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पाकिस्तानी सेना के जनरल ने स्वीकारा- बलूच आंदोलन को खत्म करना चाहता है चीन

Sun, 31 Jan 2021 03:14 PM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Sun, 31 Jan 2021 03:14 PM IST
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Pak army General admits China's role in crushing Baloch freedom movement
- फोटो : social media

पाकिस्तान और चीन भारत में अशांति फैलाने और छवि खराब करने के लिए तरह-तरह नापाक हरकतें करते रहते हैं। अब पाकिस्तानी सेना के एक जनरल ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इसमें पाकिस्तानी सेना के जनरल ने पाकिस्तान में बलूच स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने में चीन की भूमिका को स्वीकारा है। उन्होंने कहा कि बीजिंग ने उसे बलूच लोगों के स्वतंत्रता संघर्ष को समाप्त करने के लिए छह महीने का काम दिया है।

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बांग्लादेशी समाचार पत्र 'द डेली सन' ने अपनी रिपोर्ट में पाक सेना के जनरल के हवाले से बताया कि चीन ने बलूच आंदोलन को कुचलने के लिए मुझे यहां तैनात किया है और मुझे छह महीने का काम दिया है। ईरान को पाकिस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल अयमान बिलाल ने कहा कि पाकिस्तान की सेना ईरान के अंदर जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।
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भारत के प्रभाव को कम करने के लिए चीन चुका रहा कीमत
प्रमुख जनरल अयमान बिलाल ने कहा, चीन ने मुझे वेतन और बड़ी राशि का भुगतान किया है और मुझे आधिकारिक तौर पर अपने क्षेत्रीय हितों के लिए और चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) के खिलाफ ईरान की साजिशों को विफल करने और इस क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए यहां तैनात किया गया है क्योंकि यह क्षेत्रीय हितों में एक तरह का निवेश है।

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बलूचिस्तान गरीबी के दलदल में जी रहे लोग 

इस्लामाबाद की ओर से कई विकास परियोजनाओं के बावजूद बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे गरीब और सबसे कम आबादी वाला प्रांत बना हुआ है। विद्रोही समूहों ने दशकों से प्रांत में एक अलगाववादी विद्रोह को भड़काया है। उनकी शिकायत है कि इस्लामाबाद और पंजाब प्रांत में केंद्र सरकार उनके संसाधनों का गलत तरीके से शोषण करती है। इस्लामाबाद ने 2005 में इस इलाकें में सैन्य अभियान शुरू किया था। 

एशिया में प्रभाव बढ़ाने को शुरू की सीपीईसी परियोजना 
वर्ष 2015 में चीन ने पाकिस्तान में 46 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आर्थिक परियोजना की घोषणा की, जिसमें से बलूचिस्तान एक अभिन्न अंग है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के साथ बीजिंग का उद्देश्य अमेरिका और भारतीय प्रभाव का मुकाबला करने के लिए पाकिस्तान और मध्य और दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव का विस्तार करना है। सीपीईसी पाकिस्तान के दक्षिणी ग्वादर बंदरगाह (626 किलोमीटर, कराची से 389 मील पश्चिम) को अरब सागर में चीन के पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र से जोड़ता है। इसमें चीन और मध्य पूर्व के बीच संपर्क को बेहतर बनाने के लिए सड़क, रेल और तेल पाइपलाइन लिंक बनाने की योजना भी शामिल है।

चीन की भागीदारी के विरोधी है बलूच

बलूचिस्तान में बलूच अलगाववादी, आतंकवादी और राजनीतिक समूह दोनों प्रांत में चीन की बढ़ती भागीदारी का विरोध करते हैं। पाकिस्तान में बलूच अलगाववादियों द्वारा किए गए घातक हमलों में एक उछाल ने चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट्स के जोखिम और लागत को बढ़ा दिया है। उन्होंने चीन के श्रमिकों और अधिकारियों पर कई हमले भी किए हैं। नवंबर 2018 में, बलूच अलगाववादियों ने पाकिस्तान के दक्षिणी कराची शहर में चीनी वाणिज्य दूतावास पर हमला किया। मेजर जेनरा अयमान बिलाल ने कहा कि बलूच आंदोलन की समाप्ति और सीपीईसी की सफलता पाकिस्तान और चीन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

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