Pakistan: इमरान राहत की सांस नहीं लेना देना चाहते हैं शहबाज सरकार को
Pakistan: विश्लेषकों के मुताबिक इमरान खान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी पर हमले की साजिश में शामिल रहने का आरोप लगाने से पाकिस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान हिल गया है। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब किसी राजनेता नेता ने सीधे सेना से टकराव मोल लेने की ऐसी कोशिश की हो...
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बीते हफ्ते हुए हमले से देश भर में पैदा हुई सहानुभूति लहर के बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने शहबाज शरीफ सरकार पर दबाव और बढ़ाने तैयारी कर ली है। लाहौर के शौकत खानम अस्पताल में इलाज कराने के बाद खान रविवार को लाहौर स्थित अपने निवास स्थान पर लौट गए। वहीं उन्होंने मंगलवार से अपना लॉन्ग मार्च फिर शुरू करने का एलान किया। इसके पहले टीवी चैनल अल-जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष ने कहा- ‘चोरों की इस आयायित सरकार से डरने के बजाय मैं मर जाना पसंद करूंगा।’
लॉन्ग मार्च के दौरान पंजाब के वजीराबाद में हुए हमले में पांव में कई गोलियां लगने से खान घायल हो गए थे। लॉन्ग मार्च को वजीराबाद में ही रोक दिया गया था। अब मंगलवार को वहीं से इसे शुरू किया जाएगा। इस बीच देश में इस हमले को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। इमरान खान ने हमले की साजिश रचने का दोष प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, गृह मंत्री राना सनाउल्लाह और सेना के काउंटर-इंटेलिजेंस के प्रमुख मेजर जनरल फैसल नसीर पर लगाया है।
इस बीच सनाउल्लाह ने चेतावनी दी है कि वजीराबाद में हुए हमले के मामले में एफआईआर दर्ज कराते वक्त उसमें सेना के किसी अधिकारी का नाम शामिल ना करें। हमले के सिलसिले में रविवार तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी। सनाउल्लाह ने कहा- खान ने ऐसा किया, तो इसका मतलब होगा कि वे सीधे सेना को इस मामले में घसीट रहे हैं।
एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में गृह मंत्री ने भारत की तरफ इशारा करते हुए कहा- ‘अगर एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कराई जाती है, तो उससे पड़ोसी देश में क्या अर्थ निकाला जाएगा। अगर कोई धोखेबाज (फ्रॉड) व्यक्ति अनुचित उद्देश्य से केस दर्ज कराने की कोशिश करता है, तो ऐसे में पुलिस को यह अधिकार है कि वह एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दे।’
विश्लेषकों के मुताबिक इमरान खान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी पर हमले की साजिश में शामिल रहने का आरोप लगाने से पाकिस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान हिल गया है। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब किसी राजनेता नेता ने सीधे सेना से टकराव मोल लेने की ऐसी कोशिश की हो। विश्लेषकों के मुताबिक सेना इसे सिर्फ इसलिए बर्दाश्त कर रही है, क्योंकि इस समय इमरान खान की लोकप्रियता का स्तर काफी ऊंचा है। सेना उन पर कार्रवाई करके जन विरोध को और भड़काने से बच रही है।
इस बीच पीटीआई नेता आजम स्वाती के उत्पीड़न का वीडियो बहुचर्चित होने से भी सरकार और सुरक्षा एजेंसियां दबाव में हैं। बताया जाता है कि ये वीडियो खुद सुरक्षा एजेंसियों ने रिकॉर्ड किया और स्वाती के परिवार को डराने के लिए उसे उनकी पत्नी के पास भेज दिया। स्वाती की पत्नी ने प्रेस कांफ्रेंस कर ये वीडियो सार्वजनिक कर दिया। वीडियो में स्वाती को नंगा कर उन्हें उत्पीड़ित करने के दृश्य दर्ज हैं।