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पाकिस्तान: कोर्ट ने रिटायर्ड जनरल को रिहा करने का दिया आदेश, जनता को भड़काने का लगा था आरोप

Thu, 02 Mar 2023 06:41 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 02 Mar 2023 06:41 PM IST
सार

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थक माने जाने वाले लेफ्टिनेंट जरनल (सेवानिवृत्त) अमजद शोएब को इस्लामाबाद पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार किया था। शोएब पर राष्ट्रीय संस्थानों के खिलाफ जनता को भड़काने का आरोप लगा था।

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Pak court quashes charge of causing mischief against high-ranking retired Army general
पाकिस्तानी सेना के ले.जन (रि.) अमजद शोएब - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान की एक अदालत ने गुरुवार को सेना के उच्च पदस्थ सेवानिवृत जनरल अमजद शोएब पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया। अदालत ने उन्हें पुलिस हिरासत से तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। 

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पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थक माने जाने वाले लेफ्टिनेंट जरनल (सेवानिवृत्त) अमजद शोएब को इस्लामाबाद पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार किया था। शोएब पर राष्ट्रीय संस्थानों के खिलाफ जनता को भड़काने का आरोप लगा था और तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। 
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शोएब को तीन दिन की रिमांड खत्म होने के बाद जिला एवं सत्र अदालत में पेश किया गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ताहिर अब्बास ने मामले पर सुनवाई की। उनके वकील मियां अशफाक ने अपनी दलील में मामले को 'फर्जी' बताया। उन्होंने कहा कि आरोपी ने टीवी टॉक शो में किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाया। वकील ने कहा, टीवी कार्यक्रम के दौरान जो बयान दिया है, वह उनका है। हम अपने बयान पर कायम हैं।
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वकील ने आगे कहा कि देर रात टीवी कार्यक्रम रात 11 बजे समाप्त हो गया था और अगले दिन सेना का कोई भी जवान या सिविल सेवक शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे नहीं आया। इसके बाद अदालत ने आरोपी से अपने बयान को स्पष्ट करने के लिए कहा। सेवानिवृत्त जनरल ने कहा कि वह ऐतिहासिक अर्थों में बात कर रहे थे और लोगों को विद्रोह करने के लिए नहीं कह रहे थे। उन्होंने कहा, मैं इतिहास के बारे में बात कर रहा था कि धरने और रैलियों से कभी कुछ हासिल नहीं हुआ। 

सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने शोएब के खिलाफ लगे आरोपों को खारिज करते हुए फैसला सुनाया और टिप्पणी की कि रिमांड के लिए आरोपों को साबित करने के लिए कोई पुष्ट सबूत नहीं हैं।


इससे पहले संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने उन्हें पिछले साल सात सितंबर को पेश होने के लिए तलब किया था। तब उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और एक इजरायली टीम के बीच बैठक हुई है। हालांकि, वह एफआईए की साइबर अपराध शाखा के समक्ष पेश नहीं हुए थे।

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