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पाकिस्तान: मदरसों में हो रहा बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न, इमरान के वादे के बाद भी नहीं सुधरे हालात

Mon, 13 Apr 2020 08:25 PM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अनवर अंसारी Updated Mon, 13 Apr 2020 08:25 PM IST
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Pakistan: Child sex abuse and Sexual harassment of children in madrasas, situation not improved Imran Khan promise
मदरसा - फोटो : Twitter

पाकिस्तान में आए दिन अल्पसंख्यक समाज के साथ होने वाले भेदभाव की खबरें सुर्खियों में छाई रहती हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि सिर्फ अल्पसंख्यकों को ही यहां परेशानी झेलनी पड़ती है। पाकिस्तान के मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे भी कई तरह की परेशानियों को झेलते हैं। बच्चों के साथ मदरसों में होने वाला बाल यौन उत्पीड़न इन्हीं में से एक है। 

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मदरसों में होने वाली यौन उत्पीड़न की घटनाएं पाकिस्तान में अब आम बात हो गई है। जिन बच्चों के साथ इस तरह की घटनाएं होती हैं, उनके मां-बाप पुलिस में शिकायत तो दर्ज करवाते है। लेकिन मौलवियों द्वारा उन पर धर्म का अपमान करने का आरोप लगाने और समाज में बदनामी के चलते उन्हें केस वापस लेने पर मजबूर होना पड़ता है। 
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22,000 मदरसों में पढ़ रहे 20 लाख से ज्यादा बच्चे
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, पूरे पाकिस्तान के मदरसों या धार्मिक स्कूलों में पढ़ाने वाले इस्लामिक मौलवियों पर यौन उत्पीड़न, दुष्कर्म और शारीरिक शोषण का आरोप लगाने वाले हजारों केस पाकिस्तान के पुलिस स्टेशनों में दर्ज किए जाते हैं। पाकिस्तान की गरीब आवाम अधिकतर अपने बच्चों को इस्लामी तालीम के लिए इन मदरसों में भेजती है। 
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पाकिस्तान में 22,000 पंजीकृत मदरसे हैं, जहां देश के 20 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा पूरे देश में बहुत से ऐसे मदरसे भी हैं, जिनका पंजीकरण नहीं किया गया है। आम तौर पर ऐसे मदरसों को स्थानीय मौलवियों द्वारा गरीब इलाकों में शुरू किया जाता है, जहां ये गरीब बच्चों को मुफ्त भोजन और आवास मुहैया कराने का वादा करते हैं।

इमरान ने मदरसों को जवाबदेह बनाने का किया वादा, लेकिन नहीं हुआ पूरा काम

पाकिस्तान में मदरसों को चलाने वाले मौलवियों का कोई केंद्रीय निकाय नहीं है। साथ ही मौलवियों द्वारा दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच या उन पर प्रतिक्रिया देने के लिए कोई केंद्रीय प्राधिकरण भी मौजूद नहीं है। 

प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार ने पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाने और मदरसों को और अधिक जवाबदेह बनाने का वादा किया है, लेकिन इस पर बहुत कम काम हुआ है। पुलिस का कहना है कि मौलवियों द्वारा बच्चों के यौन शोषण की समस्या बहुत व्यापक है। उनका कहना है कि पुलिस में जितनी रिपोर्ट दर्ज करवाई जाती है, वह बहुत कम है। अधिकतर इस तरह की घटनाओं की रिपोर्ट ही दर्ज नहीं करवाई जाती है। 

इस्लाम की निंदा का आरोप लगाकर अपराध छिपाते मौलवी
फिर भी दर्जनों रिपोर्टों के बावजूद किसी ने भी एक मौलवी को दोषी नहीं ठहराया। धार्मिक मौलवी पाकिस्तान में एक शक्तिशाली समूह हैं और जब उनमें से एक के खिलाफ दुर्व्यवहार के आरोप लगाए जाते हैं तो वे संगठित होकर इसके खिलाफ खड़े हो जाते हैं। वे पीड़ितों पर इस्लाम की निंदा या मानहानि का आरोप लगाकर अपने अपराध को छिपाने में सफल हो जाते हैं।

पाकिस्तान में मौलवियों के खिलाफ इस तरह के अपराध का मामला दर्ज करवाने वाले परिवारों पर दबाव बनाया जाता है कि वह मौलवी को माफ कर दें। परिवारों के बीच इस बात का भी डर होता है कि उनके बच्चों को यौन उत्पीड़न के इस कलंक के साथ सारी जिंदगी गुजारनी होगी। इस कारण बहुत से परिवार दर्ज मामलों को वापस ले लेते हैं। जब एक परिवार मौलवी को माफ कर देता है तो जांच समाप्त हो जाती है क्योंकि आरोप हटा दिए जाते हैं।

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