"_id":"6603bceb483c2ee2900e723d","slug":"pakistan-high-court-judges-allege-intelligence-agencies-interference-in-judicial-matters-2024-03-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pakistan: आईएचसी न्यायाधीशों का न्यायिक परिषद को चिट्ठी, ISI पर न्यायपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप का आरोप","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Pakistan: आईएचसी न्यायाधीशों का न्यायिक परिषद को चिट्ठी, ISI पर न्यायपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप का आरोप
Wed, 27 Mar 2024 12:09 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: श्वेता महतो
Updated Wed, 27 Mar 2024 12:09 PM IST
सार
इस्लामाबाद हाई कोर्ट के छह न्यायधीशों ने एक चिट्ठी में हस्ताक्षर कर खुफिया एजेंसियों द्वारा न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप के खिलाफ न्यायिक परिषद से इसपर कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन
इस्लामाबाद हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इस्लामाबाद हाई कोर्ट के छह न्यायाधीशों ने पाकिस्तान की शक्तिशाली खुफिया एजेंसियों द्वारा न्यायपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप करने के खिलाफ न्यायिक परिषद (एसजेसी) से मदद की गुहार की है। उन्होंने न्यायिक परिषद से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
न्यायिक परिषद से हस्तक्षेप की मांग
हाई कोर्ट के छह न्यायधीशों ने एक चिट्ठी में हस्ताक्षर कर एजेंसियों से न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप के खिलाफ न्यायिक परिषद से कार्रवाई की मांग की है। चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वालों न्यायधीशों में जस्टिस मोहसीन अख्तर कयानी, जस्टिस तारिक महमूद जहंगिरी, जस्टिस बाबर सत्तार, जस्टिस सरदार इजाज इशाक खान, जस्टिस अरबाब मुहम्मद ताहिर, और जस्टिस समन रफत इम्तियाज का नाम शामिल है।
इस चिट्ठी के जरिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के रुख पर भी ध्यान देने की बात कही गई। एसजेसी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सर्वोच्च निकाय है।
विज्ञापन
पत्र में कहा गया, "हम एक न्यायाधीश के कर्तव्य के संबंध में सर्वोच्च न्यायिक परिषद (एसजेसी) से मार्गदर्शन लेने के लिए यह पत्र लिख रहे हैं। जज का दायित्व है कि वह खुफिया एजेंसियों के लोगों सहित कार्यपालिका के सदस्यों की ओर से की गई ऐसी कार्रवाइयों को रिपोर्ट करे और उनका जवाब दे, जो उसके काम में हस्तक्षेप करना चाहते हैं। हम इसके लिए दी जाने वाली धमकियों को भी सामने लाना चाहते हैं। साथ ही अगर हमारे सहकर्मियों या अदालतों के सदस्य भी ऐसी घटना का शिकार हो रहे हैं तो इसे संज्ञान में लाना हमारा दायित्व है। खासकर ऐसे लोग जो हाईकोर्ट के अधीन हैं।"
जस्टिस सिद्दिकी ने लगाया था खुफिया एजेंसियों पर आरोप
यह मांग शीर्ष अदालत द्वारा इस्लामाबाद के पूर्व हाई कोर्ट के जस्टिस अजीज सिद्दिकी को हटाने को अवैध घोषित करने के कुछ दिनों बाद की गई है। बता दें कि सिद्दिकी को 11 अक्तूबर 2018 में बर्खाश्त कर दिया गया था। दरअसल एक भाषण के दौरान उन्होंने देश की खुफिया एजेंसी (आईएसआई) पर देश की अदालती कार्यवाही को प्रभावित करने का आरोप लगाया था। चिट्ठी में न्यायधीशों ने जस्टिस सिद्दिकी द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करने के अनुरोध का भी समर्थन किया है।
विज्ञापन
न्यायिक परिषद से हस्तक्षेप की मांग
हाई कोर्ट के छह न्यायधीशों ने एक चिट्ठी में हस्ताक्षर कर एजेंसियों से न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप के खिलाफ न्यायिक परिषद से कार्रवाई की मांग की है। चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वालों न्यायधीशों में जस्टिस मोहसीन अख्तर कयानी, जस्टिस तारिक महमूद जहंगिरी, जस्टिस बाबर सत्तार, जस्टिस सरदार इजाज इशाक खान, जस्टिस अरबाब मुहम्मद ताहिर, और जस्टिस समन रफत इम्तियाज का नाम शामिल है।
विज्ञापन
इस चिट्ठी के जरिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के रुख पर भी ध्यान देने की बात कही गई। एसजेसी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सर्वोच्च निकाय है।
विज्ञापन
पत्र में कहा गया, "हम एक न्यायाधीश के कर्तव्य के संबंध में सर्वोच्च न्यायिक परिषद (एसजेसी) से मार्गदर्शन लेने के लिए यह पत्र लिख रहे हैं। जज का दायित्व है कि वह खुफिया एजेंसियों के लोगों सहित कार्यपालिका के सदस्यों की ओर से की गई ऐसी कार्रवाइयों को रिपोर्ट करे और उनका जवाब दे, जो उसके काम में हस्तक्षेप करना चाहते हैं। हम इसके लिए दी जाने वाली धमकियों को भी सामने लाना चाहते हैं। साथ ही अगर हमारे सहकर्मियों या अदालतों के सदस्य भी ऐसी घटना का शिकार हो रहे हैं तो इसे संज्ञान में लाना हमारा दायित्व है। खासकर ऐसे लोग जो हाईकोर्ट के अधीन हैं।"
जस्टिस सिद्दिकी ने लगाया था खुफिया एजेंसियों पर आरोप
यह मांग शीर्ष अदालत द्वारा इस्लामाबाद के पूर्व हाई कोर्ट के जस्टिस अजीज सिद्दिकी को हटाने को अवैध घोषित करने के कुछ दिनों बाद की गई है। बता दें कि सिद्दिकी को 11 अक्तूबर 2018 में बर्खाश्त कर दिया गया था। दरअसल एक भाषण के दौरान उन्होंने देश की खुफिया एजेंसी (आईएसआई) पर देश की अदालती कार्यवाही को प्रभावित करने का आरोप लगाया था। चिट्ठी में न्यायधीशों ने जस्टिस सिद्दिकी द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करने के अनुरोध का भी समर्थन किया है।