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Pakistan: हाईकोर्ट ने अपने ही मंत्रालय को लगाई फटकार, भारतीय नागरिक के निर्वासन से जुड़ा है मामला

Sat, 16 Mar 2024 05:25 PM IST
मिथिलेश नौटियाल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Sat, 16 Mar 2024 05:25 PM IST
सार

भारतीय नागरिक के निर्वासन को लेकर सिंध हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी। हाईकोर्ट ने इस मामले में गृह मंत्रालय को फटकार लगाई है। 

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Pak court slams interior ministry for its failure to deport Indian national
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

पाकिस्तान की एक अदालत ने एक भारतीय नागरिक के निर्वासन को लेकर गृह मंत्रालय को फटकार लगाई है। दरअसल अब्दुल मुगनी नाम के एक भारतीय नागरिक को ग्यारह साल पहले यानी 2013 में इस्पहानी रोड के पास से गिरफ्तार किया गया था। उस पर विदेशी अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। उस दौरान सत्र अदालत ने अब्दुल मुगनी को 6 महीने की सजा सुनाई थी। इस बाद मुगनी ने सिंध उच्च न्यायालय में अपनी सजा के खिलाफ अपील दायर की थी। 

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सात साल बीत जाने के बाद भी नहीं हुआ निर्वासन
ग्यारह साल का समय बीत जाने के बाद भी मुगनी को रिहा नहीं किया गया। ऐसे में सिंध उच्च न्यायालय ने गृह मंत्रालय को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में संबंधित सचिव को यह बताने के लिए बुलाया जाएगा कि उनका विभाग ऐसे मामलों में कैसे काम कर रहा है। न्यायमूर्ति मोहम्मद करीम खान आगा की अध्यक्षता वाली सिंध उच्च न्यायालय (एसएचसी) की एकल पीठ ने आंतरिक मंत्रालय को मामले के तथ्यों से अच्छी तरह जानकारी रखने वाले किसी एक अधिकारी को नियुक्त करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई में अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। पाकिस्तान के डॉन अखबार की रिपोर्ट में शनिवार को बताया गया है कि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अपीलकर्ता एक भारतीय नागरिक था। प्रयासों की कमी के कारण गृह मंत्रालय उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि करने में सक्षम नहीं था। 

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कोर्ट ने दिया निर्वासन की व्यवस्था करने का निर्देश 
सिंध उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि चूंकि अपीलकर्ता पहले ही अपनी सजा काट चुका है, इसलिए जेल अधीक्षक को गृह विभाग के माध्यम से उसके निर्वासन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, पिछली सुनवाई में, यह भी नोट किया गया था कि इस मामले में आंतरिक मंत्रालय के साथ एक पत्राचार किया गया था। इसके बाद भी आंतरिक मंत्रालय की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। ऐसे में अदालत ने सचिव को एक नोटिस जारी किया था। नोटिस में कहा गया कि अपीलकर्ता को अभी तक निर्वासित क्यों नहीं किया गया है।
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13 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई 
शुक्रवार को मंत्रालय के एक अनुभाग अधिकारी ने कोर्ट में आकर कहा कि कुछ मुद्दों के कारण निर्वासन नहीं हो पाया। पीठ ने अपने आदेश में कहा ‘यह काफी असाधारण लगता है कि सात साल बीत जाने के बाद भी गृह मंत्रालय यह पुष्टि नहीं कर पाया है कि अपीलकर्ता भारतीय नागरिक है या नहीं। प्रथम दृष्टया यह गृह मंत्रालय के प्रयासों की कमी के कारण हुआ है। अदालत के पास पाकिस्तान सरकार के गृह मंत्रालय के सचिव को व्यक्तिगत रूप से बुलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। सचिव से पूछा जाएगा कि ऐसे मामलों में उनका विभाग कैसे काम कर रहा है।’ इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 13 अप्रैल तय की गई है।

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