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एक्सप्लेनर: नेपाल में अचानक बाढ़ आने की क्या है वजह, भारतीय कहां फंसे; क्या बिहार तक भी आ सकता है संकट?
Wed, 26 Aug 2026 05:25 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 26 Aug 2026 05:25 PM IST
सार
नेपाल के रसुवा में भोटेकोशी नदी की अचानक आई बाढ़ में 100 से अधिक भारतीय तीर्थयात्री लापता हो गए हैं। जानिए तिब्बत में भूकंप, हिमस्खलन और ग्लेशियल लेक फटने के संभावित कारण और सेना के रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में।
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नेपाल से भारत में आने वाली नदियां।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को भयावह नजारा देखने को मिला। दरअसल, यहां से गुजरने वाली भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे नदी ने विकराल रूप ले लिया और इसके पानी ने किनारों के आसपास मौजूद रिहायशी क्षेत्रों को भारी नुकसान पहुंचाया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस बाढ़ में 95 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और दर्जनों अन्य की जान जाने की आशंका है। वहीं, अब तक कम से कम 500 लोगों के लापता होने की बात सामने आई है, जिनमें 100 से ज्यादा भारतीय और कई विदेशी भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि यह आंकड़ा भी हजारों तक पहुंच सकता है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि नेपाल के रसुवा जिले में आखिर इस तीव्र बाढ़ की वजह क्या रही है? वैज्ञानिक इसकी क्या वजह मान रहे हैं? नेपाल में इस बाढ़ की चपेट में आने वाले भारतीय वहां क्या कर रहे थे? फिलहाल बाढ़ की चपेट में आए लोगों को बचाने और इनके रेस्क्यू के लिए क्या किया जा रहा है? आइये जानते हैं...
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ऐसे में यह जानना अहम है कि नेपाल के रसुवा जिले में आखिर इस तीव्र बाढ़ की वजह क्या रही है? वैज्ञानिक इसकी क्या वजह मान रहे हैं? नेपाल में इस बाढ़ की चपेट में आने वाले भारतीय वहां क्या कर रहे थे? फिलहाल बाढ़ की चपेट में आए लोगों को बचाने और इनके रेस्क्यू के लिए क्या किया जा रहा है? आइये जानते हैं...
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रसुवा जिले में आखिर इस तीव्र बाढ़ की वजह क्या रही है?
रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई इस अचानक और तीव्र बाढ़ की वजहों को लेकर वैज्ञानिकों और मौसम विभाग के शुरुआती आकलन मुख्य रूप से तिब्बत में हुए हिमस्खलन और हिमताल (ग्लेसियल लेक) में हुए धमाके की ओर इशारा कर रहा है। काठमांडू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और जलवायु शोधकर्ता रिजनभक्त कायस्थ ने नेपाली वेबसाइट- 'कांतीपुर' को चीन के वैज्ञानिकों से हुई प्रारंभिक चर्चा और निष्कर्षों के आधार पर इस बाढ़ की वजह बताई।ये भी पढ़ें: नेपाल बाढ़ लाइव: पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री बालेन शाह से की बात, बोले- भारत हर संभव मदद के लिए तैयार
भोटेकोशी नदी में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला
1. भूकंप से अचानक टूटा ल्हेन्दे नदी का अवरोध
वैज्ञानिक इस हिमस्खलन के पीछे उसी समय क्षेत्र में आए भूकंप को भी एक संभावित ट्रिगर मान रहे हैं। अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार सुबह लगभग 8:37 बजे गोसाईंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर तिब्बती क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसका असर यह हुआ कि ल्हेन्दे नदी अचानक हिमस्खलन से अवरुद्ध हो गई। यही नदी तिब्बत में आगे बढ़कर नेपाल में त्रिशूली नदी में मिल जाती है और भोटेकोशी कहलाती है। राष्ट्रीय विपदा जोखिम न्यूनीकरण और व्यवस्थापन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) को भी चीनी सूत्रों से यही प्रारंभिक जानकारी मिली है।
2. हिमताल विस्फोट (जीएलओएफ) की आशंका
इस क्षेत्र में कई बड़े हिमताल मौजूद हैं, इसलिए वैज्ञानिक इस बात की भी गहन जांच कर रहे हैं कि क्या हिमस्खलन के साथ-साथ कोई हिमताल भी फटा है। जल और मौसम विज्ञान विभाग (डीएचएम) का मानना है कि नेपाल या तिब्बत के किसी क्षेत्र में हिमताल विस्फोट की पूरी संभावना है। गौरतलब है कि पिछले साल (8 जुलाई, 2025) भी इसी ल्हेन्दे नदी में ऐसी ही अचानक बाढ़ आई थी, जिसका मुख्य कारण उपग्रह के चित्रों के विश्लेषण से हिमताल विस्फोट ही पाया गया था।
