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Ayesha Malik: पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में पहली महिला जज आयशा मलिक ने ली शपथ, जानें इनके बारे में सबकुछ
Mon, 24 Jan 2022 08:40 PM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 24 Jan 2022 08:40 PM IST
सार
न्यायमूर्ति आयशा मलिक लाहौर हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की वरिष्ठता सूची में चौथे स्थान पर होने के बावजूद शीर्ष स्थान के लिए चुनी गई हैं। उनका नामांकन पिछले साल पाकिस्तान के न्यायिक आयोग ने खारिज कर दिया था। लेकिन आयोग ने इस माह की शुरुआत में उन्हें पांच में से चार के बहुमत के साथ मंजूरी दे दी।
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आएशा मलिक
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
रूढ़िवादी मुस्लिम देश के न्यायिक इतिहास में पहली बार न्यायमूर्ति आयशा मलिक ने सोमवार को पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। मुख्य न्यायाधीश गुलजार अहमद ने सर्वोच्च न्यायालय के समारोह सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान 55 वर्षीय जस्टिस मलिक को शपथ दिलाई। उनके नाम को राष्ट्रपति आरिफ अल्वी की भी मंजूरी मिल चुकी थी।
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मुख्य न्यायाधीश गुलजार अहमद ने कहा कि सुश्री मलिक सुप्रीम कोर्ट में जज बनने के लिए पर्याप्त रूप से योग्य थीं और उनकी पदोन्नति के लिए कोई भी श्रेय का हकदार नहीं है। उनकी नियुक्ति पर सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने उन्हें ऐतिहासिक ऊंचाई के लिए बधाई दी।
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न्यायमूर्ति आयशा मलिक लाहौर हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की वरिष्ठता सूची में चौथे स्थान पर होने के बावजूद शीर्ष स्थान के लिए चुनी गई हैं। उनका नामांकन पिछले साल पाकिस्तान के न्यायिक आयोग ने खारिज कर दिया था। लेकिन आयोग ने इस माह की शुरुआत में उन्हें पांच में से चार के बहुमत के साथ मंजूरी दे दी।
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कौन हैं आयशा मलिक
तीन जून 1966 को जन्मी आयशा मलिक ने कराची ग्रामर स्कूल से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद कराची के ही गवर्नमेंट कालेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स से स्नातक की उपाधि ली थी। इसके बाद लाहौर के कॉलेज ऑफ लॉ से डिग्री लेने के बाद उन्होंने अमेरिका में मेसाच्यूसेट्स के हॉवर्ड स्कूल ऑफ लॉ से एलएलएम (विधि परास्नातक) की पढ़ाई की। उन्हें 1998-1999 में 'लंदन एच गैमोन फेलो' भी चुना गया था।
दुनिया के लिए मिसाल बनीं न्याधीश आयशा मलिक
आयशा मलिक की नियुक्ति का पाकिस्तान की कई हस्तियों ने समर्थन किया है। मुख्य न्यायाधीश गुलज़ार अहमद ने इस ऐतिहासिक फैसले को अपना समर्थन दिया है। वहीं सत्तारूढ़ तकरीक-ए-इंसाफ पार्टी की सांसद और कानून के लिए संसदीय सचिव मलिका बुखारी ने उनकी नियुक्ति पर ट्वीट किया, 'देश के लिए एक महत्वपूर्ण और निर्णायक पल जब एक शानदार वकील और बेहतरीन जज को पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज बनाया गया। रवायतें टूट रही हैं।' एक डिजिटल अधिकार वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता निघाट डैड ने कहा कि जस्टिस मलिक ने "अदालत में अपनी क्षमता" साबित कर दी है।
क्या था जस्टिस आयशा मलिक का ऐतिहासिक फैसला
जस्टिस आयशा ने पिछले साल महिला बलात्कार पीड़ितों के लिए रेप परीक्षण को गैरकानूनी घोषित कर दिया था। उन्होंने अपने फैसले में कहा, "यह एक अपमानजनक प्रथा है, जिसका इस्तेमाल पीड़िता पर संदेह करने के लिए किया जाता है, न कि आरोपी और यौन हिंसा की घटना पर ध्यान केंद्रित करने के लिए।”