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Pakistan Terrorism: वो फोटो जिससे हुई पाकिस्तान की किरकरी, मिले आतंकियों-सेना के साथ होने के सबूत, ये है पहचान
Mon, 12 May 2025 07:23 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 12 May 2025 07:23 PM IST
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सार
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पाकिस्तान में आतंकियों के जनाजे में जुटा आतंकी सरगना और सैन्य अफसर।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
भारत की तरफ से पाकिस्तान में घुसकर किए गए सटीक हमलों का निशाना यूं तो पड़ोस में छिपे आतंकवादी और उनके ठिकाने थे, लेकिन इसका असर दूरगामी रहा। भारत के इन हमलों ने पाकिस्तानी सेना, उसके नेतृत्व और पुलिस की आतंकवाद के साथ मिलीभगत की पोल भी खोलकर रख दी। इसका पहला सबूत करीब चार दिन पहले मिला था, जब भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने एक प्रेस वार्ता के दौरान आतंकियों के जनाजे की एक तस्वीर जारी की थी। इसमें साफ दिखाया गया था कि ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए आतंकियों के जनाजे में न सिर्फ मोस्ट वॉन्टेड आतंकी शामिल हुआ था, बल्कि पाकिस्तानी सेना के टॉप अफसर और पुलिसकर्मी तक इसका हिस्सा बने थे।ऐसे में यह जानना अहम है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद कैसे पाकिस्तान से आई एक वायरल तस्वीर पड़ोसी देश के लिए ही गले की फांस बन गई है? जिस तस्वीर को भारत के विदेश सचिव ने जारी किया, उसमें दिखने वाले चेहरे कौन हैं? उस तस्वीर की पूरी कहानी क्या है? भारत ने इस फोटो के जरिए पाकिस्तान को आगे कैसे घेरने की तैयारी की है? आइये जानते हैं...
कैसे एक तस्वीर ने बताई ऑपरेशन सिंदूर की सफलता
पाकिस्तान से आई जिस एक तस्वीर ने पूरी दुनिया में हलचल मचाई है उसने एक साथ पाकिस्तान के आंतकवाद से जुड़े चेहरे को भी बेनकाब कर दिया है। भारत की ओर से साझा की गई तस्वीर लश्कर-ए-तैयबा के मुरीदके की है, जो कि उन नौ आतंकी कैंपों में शामिल था, जिन्हें भारत ने निशाना बनाया। पाक सेना के अधिकारी आतंकियों के जनाजे में नमाज पढ़ते और शवों को कंधा देते दिखे। खास बात यह रही कि आतंकियों के शव पाकिस्तानी झंडे में लिपटे हुए थे, जिससे यह साफ संकेत मिला कि पाकिस्तान इन्हें राजकीय सम्मान दे रहा है।
पाकिस्तान से आई जिस एक तस्वीर ने पूरी दुनिया में हलचल मचाई है उसने एक साथ पाकिस्तान के आंतकवाद से जुड़े चेहरे को भी बेनकाब कर दिया है। भारत की ओर से साझा की गई तस्वीर लश्कर-ए-तैयबा के मुरीदके की है, जो कि उन नौ आतंकी कैंपों में शामिल था, जिन्हें भारत ने निशाना बनाया। पाक सेना के अधिकारी आतंकियों के जनाजे में नमाज पढ़ते और शवों को कंधा देते दिखे। खास बात यह रही कि आतंकियों के शव पाकिस्तानी झंडे में लिपटे हुए थे, जिससे यह साफ संकेत मिला कि पाकिस्तान इन्हें राजकीय सम्मान दे रहा है।
विक्रम मिस्री ने इस तस्वीर को साझा करने के साथ आतंकियों और पाकिस्तान सरकार के जुड़ाव का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा, "जो तस्वीर सामने आई, उनमें जनाजों को पाकिस्तानी झंडे से लपेटा गया था, यानी उन्हें राजकीय सम्मान दिया जा रहा था। आम नागरिकों की मौत पर आमतौर पर ऐसा नहीं होता। हमने पाकिस्तान में आतंकियों पर हमला किया था। पाकिस्तान में आतंकियों को राजकीय सम्मान दिए जाने की प्रथा रही है।"
अब जानें- मुरीदके के आतंकी कैंप में क्यों हुआ भारत का हमला?