वैज्ञानिक इस हिमस्खलन के पीछे उसी समय क्षेत्र में आए भूकंप को भी एक संभावित ट्रिगर मान रहे हैं। अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार सुबह लगभग 8:37 बजे गोसाईंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर तिब्बती क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसका असर यह हुआ कि ल्हेन्दे नदी अचानक हिमस्खलन से अवरुद्ध हो गई। यही नदी तिब्बत में आगे बढ़कर नेपाल में त्रिशूली नदी में मिल जाती है और भोटेकोशी कहलाती है। राष्ट्रीय विपदा जोखिम न्यूनीकरण और व्यवस्थापन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) को भी चीनी सूत्रों से यही प्रारंभिक जानकारी मिली है।
2. हिमताल विस्फोट (जीएलओएफ) की आशंका
इस क्षेत्र में कई बड़े हिमताल मौजूद हैं, इसलिए वैज्ञानिक इस बात की भी गहन जांच कर रहे हैं कि क्या हिमस्खलन के साथ-साथ कोई हिमताल भी फटा है। जल और मौसम विज्ञान विभाग (डीएचएम) का मानना है कि नेपाल या तिब्बत के किसी क्षेत्र में हिमताल विस्फोट की पूरी संभावना है। गौरतलब है कि पिछले साल (8 जुलाई, 2025) भी इसी ल्हेन्दे नदी में ऐसी ही अचानक बाढ़ आई थी, जिसका मुख्य कारण उपग्रह के चित्रों के विश्लेषण से हिमताल विस्फोट ही पाया गया था।
3. भारी बारिश नहीं है वजह
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई सामान्य मानसून बाढ़ नहीं थी। जल और मौसम विज्ञान विभाग के विशेष अपडेट के मुताबिक, मंगलवार और बुधवार को इस पूरे क्षेत्र में कोई भारी बारिश नहीं हुई थी । बारिश न होने के बावजूद अचानक पानी का इतना बड़ा रेला आना इस बात की पुष्टि करता है कि यह पानी किसी प्राकृतिक अवरोध के अचानक टूटने से ही आया है।
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई सामान्य मानसून बाढ़ नहीं थी। जल और मौसम विज्ञान विभाग के विशेष अपडेट के मुताबिक, मंगलवार और बुधवार को इस पूरे क्षेत्र में कोई भारी बारिश नहीं हुई थी । बारिश न होने के बावजूद अचानक पानी का इतना बड़ा रेला आना इस बात की पुष्टि करता है कि यह पानी किसी प्राकृतिक अवरोध के अचानक टूटने से ही आया है।
नेपाल में इस बाढ़ की चपेट में भारतीय कैसे आए?
- इस बाढ़ की चपेट में आने वाले और संपर्क से बाहर हुए अधिकतर भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते तिब्बत (चीन) जा रहे थे।
- ये भारतीय और अन्य विदेशी यात्री आज सुबह नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी में थे और वहां से सीमा पार कर तिब्बत प्रवेश की तैयारी कर रहे थे।
- इसी दौरान अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने सीमावर्ती गांवों, सड़कों और अहम बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से बहा दिया, जिससे यात्रियों का संपर्क टूट गया।
नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ के बाद संपर्क विहीन हुए कुल 384 पर्यटकों और यात्रियों में से कम से कम 105 भारतीय नागरिक और 37 अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) हैं। ये तीर्थयात्री ट्रेवल एजेंसियों, जैसे- सम्राट टूर्स एंड ट्रेवल्स, लीफ हॉलीडेज, कैलाश जर्नी, आदि के जरिए इस धार्मिक यात्रा पर निकले थे।
नेपाल में अचानक आई इस भयंकर बाढ़ के बाद सरकार, स्थानीय प्रशासन, नेपाली सुरक्षा बल और विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
सुरक्षा बलों और हेलीकॉप्टरों की भारी तैनाती: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने तत्काल कदम उठाते हुए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को बचाव कार्यों में लगा दिया है। नेपाली सेना के मुताबिक, बाढ़ क्षेत्र में सेना के छह और निजी कंपनियों के आठ हेलीकॉप्टर राहत व बचाव कार्यों के लिए आसमान से निगरानी और निकासी में जुटे हैं। इसके अलावा प्रभावित इलाकों की मदद के लिए पड़ोसी जिलों से अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को भी रवाना किया गया है।
नेपाल में राहत-बचाव कार्य के लिए क्या किया जा रहा?
