Pakistan: विधेयकों पर हुए विवाद के बीच खुलासा, राष्ट्रपति अल्वी ने खुद को बचाने के लिए सचिव को किया बर्खास्त
राष्ट्रपति अल्वी ने सोमवार को कहा था कि मैंने आधिकारिक गोपनीयता (संशोधन) विधेयक, 2023 और पाकिस्तान सेना (संशोधन) विधेयक, 2023 पर व्यक्तिगत रूप से कोई भी हस्ताक्षर नहीं किए हैं। वहीं, सचिव ने खुद को बेकसूर बताया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पाकिस्तान में लगातार राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है। एक दूसरे पर लगातार आरोप मढ़े जा रहे हैं। इस बीच, यहां के राष्ट्रपति और उनके सचिव के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। दरअसल, राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने हाल ही में दो प्रमुख विधेयकों पर हस्ताक्षर करने को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद अपने सचिव को बर्खास्त कर दिया। अब कहा जा रहा है कि अल्वी ने इस मामले से अपना नाम हटाने के लिए यह फैसला लिया था। मंगलवार को मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि बर्खास्त अधिकारी ने खुद को निर्दोष बताया और जांच की मांग की।
सोमवार को किया था बर्खास्त
गौरतलब है, राष्ट्रपति अल्वी ने सोमवार को कहा था कि मैंने आधिकारिक गोपनीयता (संशोधन) विधेयक, 2023 और पाकिस्तान सेना (संशोधन) विधेयक, 2023 पर व्यक्तिगत रूप से कोई भी हस्ताक्षर नहीं किए हैं। साथ ही अपने सचिव वकार अहमद को सोमवार को यह कहते हुए बर्खास्त किया था कि उन्होंने अपने कर्मचारियों को बिना हस्ताक्षर किए वापस करने का निर्देश दिया था।
राष्ट्रपति सचिवालय ने एक बयान में कहा कि अल्वी ने सचिव अहमद को पद से हटाने के लिए कहा है, जिनकी सेवाओं की अब कोई जरूरत नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अहमद को हटाए जाने को उनकी कथित गुस्ताखी की सजा के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इस मामले में उनकी संलिप्तता का कोई सीधा संबंध नहीं था।
सचिव ने खुद को बताया निर्दोष
इस बीच, अहमद ने खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने अपनी बर्खास्तगी को लेकर एक पत्र लिखा है, जिसमें पद से हटाने के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा। इतना ही नहीं, उन्होंने राष्ट्रपति से किसी भी कदाचार को उजागर करने के लिए संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) या किसी अन्य एजेंसी के माध्यम से मामले की जांच शुरू करने का भी आग्रह किया।
पत्र लिखकर कहा यह
पूर्व सचिव ने गोपनीय पत्र में कहा कि मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि विधेयकों से संबंधित किसी भी अनियमितता के लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं। मेरी बर्खास्तगी न्याय पर आधारित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि देरी और अवज्ञा के आरोपों के विपरीत, विधेयकों से संबंधित दस्तावेज अभी भी राष्ट्रपति कक्ष में मौजूद हैं।
बेगुनाही के सबूत भी
अहमद ने कहा कि पाकिस्तान सेना अधिनियम (संशोधन) विधेयक से संबंधित फाइलें 21 अगस्त तक मेरे कार्यालय में वापस नहीं की गई थीं। उन्होंने कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य अदालत के समक्ष गवाही देने के लिए तैयार हूं। मैं अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सबूत भी पेश कर सकता हूं।
उन्होंने कहा कि आधिकारिक गोपनीयता (संशोधन) विधेयक, 2023 से जुड़ीं फाइलें आठ अगस्त को राष्ट्रपति कार्यालय में प्राप्त हुई थीं। उन्होंने कहा कि इसे नौ अगस्त को राष्ट्रपति को भेज दिया गया था। राष्ट्रपति दोनों विधेयकों के तथ्यों से पूरी तरह अवगत हैं।
यह है प्रावधान
बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 75 के तहत, राष्ट्रपति को दस दिनों के भीतर किसी विधेयक को मंजूरी देनी होती है और उसी प्रावधान के तहत वह उतने ही दिनों के भीतर किसी विधेयक को पुनर्विचार के लिए संसद में वापस भेज सकता है। विवाद के बारे में लंदन में पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) नेता शहबाज शरीफ ने कहा कि घटना की आधिकारिक जांच शुरू की जानी चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने कहा कि पारदर्शी जांच के माध्यम से तथ्यों को निर्धारित करने के लिए अल्वी के आचरण की पारदर्शी जांच की जानी चाहिए।