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पाकिस्तान : 18 साल से जेल में बंद ईशनिंदा का आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
Fri, 27 Sep 2019 01:43 AM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 27 Sep 2019 01:43 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
पाकिस्तान के विवादास्पद ईशनिंदा कानून के आरोपों के तहत 18 साल से जेल में बंद एक कैदी को देश की सर्वोच्च न्यायालय ने साक्ष्य की कमी के चलते बरी कर दिया। अदालत ने आरोपी को मौत की सजा सुनाई थी।
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डॉन अखबार की खबर के अनुसार बुधवार को न्यायमूर्ति सज्जाद अली शाह की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों वाली सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद वजीह-उल-हसन को ईशनिंदा के आरोपों से बरी कर दिया।
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हसन के खिलाफ साल 1999 में एक वकील को ईशनिंदा वाले पत्र लिखने के संबंध में मामला दर्ज किया गया था। वर्ष 2001 में एक हस्तलिखित विशेषज्ञ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आरोपी की लिखावट कथित पत्रों से मेल खाती है।
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इसके बाद लाहौर की एक अदालत ने हसन को दोषी ठहराते हुए उसे मौत की सजा सुनाई थी। इस फैसले को लाहौर सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। पाकिस्तान की दंड संहिता के तहत ईशनिंदा के अपराध में मृत्यु या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष इस बात को साबित करने में नाकाम रहा है कि पत्र वास्तव में उसने ही लिखे थे। इसके बाद इस मामले को खारिज कर दिया गया। न्यायालय ने यह भी कहा कि मामले में कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं है।