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ईरान युद्ध से पस्त पाकिस्तान: पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए बढ़ाई सख्ती, जनता के सामने गिड़गिड़ाई शहबाज सरकार

Tue, 12 May 2026 11:16 AM IST
रिया दुबे इस्लामाबाद, पीटीआई
इस्लामाबाद, पीटीआई Published by: रिया दुबे Updated Tue, 12 May 2026 11:16 AM IST
सार

ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण पाकिस्तान पर ऊर्जा संकट गहरा गया है। इसी के चलते शहबाज शरीफ सरकार ने देशभर में लागू मितव्ययिता अभियान को 13 जून 2026 तक बढ़ा दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं।

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Pakistan battered by Iran war: increased strictness to save petrol and diesel
पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका-ईरान के बीच समझौता न हो पाने के कारण पैदा हुई अनिश्चितता के बीच शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान में लागू देशव्यापी मितव्ययिता अभियान को 13 जून 2026 तक बढ़ा दिया है। नाजुक युद्धविराम की स्थिति और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने यह फैसला लिया है।
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क्या है मितव्ययिता अभियान?

मितव्ययिता अभियान का मतलब होता है खर्चों में कटौती करके संसाधनों को बचाने की कोशिश करना। जब किसी देश की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता है, ईंधन या जरूरी चीजों की कमी होती है, या सरकार वित्तीय संकट से जूझ रही होती है, तब सरकार ऐसे कदम उठाती है।
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शहबाज सरकार ने कैसे बढ़ाई समयसीमा?

पाकिस्तान सरकार ने पहली बार 9 मार्च को कई सख्त आर्थिक और ईंधन बचत उपायों की घोषणा की थी। यह कदम अमेरिका और इस्राइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले और उसके बाद ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के कारण उठाया गया था। शुरुआती तौर पर ये मितव्ययिता उपाय दो महीनों के लिए लागू किए गए थे।
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सोमवार को पाकिस्तान सरकार के कैबिनेट डिवीजन की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि ईंधन संरक्षण और अतिरिक्त मितव्ययिता उपायों की निगरानी करने वाली समिति की सिफारिशों पर विचार करने के बाद प्रधानमंत्री ने इन उपायों की अवधि 13 जून 2026 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

प्रमुख उपायों में क्या-क्या शामिल?

सरकार द्वारा लागू प्रमुख उपायों में सरकारी वाहनों के लिए ईंधन भत्ते में 50 प्रतिशत की कटौती शामिल है। हालांकि एंबुलेंस और सार्वजनिक बसों जैसे परिचालन वाहनों को इससे छूट दी गई है। इसके अलावा 60 प्रतिशत सरकारी वाहनों को बंद रखने और जरूरी राष्ट्रीय हितों से जुड़े मामलों को छोड़कर विदेशी दौरों पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला भी जारी रहेगा।


पाकिस्तान पश्चिम एशिया से आने वाली तेल आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर है। ईरान युद्ध के चलते देश की प्रमुख सप्लाई लाइन प्रभावित हुई, जिससे सामान्य प्रशासनिक और आर्थिक गतिविधियां चलाना मुश्किल हो गया।

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