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Pakistan: आर्थिक संकट के बीच अमेरिका-ब्रिटेन से नजदीकी बढ़ा रहा पाकिस्तान! क्या यह चीन से दूरी के संकेत?

Mon, 15 Aug 2022 08:57 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 15 Aug 2022 08:57 PM IST
सार

जनरल बाजवा पहले पाकिस्तानी सेना प्रमुख हैं जिन्हें रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट में पासिंग आउट परेड के दौरान ब्रिटेन की रानी के संप्रभु प्रतिनिधि होने का सम्मान दिया गया है। 

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Pakistan Army Chiefs visit to Sandhurst a strategic shift away from China and towards West
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देश में गंभीर आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने हाल ही में रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट की यात्रा की है। इस यात्रा को इस्लामाबाद की चीन से दूरी और पश्चिम की ओर एक रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
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जनरल बाजवा पहले पाकिस्तानी सेना प्रमुख हैं जिन्हें रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट में पासिंग आउट परेड के दौरान ब्रिटेन की रानी के संप्रभु प्रतिनिधि होने का सम्मान दिया गया है। उन्होंने कथित तौर पर ब्रिटेन के शीर्ष रक्षा और खुफिया अधिकारियों सहित अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों के साथ मुलाकात की।
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आर्थिक संकट के बीच चीन से नहीं मिल रही सहायता
गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान को अपने करीबी सहयोगी चीन से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिल रही है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) के नाम पर अरबों डॉलर का निवेश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को सुधारने में विफल रहा। दरअसल चीन ने अब सारी फंडिंग रोक दी है और पाकिस्तान ने यह भी देख लिया कि श्रीलंका का क्या हाल हुआ जिसे चीन ने अपने कर्ज जाल में फंसा लिया है। 
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इस साल के शुरुआत में इमरान खान के पद से हटने के बाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख अमेरिका पहुंचे थे। उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका के साथ संबंधों के मुद्दे पर सेना, इमरान खान एक पेज पर नहीं हैं। बाजवा ने पाकिस्तान में राजनीतिक बदलाव के दौरान यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ बेहतर संबंधों की भी बात कही थी। 

आतंक का समर्थन करने पर आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा पाक
पाकिस्तान को आतंकवादी संगठनों का समर्थन और उनका वित्त पोषण करने के लिए पश्चिम से आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख चीन और पश्चिम के बीच संबंधों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता धन की भूखी सेना के लिए धन की खोज करना है। 

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इस्लामाबाद के साथ छह बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेल आउट पैकेज को पुनर्जीवित करने के लिए प्रारंभिक समझौता किया है। पाकिस्तान और आईएमएफ ने 2019 में समझौता किया था लेकिन इस साल की शुरुआत से एक बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की किश्त जारी नहीं की गई। 

बाजवा ने पश्चिमी देशों के बीच अपनी व्यक्तिगत छवि सुधारने का प्रयास किया?
कई विश्लेषक जनरल बाजवा की हाल की ब्रिटेन यात्रा को पश्चिमी देशों के बीच उनकी व्यक्तिगत छवि-निर्माण अभ्यास के रूप में देख रहे हैं। कनाडा स्थित एक पाकिस्तानी राजनीतिक विश्लेषक हैदर मेहदी ने अपने वीडियो बयान में कहा, "दुनिया पाकिस्तान की वास्तविकता जानती हैकि यहां नागरिक अधिकारों, मानवाधिकारों के साथ क्या हो रहा है। देश में एक अघोषित मार्शल लॉ है। उन्हें सैंडहर्स्ट क्यों आमंत्रित किया गया? ऐसा इसलिए क्योंकि वह पश्चिमी देशों के बीच अपनी छवि बनाना चाहते हैं।  यह पाकिस्तान के भीतर भी जनरल बाजवा की छवि बनाने का प्रयास है।

बाजवा की मेजबानी करने पर ब्रिटेन की आलोचना
कुछ पर्यवेक्षक इसे एक रणनीतिक  बदलाव मान रहे हैं। हालांकि कई लोगों ने प्रतिष्ठित रॉयल मिलिट्री अकादमी में जनरल बाजवा की मेजबानी के लिए ब्रिटेन की आलोचना की है। उनका कहना है कि यह व्यक्ति अपने ही देश में मानवाधिकारों के हनन के लिए जिम्मेदार है। 

निर्वासित पाकिस्तानी पत्रकार ताहा सिद्दीकी ने ट्वीट किया, इस तरह की पश्चिमी शक्तियां पाकिस्तान में मानवाधिकारों के दुरुपयोग करने वालों के साथ मिली हुई हैं, अगर जनरल बाजवा जैसे व्यक्ति को मुख्य अतिथि के रूप में बोलने के लिए आमंत्रित करते हैं तो यह ब्रिटेन के लिए शर्म की बात है। 


पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया शाखा देश के विभिन्न प्रांतों के राजनीतिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और छात्रों की न्यायेतर हत्याओं, यातनाओं और अपहरण में व्यापक रूप से लगी हुई है।
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