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ब्रिटेन : सांसदों को नहीं गरीब बच्चों को दिया जाए खाना, नौ लाख से ज्यादा लोगों ने साइन की याचिका
Tue, 27 Oct 2020 12:52 PM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Tanuja Yadav
Updated Tue, 27 Oct 2020 12:52 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही है, कई देशों में इसकी वजह से आर्थिक संकट का भय पैदा हो गया है तो कहीं खाने का संकट सामने आ गया है। ब्रिटेन में एक ऑनलाइन याचिका दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि ब्रिटिश सांसदों को मुफ्त में खाना देने की सुविधा को खत्म किया जाए।
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याचिका में कहा गया है कि ब्रिटिश सांसदों को किसी भी सूरत में जनता के पैसों से मुफ्त या रियायती खाने की सुविधा ना दी जाए। सांसदों को रियायती खाने की सुविधा को हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहिए। पिटीशन में लिखा गया है कि सांसदों को मुफ्त में खाने देने की सुविधा से होने वाली बचत से ब्रिटेन के गरीब बच्चों को खाना मुहैया कराया जाए।
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बता दें कि इस पिटीशन पर अब तक नौ लाख से ज्यादा लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। इस बीच रॉयल कॉलेज ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड चाइल्ड हेल्थ के 2,200 डॉक्टरों ने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को एक पत्र लिखा है। डॉक्टरों ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में लिखा है कि ब्रिटेन के ज्यादातर स्कूल सोमवार से एक हफ्ते तक बंद रहेंगे।
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ऐसे में देश के करीब 40 लाख बच्चों को खाना नहीं मिल पाएगा क्योंकि ये बच्चे स्कूल के खाने पर ही निर्भर होते हैं। कोरोना जैसी महामारी की वजह से हजारों परिवारों की नौकरी चली गई है। कई परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, अपनी बचत को बचाने के लिए जरूरत से ज्यादा काम कर रहे हैं।
डॉक्टरों ने पीएम बोरिस जॉनसन को लिखे पत्र में फुटबॉलर मार्कस रैशफोर्ड की तारीफ भी की है। पत्र में लिखा गया है कि बाल गरीबी के खिलाफ रैशफोर्ड की पहल सराहनीय है। वे गरीब बच्चों को मुफ्त में खाना खिलाने का काम करते हैं और उनकी इस पहल के साथ कई डॉक्टर भी जुड़ चुके हैं।