लाहौर से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित मुरीदके आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा और इसकी शाखा जमात उद दावा का केंद्र माना जाता है। मुरीदके में लश्कर ए तैयबा का ट्रेनिंग सेंटर है और यह करीब 200 एकड़ इलाके में फैला है। भारत में साल 2008 में हुए मुंबई हमले में भी लश्कर का हाथ था। 26/11 के हमलावरों की ट्रेनिंग भी मुरीदके में ही हुई थी। मुरीदके में मरकज तैयबा लश्कर का सबसे अहम केंद्र है।
Operation Sindoor: पड़ोसी का नापाक चेहरा बेनकाब, भारत ने उजागर किए आतंकियों के जनाजे में शामिल अफसरों के नाम
रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2000 में मुरीदके में मरकज तैयबा के निर्माण के लिए खूंखार आंतकी ओसामा बिन लादेन ने एक करोड़ रुपये की मदद की थी। मरकज तैयबा में मस्जिद और एक गेस्ट हाउस भी है। मुंबई हमले में पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब की ट्रेनिंग भी मरकज तैयबा में ही हुई थी। इसके अलावा डेविड कोलमैन हेडली और फिलहाल भारत की गिरफ्त में मौजूद तहव्वुर हुसैन राणा ने भी मुरीदके का दौरा किया था। हाफिज सईद, जकी उर रहमान लखवी के घर भी मरकज तैयबा में ही मौजूद बताए जाते हैं।
लाहौर से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित मुरीदके आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा और इसकी शाखा जमात उद दावा का केंद्र माना जाता है। मुरीदके में लश्कर ए तैयबा का ट्रेनिंग सेंटर है और यह करीब 200 एकड़ इलाके में फैला है। भारत में साल 2008 में हुए मुंबई हमले में भी लश्कर का हाथ था। 26/11 के हमलावरों की ट्रेनिंग भी मुरीदके में ही हुई थी। मुरीदके में मरकज तैयबा लश्कर का सबसे अहम केंद्र है।
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रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2000 में मुरीदके में मरकज तैयबा के निर्माण के लिए खूंखार आंतकी ओसामा बिन लादेन ने एक करोड़ रुपये की मदद की थी। मरकज तैयबा में मस्जिद और एक गेस्ट हाउस भी है। मुंबई हमले में पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब की ट्रेनिंग भी मरकज तैयबा में ही हुई थी। इसके अलावा डेविड कोलमैन हेडली और फिलहाल भारत की गिरफ्त में मौजूद तहव्वुर हुसैन राणा ने भी मुरीदके का दौरा किया था। हाफिज सईद, जकी उर रहमान लखवी के घर भी मरकज तैयबा में ही मौजूद बताए जाते हैं।
मुरीदके में जिसके जनाजे में जुटे आतंकी-अफसर, वहां कौन मारा गया?
1. मुदस्सर खादियन खास उर्फ मुदस्सर उर्फ अबू जुंदाल, लश्कर-ए-तैयबा- मुरीदके में मरकज तैयबा का प्रभारी।
- पाकिस्तानी सेना की ओर से सुपुर्द-ए-खाक के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
- पाकिस्तानी सेना प्रमुख और पंजाब की मुख्यमंत्री (मरियम नवाज) ने पुष्पांजलि अर्पित की गई।
- जनाजे की नमाज एक सरकारी स्कूल में हुई, जिसका नेतृत्व जमात-उद-दावा (एक घोषित वैश्विक आतंकवादी) के हाफिज अब्दुल रऊफ ने किया।
- पाकिस्तानी सेना के एक सेवारत लेफ्टिनेंट जनरल और पंजाब पुलिस के आईजी प्रार्थना समारोह में शामिल हुए।
2. खालिद अबु अकाशा
- लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख आतंकियों में शामिल। मुरीदके आतंकी कैंप का प्रबंधक और लश्कर के आतंकी सरगना हाफिज अब्दुल रऊफ की सुरक्षा का जिम्मेदार।
- हाफिज मोहम्मद सईद का दामाद। अफगानिस्तान से पाकिस्तान तक हथियार और गोला-बारूद की तस्करी करने का आरोपी।
- जम्मू-कश्मीर में हमलों और वापस आने के लिए आतंकियों को ट्रेनिंग देने वालों में शामिल। हाल ही में लश्कर का मुख्यालय मुरीदके में बनवाया।
इन दोनों के अलावा भारत के हमले में एक और आतंकी कारी अब्दुल मलिक के मारे जाने की खबरें भी सामने आई हैं। वह हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा (जेयूडी) से जुड़ा था।
आतंकियों के जनाजे में कौन शामिल हुआ?
