Pakistan: 'संसद से किसी को अयोग्य ठहराना इस्लाम के खिलाफ', पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश काजी फैज ने कही यह बात
आजीवन अयोग्यता मामले पर सुनवाई करते हुए पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश काजी फैज ने कहा कि किसी को संसद के लिए आजीवन अयोग्य ठहराना इस्लाम के खिलाफ हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश काजी फैज ईसा ने गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान कहा कि संसद के लिए किसी को भी आजीवन अयोग्य ठहराना इस्लाम के खिलाफ हैं, उच्चतम न्यायालय ने आजीवन अयोग्यता से जुड़ी सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी हैं। उन्होंने कहा कि "पवित्र कुरान में उल्लेख है कि इंसानों का दर्जा बहुत ऊंचा है। उन्होंने एक आयत का जिक्र करते हुए कहा, जो बताती है कि इंसान बुरे नहीं हैं बल्कि उनके कर्म बुरे हैं। उन्होंने कहा कि अगर अल्लाह ने ऐसा नहीं किया तो अदालत पश्चाताप का दरवाजा कैसे बंद कर सकती है।"
शीर्ष अदालत की पांच सदस्यीय पीठ के 2018 के फैसले में कहा गया था कि अनुच्छेद 62(1)(एफ) के तहत अयोग्यता जीवन भर के लिए थी, लेकिन 26 जून, 2023 को पाकिस्तान के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार द्वारा चुनाव अधिनियम 2017 में बदलाव किए गए। मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने इसे केवल पांच साल के कार्यकाल तक सीमित रखा। सात सदस्यीय पीठ का नेतृत्व करने वाले मुख्य न्यायाधीश ईसा ने कहा कि अदालत इस पर स्पष्टता मांग रही थी कि क्या किसी विधायक के लिए अयोग्यता की अवधि पांच साल थी या उपरोक्त लेख के तहत आजीवन प्रतिबंध था जो चुनाव लड़ने के मानदंडों से संबंधित है।
इसी बीच, पाकिस्तान में सार्वजनिक पद धारकों के लिए चुनाव कानूनों में बदलावों के बाद अयोग्यता की अवधि को लेकर असमंजस खत्म हो गया है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपने पहले आदेश को रद्द करते हुए भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों के तहत एक दोषी के लिए 10 साल की अयोग्यता को बहाल कर दिया हैं। साफतौर पर इस फैसले का असर आठ फरवरी को होने वाले आम चुनाव से पहले इमरान खान और नवाज शरीफ सहित कई राजनेताओं द्वारा दायर कई मामलों पर पड़ने की संभावना हैं।
गौरतलब है कि 1999 के राष्ट्रीय जवाबदेही अध्यादेश ने भ्रष्टाचार के दोषी व्यक्ति के लिए 10 वर्ष की अयोग्यता का प्रावधान किया था, लेकिन पिछले वर्ष अप्रैल माह में इस्लामाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने चुनाव कानूनों में किए गए संशोधनों के बाद एक मामले की सुनवाई करते हुए इसे घटाकर पांच वर्ष कर दिया था। नवाज शरीफ के छोटे भाई शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पिछली सरकार द्वारा किए गए बदलावों में अयोग्यता की अधिकतम पांच साल की अवधि अनिवार्य थी, जिससे जाहिर तौर पर हर दोषी को राहत मिलती थी।