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Pakistan Floods: पाकिस्तान में बाढ़ के बाद उठी जलवायु न्याय की मांग, धनी देश करें क्षति की भरपाई

Thu, 15 Sep 2022 06:26 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 15 Sep 2022 06:26 PM IST
सार

Pakistan Floods: विशेषज्ञों में इस बात पर आम सहमति है कि ये पाकिस्तान में ये तबाही जलवायु परिवर्तन के कारण हुई है। जलवायु परिवर्तन की ऐसी मार दूसरे देशों में भी देखने को मिली है। इस वर्ष फरवरी में ऑस्ट्रेलिया में भी अभूतपूर्व बाढ़ आई थी...

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Pakistan Floods: pakistan demands climate justice asked compensation from rich countries
pakistan floods - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान में भीषण बाढ़ के कारण हुई भारी तबाही ने जलवायु न्याय के मुद्दे को देश-विदेश में एजेंडे पर ला दिया है। पाकिस्तान में जुलाई-अगस्त की बाढ़ से लगभग 1,400 लोगों की जान गई, 17 लाख मकान बर्बाद हो गए, 7000 किलोमीटर सड़कें बह गईं और 250 से अधिक पुल टूट गए। देश के 160 जिलों को ‘आपदा ग्रस्त’ घोषित करना पड़ा। गेहूं और कपास की फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिससे देश में लाखों लोगों के भुखमरी का शिकार होने का खतरा मंडरा रहा है।

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विशेषज्ञों में इस बात पर आम सहमति है कि ये तबाही जलवायु परिवर्तन के कारण हुई है। जलवायु परिवर्तन की ऐसी मार दूसरे देशों में भी देखने को मिली है। इस वर्ष फरवरी में ऑस्ट्रेलिया में भी अभूतपूर्व बाढ़ आई थी। उधर यूरोप और चीन में असाधारण गर्मी पड़ी। लेकिन सबसे ज्यादा बर्बादी पाकिस्तान में ही हुई है। इसी कारण पाकिस्तान जलवायु न्याय पर तेज हुई बहस के केंद्र में आ गया है।

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विशेषज्ञों ने कहा है कि जलवायु को धनी देशों ने खराब किया। अब उसकी मार गरीब देशों को झेलनी पड़ रही है। आबादी के लिहाज से पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश है। लेकिन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में उसका योगदान सिर्फ एक फीसदी है। जबकि जर्मन वॉच नाम की संस्था की तरफ से प्रकाशित ‘ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स- 2021’ के मुताबिक पाकिस्तान उन देशों में है, जहां जलवायु परिवर्तन की सबसे ज्यादा मार पड़ने का अंदेशा है।

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इन तथ्यों का हवाला देते हुए पाकिस्तान के कई राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग उठाई है कि उनके देश को बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई अंतरराष्ट्रीय समुदाय करे। पाकिस्तान की जलवायु परिवर्तन मंत्री शेरी रहमान ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में कहा है- ‘पिछले एक साल से हम अधिक कार्बन उत्सर्जन कर रहे लोगों की उच्च जीवनशैली की कीमत चुका रहे हैं। यह साफ हो गया है कि जलवायु परिवर्तन का असर शुरू हो चुका है।’ रहमान ने ध्यान दिलाया कि 2021 में ग्लासगो में हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के दौरान जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान की भरपाई की चर्चा हुई थी।

कई विशेषज्ञ यह राय जता चुके हैं कि इस साल आई बाढ़ सबसे अलग थी। वाटर एनवायरोनमेंट फोरम पाकिस्तान नाम की संस्था के सदस्य अली तौकीर शेख ने कहा है कि पाकिस्तान ने बीते 75 वर्षों में सामान्य बाढ़ के बचाव का इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाया है। लेकिन वह इस बार आई बाढ़ से बचाने में सक्षम नहीं हुआ। पाकिस्तान में बाढ़ का असर तीन करोड़ 30 लाख लोगों पर पड़ा है।

पाकिस्तान में उठी जलवायु न्याय की मांग का समर्थन संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटारेस ने भी किया है। गुटारेस बाढ़ से हुई बर्बादी का जायजा लेने यहां आए थे। यहां उन्होंने कहा- ‘हमने प्रकृति के खिलाफ युद्ध छेड़ा। अब प्रकृति उसका बदला ले रही है और ऐसा वह विनाशकारी रूप से कर रही है। आज पाकिस्तान उसका शिकार बना है, कल कोई और देश बनेगा।’ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे तमाम देशों की मदद का सिस्टम बनाने की अपील की है।

पाकिस्तान के बाहर के विशेषज्ञ भी इस बात से सहमत हैं कि पाकिस्तान पर पड़ी मार का कारण जलवायु परिवर्तन है। जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरोनमेंट स्टडीज में वरिष्ठ शोधकर्ता सेइता इमोरी ने कहा है- ‘अगर ग्लोबल वॉर्मिंग नहीं हुई होती, तो मौसमी कारणों से पाकिस्तान में इतनी भारी बारिश नहीं होती।’ उन्होंने निक्कई एशिया से कहा- पाकिस्तान सबसे कम मात्रा में कार्बन उत्सर्जन करने वाला देश है। उसे ऐसा नतीजा भुगतना पड़े, यह अतार्किक है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगे आना चाहिए। उसे ग्लोबल वॉर्मिंग घटाने के उपाय अब अधिक तेजी से करने चाहिए।

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