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कश्मीर पर इमरान खान की फिर 'बेज्जती', कश्मीर पर ओआईसी ने नहीं मानी ये बात
Fri, 07 Feb 2020 12:59 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 07 Feb 2020 12:59 PM IST
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इमरान खान (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
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इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) में शामिल मुस्लिम देशों के बीच अपनी आवाज कमजोर होने से पाकिस्तान की बौखलाहट साफ नजर आने लगी है। पाकिस्तान लंबे समय से ओआईसी से जुड़े देशों को कश्मीर के सवाल पर एक होकर आवाज उठाने की बात करता रहा है।
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दिसंबर में होने वाली इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले पाकिस्तान लगातार ओआईसी से कश्मीर के सवाल पर तत्काल बैठक बुलाने की मांग करता रहा है। लेकिन सउदी अरब इस सवाल पर पाकिस्तान के साथ नहीं दिख रहा है और नहीं चाहता कि ओआईसी की बैठक में कश्मीर के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाए।
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आगामी नौ फरवरी को ओआईसी के वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक जेद्दाह में होने जा रही है, जिसमें दिसंबर में होने वाली विदेश मंत्रियों की बैठक की तैयारियों और एजेंडे पर चर्चा होगी। ओआईसी से जुड़े राजनयिक सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि सउदी अरब कश्मीर के मसले पर तत्काल बैठक बुलाने के पक्ष में नहीं है और इमरान खान की बात को गंभीरता से नहीं ले रहा है। पाकिस्तान ने ओआईसी के इस रुख पर नाराजगी जताई है।
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इमरान खान ने हाल ही में मलेशिया के दो दिनों के दौरे के दौरान कश्मीर के मुद्दे को बेहद गंभीर बताते हुए मुस्लिम देशों को एक होने और इस्लामिक सहयोग संगठन से जुड़े देशों को इसे मजबूती से उठाने को कहा था। इमरान खान ने बेहद बौखलाहट के साथ कहा था कि दुनियाभर में मुसलमानों की संख्या सवा अरब से भी ज्यादा होने के बावजूद तमाम देशों में वे तमाम तरह की मुश्किल, उपेक्षा और नफरत सह रहे हैं।
इमरान ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे समय में मुस्लिम देशों को एक होने की जरूरत नहीं है। दुनियाभर में मुसलमान इसलिए तकलीफ और उपेक्षा झेलने को इसलिए मजबूर हैं क्योंकि हमारी कोई आवाज नहीं है और हम पूरी तरह विभाजित हैं।
इमरान खान ने ओआईसी पर निशाना साधा है और कहा कि जब कश्मीर या म्यांमार में मानवाधिकारों के हनन जैसे सवाल पर बैठक नहीं हो सकती, इसे लेकर कोई कदम नहीं उठाया जा सकता तो ऐसे में इस्लामिक सहयोग संगठन का क्या मतलब रह जाता है। इमरान पर आरोप है कि वह कश्मीर के सवाल पर इस्लामी देशों का एक अलग संगठन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।