नेपाल में अचानक आई इस भयंकर बाढ़ के बाद सरकार, स्थानीय प्रशासन, नेपाली सुरक्षा बल और विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
सुरक्षा बलों और हेलीकॉप्टरों की भारी तैनाती: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने तत्काल कदम उठाते हुए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को बचाव कार्यों में लगा दिया है। नेपाली सेना के मुताबिक, बाढ़ क्षेत्र में सेना के छह और निजी कंपनियों के आठ हेलीकॉप्टर राहत व बचाव कार्यों के लिए आसमान से निगरानी और निकासी में जुटे हैं। इसके अलावा प्रभावित इलाकों की मदद के लिए पड़ोसी जिलों से अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को भी रवाना किया गया है।
भोटेकोशी नदी में आई बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला
रेस्क्यू और आपातकालीन चिकित्सा: सैन्य प्रवक्ता के मुताबिक, भोटेकोशी नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक कम से कम 25 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से 23 लोगों का इलाज रसुवा जिला अस्पताल में चल रहा है। गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को एयरलिफ्ट कर इलाज के लिए काठमांडू लाया गया है। घायलों के त्वरित इलाज के लिए त्रिशूली नदी के किनारे दो सर्जनों सहित 10 डॉक्टरों की एक अस्थायी मेडिकल यूनिट बनाई गई है। साथ ही काठमांडू के वीर अस्पताल और ट्रमा सेंटर में बाढ़ पीड़ितों के लिए 100 आपातकालीन बेड आरक्षित रखे गए हैं।
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निचले इलाकों को खाली कराना और चेतावनी: रसुवा से नीचे की ओर बहने वाली त्रिशूली नदी के तटीय क्षेत्रों- नुवाकोट, धादिङ, गोरखा और चितवन के जिला अधिकारियों को नदी किनारे रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को मोबाइल एसएमएस और फोन कॉल के माध्यम से सतर्क किया जा रहा है। ज्यादा खतरे वाले जोन में पृथ्वी राजमार्ग, त्रिभुवन राजमार्ग और अन्य नदी कॉरिडोर वाले राजमार्गों को एहतियातन बंद करने की अपील की गई है।
उच्च स्तरीय आपात बैठकें: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री ने सिंह दरबार में राष्ट्रीय विपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवस्थापन परिषद की तत्काल बैठक बुलाई और गृह मंत्री सुदन गुरुंग के नेतृत्व में आपातकालीन राहत समीक्षा बैठक की गई। साथ ही बागमती प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण थापा मगर अपने मंत्रियों के साथ खुद नुकसान का आकलन करने और राहत वितरण का समन्वय करने के लिए हवाई निरीक्षण पर रवाना हो चुके हैं। प्रमुख राजनीतिक दलों (जैसे एमाले और नेकपा) ने भी अपने कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर मदद के लिए सक्रिय करने के लिए आकस्मिक बैठकें बुलाई हैं।
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क्या नेपाल की इस बाढ़ से बिहार पर भी खतरा?
नेपाल की इस अचानक आई बाढ़ के कारण बिहार में खतरा पैदा हो सकता है और इसी को देखते हुए बिहार सरकार और राज्य प्रशासन पूरी तरह से सतर्क (हाई अलर्ट) मोड पर आ गया है। दरअसल, भोटेकोशी नदी में पानी बढ़ने और त्रिशूली नदी बेसिन में आए उफान की वजह से गंडक नदी प्रणाली में पानी का बहाव अचानक और बहुत ज्यादा बढ़ सकता है, क्योंकि त्रिशूली बेसिन का पानी सीधे गंडक में ही आता है।गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए एहतियात के तौर पर वाल्मीकिनगर स्थित बैराज के सभी 36 फाटकों को खोल दिया गया है। बुधवार दोपहर को वहां पानी का बहाव 86,000 क्यूसेक था और यह लगातार बढ़ रहा था। इसकी बारीकी से निगरानी के लिए मुख्यालय से एक तकनीकी टीम भी भेजी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल के देवघाट गेज पर जलस्तर बढ़ने के बाद उस बढ़े हुए पानी के रेले को वाल्मीकिनगर बैराज तक पहुंचने में लगभग 3.5 घंटे का समय लग सकता है।
बिहार सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए क्या तैयारी की?
इस स्थिति के मद्देनजर प्रशासन ने संभावित क्षेत्रों से लोगों को निकालने की तैयारी शुरू कर दी है। तटबंधों के भीतर रहने वाले लोगों को लाउडस्पीकर (पब्लिक एड्रेस सिस्टम) के जरिए लगातार चेतावनी दी जा रही है ताकि वे समय रहते सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। साथ ही बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमों को तैनात किया जा रहा है।दूसरी तरफ बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की है और सभी संबंधित विभागों को लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। पटना के सिंचाई भवन में केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण सेल को चौबीसों घंटे के लिए सक्रिय कर दिया गया है। लोग किसी भी आपात स्थिति या तटबंध में रिसाव/दरार की शिकायत टोल-फ्री नंबर 1800-345-6145 पर कर सकते हैं।