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अध्ययन: दक्षिण एशियाई लोगों में कोरोना संक्रमण से मौत का खतरा दोगुना, वजह है यह जीन
Fri, 05 Nov 2021 04:32 PM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 05 Nov 2021 04:32 PM IST
सार
कोरोना वायरस महामारी से पूरी दुनिया लंबे समय से जूझ रही है। वैक्सीन आ जाने के बाद भी इसके नए और अधिक संक्रामक वैरिएंट समस्या का सबब बने ही हुए हैं। वहीं, वैज्ञानिकों ने एक ऐसे जीन का पता लगाया है जो कोरोना से मौत के खतरे को दोगुना कर सकता है। यह जीन दक्षिण एशियाई लोगों में ज्यादा पाया जाता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक जीन का पता लगाया है जो कोविड-19 महामारी से फेफड़ों को खराब करने और मौत के खतरे को दोगुना कर सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसा संभव है कि दक्षिण एशियाई मूल के लोगों में गंभीर बीमारी होने का खतरा इसी जीन की वजह से अधिक होता हो। इस जीन का नाम एलजेडटीएफएल1 (LZTFL1) है।
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समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने कहा कि यह जीन वायरस संक्रमण के प्रति फेफड़ों की प्रतिक्रिया के तरीके को बदल देता है। यह अब तक पहचाना गया सबसे महत्वपूर्ण आनुवंशिक जोखिम कारक है। दक्षिण एशियाई मूल के 60 फीसदी लोगों में इस जीन का संस्करण मिलता है वहीं यूरोपीय लोगों में यह आंकड़ा 15 फीसदी ही है।
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यह अध्ययन 'नेजर जेनेटिक्स' नामक जर्नल में गुरुवार को प्रकाशित हुआ था। इसके परिणाम भारतीय उपमहाद्वीप में कोविड-19 के प्रभाव की भी आंशिक रूप से व्याख्या कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और नई आण्विक तकनीकी का इस्तेमाल कर पता लगाया कि एलजेडटीएफएल1 जीन कोरोना से अधिक खतरे के लिए जिम्मेदार है।
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सुरक्षा तंत्र को बाधित कर देता है यह जीन
वैज्ञानिकों ने बताया कि यह जीन शरीर के एक प्रमुख सुरक्षा तंत्र को अवरोधित कर देता है, जिसका उपयोग फेफड़ों से जुड़ी कोशिकाएं आम तौर पर खुद को वायरल संक्रमण से बचाने के लिए करती हैं। हालांकि, जिन लोगों में यह जीन पाया जाता है उनके शरीर में यह प्रक्रिया अच्छे से काम नहीं करती और फेफड़ों की कोशिकाएं खुद को वायरस से बचा नहीं पाती हैं।
वैक्सीन से कम किया जा सकता है खतरा
वैज्ञानिकों ने कहा कि उन लोगों के लिए कोरोना टीका खास तौर पर महत्वपूर्ण है जिनमें इस जीन के चलते गंभीर संक्रमण का खतरा अधिक है। ऐसे लोगों को टीके से सुरक्षा देकर गंभीर संक्रमण का जोखिम कम किया जा सकता है। वहीं, कुछ स्वतंत्र विशेषज्ञों ने इस अध्ययन को लेकर कहा है कि यह महत्वपूर्ण है लेकिन इसमें अभी आगे और जांच करने की जरूरत है।