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Pakistan: अमेरिका-पाकिस्तान के संबंध सुधरने की राह फंसे हुए हैं भारत और चीन के पहलू

Thu, 29 Sep 2022 06:16 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 29 Sep 2022 06:16 PM IST
सार

Pakistan: एक संवाद के दौरान बिलावल भुट्टो ने चीन के बारे में ब्लिंकेन के बयान पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। लेकिन उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर मसले पर भारत से मतभेद के बावजूद पाकिस्तान भारत के साथ जिम्मेदारी भरा संबंध बनाना चाहता है...

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Pakistan: Aspects of India and China being stuck on the way to improve US-Pakistan relations
Pakistan- Bilawal Bhutto with Antony Blinken - फोटो : Agency

विस्तार

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी की वाशिंगटन यात्रा से अमेरिका और पाकिस्तान का संबंध एक नए मोड़ पर पहुंचा है। यहां कूटनीति विशेषज्ञों की राय है कि दोनों देशों ने समझदारी दिखाई, तो वर्षों से घिरे संदेहों से आगे निकल कर अब दोनों देश एक बार फिर से दोस्ती का रिश्ता बना सकते हैं।

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इन विशेषज्ञों के मुताबिक अफगानिस्तान में तालिबान को पाकिस्तान के समर्थन, पाकिस्तान में अमेरिका विरोधी भावनाओं की लहर, और भारत से गहराते अमेरिका के रिश्ते अमेरिका-पाकिस्तान के बीच रुकावट रहे हैं। इसके बावजूद दोनों देशों ने अब व्यापार और जलवायु परिवर्तन के मसले पर सहयोग बढ़ाते हुए रिश्ता मजबूत करने की इच्छा दिखाई है।

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लेकिन एक राय यह है कि भारत से अमेरिका के और चीन से पाकिस्तान के गहराते संबंध अभी भी मजबूत रिश्ता बनाने राह में एक बड़ी रुकावट हैं। वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन और बिलावल की बातचीत के दौरान भी यह मसला उठा। वार्ता के बाद भारत से संबंधित पाकिस्तान के एतराज की तरफ इशारा करते हुए ब्लिंकेन ने कहा- ‘हमने भारत के साथ जिम्मेदारी भरे संबंध को संभालने के महत्त्व पर बातचीत की।’ साथ ही उन्होंने चीन से पाकिस्तान के संबंध पर अपनी चिंता बिलावल को बताई। ब्लिंकेन ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने पाकिस्तान से कहा है कि वह चीन से संपर्क कर उसे कर्ज राहत देने पर सहमत करे।

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लेकिन मंगलवार को वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक विल्सन सेंटर में एक संवाद के दौरान बिलावल भुट्टो ने चीन के बारे में ब्लिंकेन के बयान पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। लेकिन उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर मसले पर भारत से मतभेद के बावजूद पाकिस्तान भारत के साथ जिम्मेदारी भरा संबंध बनाना चाहता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में ऐसा करना बेहद कठिन बना हुआ है।

पाकिस्तानी नेताओं की यात्रा के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान को बाढ़ राहत में सहायता के लिए एक करोड़ डॉलर अतिरिक्त देने की घोषणा की। ये रकम पहले से घोषित साढ़े पांच करोड़ डॉलर के अलावा होगी। इसके अलावा अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने हाल में पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमानों के लिए 45 करोड़ डॉलर के पाट-पुर्जे देने की घोषणा की है।

अमेरिका के एफ-16 संबंधी फैसले की भारत ने आलोचना की है। इस बारे में पूछे जाने पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा- ‘हम भारत या पाकिस्तान से अपने संबंध को एक दूसरे से जुड़ा नहीं मानते। हमारा भारत से अलग रिश्ता है और पाकिस्तान से अलग।’

ब्लिंकेन ने यह स्वीकार किया कि अफगानिस्तान के मामले में पाकिस्तान के साथ अमेरिका के मतभेद बने हुए हैं। लेकिन उन्होंने कहा- अफगानिस्तान के मामले में हमारा मकसद समान हैं। दोनों देश एक अधिक स्थिर, अधिक शांतिपूर्ण और ऐसा अफगानिस्तान चाहते हैं जहां सभी अफगानियों का भविष्य स्वतंत्र हो।

पाकिस्तान के विश्लेषकों की राय है कि दोनों पक्षों ने अपने मतभेदों को खुलेआम स्वीकार किया है। इससे यह संकेत मिला है कि वे इन मतभेदों के बावजूद संबंध आगे बढ़ाने की इच्छा रखते हैं। मगर चीन से पाकिस्तान और भारत से अमेरिका के गहराते संबंध के पहलू ऐसे हैं, जिनको लेकर इस इच्छा को पूरा करना कठिन बना रह सकता है।

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