मुरीदके में जो हमला हुआ, उसमें पाकिस्तान के आतंकियों से लेकर अफसरों और पुलिसवालों तक की मौजूदगी दर्ज की गई। भारतीय सेना ने इन्हें दर्शाती हुई तस्वीर भी जारी की।हाफिज अब्दुल रऊफ, लश्कर-ए-तैयबा
पहले सोशल मीडिया और फिर भारत के विदेश सचिव ने जिस फोटो को पेश किया, उसमें एक मौलाना को मारे गए आतंकियों के लिए नमाज अदा करते देखा जा सकता है। उसका नाम हाफिज अब्दुल रऊफ बताया गया है। पाकिस्तान के न्यूज चैनल- समा टीवी में भी इससे जुड़ा एक वीडियो प्रसारित हुआ।
🔴 #BREAKING Hafiz Abdul Rauf, a US-designated global terrorist and a Lashkar e Taiba commander, leads funeral prayers for those killed in India’s strikes pic.twitter.com/YG6W9vuSWp
— Taha Siddiqui (@TahaSSiddiqui) May 7, 2025
हाफिज अब्दुल रऊफ लश्कर-ए-तैयबा से ही जुड़े एक संगठन अल खिदमत का सरगना है। वह 1999 से ही लश्कर के शीर्ष आतंकी नेतृत्व का हिस्सा है। उस पर लश्कर के अलग-अलग अभियानों को आगे बढ़वाने का जिम्मेदार माना जाता है। 2006 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट और 2008 में 26/11 के हमले में भी उसकी भूमिका रही थी।
लश्कर-ए-तैयबा में रऊफ ने कई जिम्मेदारियां संभालीं। वह इस आतंकी संगठन का प्रवक्ता भी रहा और कई मौकों पर खुलेआम पाकिस्तान में घूमता भी दिखा। रऊफ पर आतंक फैलाने के लिए युवाओं की भर्ती करने और उन्हें आत्मघाती हमलावर बनने की ट्रेनिंग देने का भी आरोप है। 2010 में अमेरिका ने उसे वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने उसकी संपत्तियां जब्त कीं और अपने नागरिकों को उससे संपर्क न रखने की हिदायत दी।
- लेफ्टिनेंट जनरल फैयाज हुसैन शाह, लाहौर में स्थित IV कोर के कोर कमांडर
- लाहौर में 11वीं इन्फैंट्री डिवीजन के मेजर जनरल राव इमरान सरताज
- ब्रिगेडियर मोहम्मद फुरकान शब्बीर
- डॉ. उस्मान अनवर, पंजाब पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल (आईजी)
- मलिक शोएब अहमद भर्थ, पाकिस्तान पंजाब विधानसभा के सदस्य
आगे क्या हो सकता है भारत का कदम?
इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर आने के बाद भारत ने आतंकवादियों, पाकिस्तानी सेना, पाकिस्तान की सरकार और प्रशासन की मिलीभगत को उजागर किया है।
इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर आने के बाद भारत ने आतंकवादियों, पाकिस्तानी सेना, पाकिस्तान की सरकार और प्रशासन की मिलीभगत को उजागर किया है।
- सबसे पहले विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने वायरल फोटो के जरिए इस मुद्दे को उठाया।
- इसके बाद भारत के डीजीएमओ स्तर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में चिह्नित कर के पाकिस्तानी आतंकी और अधिकारियों की पहचान उजागर की गई।
- सोमवार को भारत के केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों ने भी पाकिस्तान में आतंकवाद और सेना के जुड़ाव को लेकर सवाल पूछे।
माना जा रहा है कि इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर चर्चा में लाने के बाद भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भी इस मुद्दे को उठा सकता है। भारत इन तस्वीरों और सैन्य अधिकारियों की पहचान को यूएनएससी की 1267 कमेटी के सामने पेश करेगा और पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मानकों को तोड़ने की दलील भी पेश की जाएगी। इतना ही नहीं भारत फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) से भी पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर सकता है, जिससे उसकी आर्थिक और वाणिज्यिक गतिविधियां संकट में आ सकती हैं।