Pakistan-Afghanistan Clash: खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है पाकिस्तान और अफगानिस्तान का टकराव
Pakistan-Afghanistan Clash: पर्यवेक्षकों के मुताबिक पहले तालिबान और पाकिस्तान के बीच करीबी रिश्ते थे। मगर बीते कई महीनों से इसमें तनाव आ गया है। पिछले महीने तनाव काफी बढ़ गया, जब अफगानिस्तान सरकार ने पाकिस्तान पर अमेरिका से मिल कर उसके खिलाफ ड्रोन हमलों की साजिश रचने का आरोप लगाया...
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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ रहा टकराव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। खबर है कि बुधवार को तालिबान और पाकिस्तान के सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें दोनों तरफ के कई लोग हताहत हुए। दोनों पक्षों ने दावा किया है कि फायरिंग दूसरी तरफ से शुरू हुई। पश्चिम एशिया की वेबसाइट दक्रैडल.को ने बताया है कि गोलीबारी में तीन पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। अब दोनों देशों के अधिकारियों ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है।
गोलीबारी की घटना अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांत पकटिया और पाकिस्तान के जिले कुरम से लगी सीमा पर हुई। पाकिस्तान की सेना के जन संपर्क विभाग ने एक बयान में कहा कि अफगानिस्तान सीमा के अंदर से दहशतगर्दों ने पाकिस्तानी सैनिकों पर गोली चलाई। लेकिन तालिबान के प्रवक्ता बिलाल करीमी ने आरोप गया कि फायरिंग पहले पाकिस्तान की तरफ से शुरू हुई।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक पहले तालिबान और पाकिस्तान के बीच करीबी रिश्ते थे। मगर बीते कई महीनों से इसमें तनाव आ गया है। पिछले महीने तनाव काफी बढ़ गया, जब अफगानिस्तान सरकार ने पाकिस्तान पर अमेरिका से मिल कर उसके खिलाफ ड्रोन हमलों की साजिश रचने का आरोप लगाया। काबुल स्थित तालिबान सरकार ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हमला करने के लिए अमेरिका को पाकिस्तानी वायु क्षेत्र का इस्तेमाल करने की इजाजत दी है।
तालिबान सरकार में रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब ने तब पाकिस्तान सरकार से कहा था कि उसके वायु क्षेत्र के इस्तेमाल के बारे में उसका अमेरिका से जो समझौता हुआ है, उसे वह तुरंत रद्द करे। याकूब तालिबान के संस्थापक मुल्ला मोहम्मद उमर के बेटे हैं। याकूब ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अफगानिस्तान के सभी रडार सिस्टमों को नष्ट कर दिया है। मगर उन्होंने कहा कि अमेरिका तालिबान को इतने अंधेरे में नहीं डाल सका है कि उसे अपने वायु क्षेत्र का ‘गैर कानूनी उल्लंघन’ नजर ना आए।
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार ने अपने देश के वायु क्षेत्र के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। लेकिन इस वर्ष अप्रैल में इमरान खान की सरकार गिरने और शहबाज शरीफ की सरकार बनने के बाद इस नीति में बदलाव के संकेत मिले हैं। आरोप है कि शरीफ सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से कर्ज दिलवाने में मदद के बदले अमेरिका को अपने वायु क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति दी है।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक और टकराव आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर को लेकर खड़ा हुआ है। पिछले दिनों पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि अफगानिस्तान ने मसूद अजहर को पनाह दे रखी है। पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पत्र भेज कर तालिबान से कहा कि वह तुरंत इस आतंकवादी को पाकिस्तान के हाथों सौप दे। इसमें कहा गया कि अजहर अफगानिस्तान के प्रांत नांगरहार में छिपा हुआ है।
लेकिन तालिबान ने इस आरोप का सिरे से खंडन कर दिया। उसने यह भी कहा कि उसे इस बारे में पाकिस्तान से कोई पत्र नहीं मिला है। बाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने कहा कि पत्र भेजने की बात सही नहीं है। मगर पाकिस्तानी मीडिया में कहा गया है कि अजहर को लेकर दोनों देशों में तनाव है, ये बात सरकारी अधिकारी भी मानते हैं।